आख़िर मस्ज़िदों के पीछे पड़ने वाले लोग किस विचारधारा से आते है?

तारिक़ अनवर चंपारणी

साल 2019 में न्यूज़ीलैंड के मस्ज़िद में हमला करके 51 लोगों की हत्या कर दी गयी थी जब्कि 40 लोग घायल हुए थे। हमला करने वाले 28 वर्षीय व्यक्ति का नाम बरेंटन हैरिसन टेरन था। उसके पास लगभग पेज का एक मैनिफेस्टो था जिसका शीर्षक “द ग्रेट रिप्लेसमेंट” था। “द ग्रेट रिप्लेसमेंट” फ्रांस के एक थिंकर रेनॉड कम्यूस है। उसका आईडिया है कि फ्रांस में मुसलमानों का फैलाव हो रहा है। एक समय आयेगा की फ्रांस में मुसलमानों की आबादी फ्रेंच से अधिक हो जायेगी और फ्रांस की ओरिजिनल नस्ल को नष्ट कर देगी। यह बिल्कुल वही विचार है जो भारत में हिंदूवादियों के विचार है। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि न्यूज़ीलैंड में इतनी बड़ी घटना घटित हुई और उस घटना को अंजाम देने वाला आतंकी फ्रांस में रहने वाले रेनॉड कम्यूस की विचारों से प्रभावित था मगर फ्रांस की तरफ़ से रेनॉड के विरुद्ध कोई स्टैंड नहीं लिया गया।

फ्रांस, जिसे इस बात का घमण्ड है कि दुनिया को अंधकार से निकालकर पुनर्जागरण की तरफ़ लाने वाला फ्रेंच रेवोल्यूशन फ्रांस में हुआ था। फ्रांस को इस बात का भी घमण्ड है की वह सेक्युलरिज़्म, लिबर्टी, डेमोक्रेसी, फ़्रीडम, इक्वलिटी और ब्रोदरहुड का चैंपियन है और उसने ही दुनिया को रास्ता दिखाया है। उस फ्रांस में भी पन्द्रह से अधिक मस्जिदों को बंद कर दिया गया है। इस्लामोफोबिया के विरुद्ध आवाज़ बुलंद करने वाली ग्रुप कलेक्टिव अगेंस्ट इस्लामोफोबिया को बैन कर दिया गया है। जिस तरह से होलोकॉस्ट में यहूदियों को पहचानने के लिए कॉनसन्ट्रेशन कैम्प में नंबर लगाया जाता था ठीक उसी तरह से अब फ़्रांस में भी मुस्लिम स्टूडेंट्स को क्लास में नंबर अंकित किये जा रहे है।

इनसब के बावजूद आप देखेंगे कि पुनर्जागरण और फ्रेंच रेवोल्यूशन के बाद भी फ्रांस ने दुनिया भर में लगभग 4.5 मील की आबादी को ग़ुलाम बनाया और अपनी कॉलोनी में शामिल कर लिया था। यहाँ तक कि भारत में भी फ़्रांस की कॉलोनी स्थापित थी। ट्यूनीशिया, अल्जीरिया, फिलिस्तीन, बोस्निया, सीरिया और नार्थ अफ़्रीका के दूसरे देशों में करोड़ों लोगों का नरसंहार किया बल्कि अफ़्रीका में ऐसी भूखमरी फ़ैलाया की आजतक वह भूखमरी ख़त्म नहीं हुई है।

मैंने फ़्रांस का उदाहरण इसलिए दिया है ताकि यह समझने में आसानी हो कि संविधान में इक्वलिटी, फ्रीडम, सेक्युलरिज्म और फर्टेर्निटी लिख देने मात्र से कोई देश इसका चैंपियन नहीं हो सकता है। अगर ऐसा होता तब फ़्रांस के बारे में एमनेस्टी इंटरनेशनल और यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स और एमनेस्टी इंटरनेशनल यह कहने को मजबूर नहीं होती कि ह्यूमन राइट्स और फ्रीडम का सबसे अधिक वाईओलेशन फ्रांस में होता है।

भारत में जो कुछ भी हो रहा है दरअसल यह फ्रांस का फोटोकॉपी है और उसके थिंकर रेनॉड कम्यूस की विचारों से प्रभावित है। चाहे बाबरी मस्जिद की शहादत, मथुरा मस्ज़िद पर बवाल या गुड़गांव में नमाज़ को लेकर हो रहे बवाल यह सब दरअसल उसी “Replacism” की विचारधारा की बीज है और यह विचारधारा लिबरल, सेक्युलर और डेमोक्रेटिक सरकार की निगरानी में पनपती है।

(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं)

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