ज़िया बिलाल: NEET परीक्षा में सफलता के झंडे गाड़ने वाला छात्र, जिसने सुपर-30 से पढ़ाई कर हासिल की 19वीं रैंक

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सोमवार देर शाम नीट 2021का रिजल्ट जारी किया गया। रहमानी सुपर-30 से तैयारी करने वाले मधुबनी के ज़िया बिलाल ने बिहार का परचम लहराया। उन्हें ऑल इंडिया में 19रैंक मिला है। ज़िया 715अंक लेकर बिहार में अव्वल रहे।

रहमानी सुपर-30 के हैं बिलाल

बिलाल ने पहले ही प्रयास में नीट के एग्जाम में सफलता पाई है। इनके पिता नहीं हैं। रहमानी सुपर-30 से लंबे अर्से से जुड़े शब्बीर अहमद बताते हैं कि बिलाल बिना पिता का बच्चा है। इसकी परवरिश भाई और मां ने की है। रहमानी-30में उसका दाखिला 2019में हुआ था। यहां नीट की तैयारी की। मुफ्त रहने और खाने की सुविधा के साथ इनकी तालीम व तरबियत की गई,जिसका नतीजा सामने है। उनका कहना है कि कुल मिला कर रहमानी सुपर 30के परिणाम अच्छे हैं। अभी बिहार के टॉप टेन स्टूडेंट्स की सूची फाइनल नहीं हुई है।

रहमानी सुपर-30

बिहार में इंजीनियरिंग एजुकेशन के क्षेत्र में अगर किसी का नाम लिया जाए तो सबसे पहले सुपर-30 के संचालक आनंद कुमार का जिक्र आता है जिन्होंने अपनी लगन के बूते सैकडों बच्चों को मुफ्त शिक्षा देकर आईआईटी की दहलीज तक पहुंचाया।

आनंद कुमार जैसा ही बेहतरीन काम कर रही है मुंगेर की रहमानी फाउंडेशन जिसने मुस्लिम समाज के हजारों वंचित बच्चों को तालीम देकर समाज की मुख्यधारा में ला खड़ा किया है।आनंद कुमार की सुपर-30की तरह ही रहमानी सुपर-30के छात्रों ने आईआईटी में भी झंडे गाड़ दिए। खास बात है कि रहमानी सुपर-30को साथ मिला है बिहार के पूर्व डीजीपी अभयानंद का। आनंद की सुपर-30की सफलता में भी अभयानंद का बड़ा योगदान रहा है।

रहमानी 30की स्थापना कब?

रहमानी 30की स्थापना 2008में मौलाना मोहम्मद वली रहमानी ने बिहार के पूर्व डीजीपी अभयानंद की देखरेख में किया था।इसका मकसद मुस्लिम समाज के छात्र-छात्राओं को उच्च प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराना एवं उन्हें उच्च संस्थानों में ले जाना था।

स्थापना के बाद से अब तक बहुत सारे छात्रों ने रहमानी- 30के बैनर तले इंजीनियरिंग, मेडिकल और अकाउंट के मैदान में महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की है। रहमानी 30के छात्र-छात्राओं ने साबित किया है कि इंजीनियरिंग, मेडिकल, चार्टर्ड एकाउंटेंट, एनडीए, ओलंपियाड, केवीपीवाई जैसी उच्च प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में एक मजबूत और स्पष्ट योजना के साथ भाग लिया जाए तो सफलता निश्चित ही प्राप्त होती है। इनमें से अधिकतर छात्र मुस्लिम समाज के उस वंचित तबके से आते हैं उनके घरवाले उनकी प्राथमिक शिक्षा तक की जिम्मेदारी भी वहन नहीं कर सकते।उन्हीं छात्रों को कोचिंग दिलाकर आईआईटी जैसी देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा के लिए तैयार करता है रहमानी सुपर-30।

रहमानी फाउंडेशन

मुंगेर के खानकाह रहमानी के सज्जादानशीं हजरत मौलाना मोहम्मद वली रहमानी ने 1996 में रहमानी मिशन के नाम से रहमानी फाउंडेशन की स्थापना की थी। इसी रहमानी फाउंडेशन के तहत साल 2008 में बिहार के मुंगेर से मुस्लिम समाज के पिछड़े और आगे पढ़ने में असमर्थ बच्चों को आगे बढ़ाने के प्रयास शुरू हुए। फाउंडेशन ने उस साल बिहार की राजधानी पटना में 10वीं और 12वीं के छात्रों की इंजीनियरिंग कोचिंग के लिए रहमानी सुपर-30 नाम से कोचिंग संस्थान शुरू किया।अगले साल 2009 में चार्टेड अकाउंटेंट की तैयारी के लिए कोचिंग संस्थान शुरू हुआ।

संस्थान में मुस्लिम समाज के ज्यादातर उन्हीं बच्चों को प्रवेश दिया जाता है जो पढ़ने लिखने में होनहार हैं, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण अपनी पढ़ाई जारी नहीं रख पाते। एंट्रेस टेस्ट के जरिए उन्हें कोचिंग के लिए चुना जाता है। फाउंडेशन की ओर से उसका एंट्रेंस टेस्ट पास करने वाले छात्रों के खाने पीने से लेकर रहने तक की सारी व्यवस्था की जाती है।शुरूआती सालों में संस्थान के छात्रों का सफलता प्रतिशत इक्का दुक्का रहा लेकिन जल्द ही यह रफ्तार पकड़ने लगा।

इसे उस समय बल मिला जब बिहार के पूर्व डीजीपी और आनंद के सुपर-30 में बच्चों को साइंस पढ़ाने वाले अभयानंद ने रहमानी फाउंडेशन से हाथ मिला लिया।इसके बाद तो जैसे संस्थान की सफलता को पंख लग गया। रहमानी फाउंडेशन के संस्थापक मौलाना मोहम्मद वली रहमानी का निधन हो गया है।उनके छोटे बेटे फहद रहमानी को रहमानी सुपर-30 को आगे बढ़ाने की जिम्मेवारी सौंपी गई है।बड़े बेटे फैसल वली रहमानी इमारत ए शरिया के अमीर ए शरीयत बने हैं। वली रहमानी इमारत ए शरिया के अमीर ए शरीयत भी थे।मौलाना मोहम्मद वली रहमानी  शरीयत से शिक्षा तक एक बरगद लगा गये हैं,जिसे सींचने  की जिम्मेदारी उनके दोनों बेटों और कौम पर है।

सभार आवाज़ द वायस