जावेद मियांदाद से क्यों खुन्नस रखते थे भारतीय क्रिकेटर? पाकिस्तान में होती थी प्रतिक्रिया

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वीर विनोद छाबड़ा

12 जून 1957 को कराची में जन्मे जावेद मियांदाद जब शिखर पर थे तो बहुत गुस्सैल होते थे. उन्हें स्ट्रीट फाईटर कहा जाता था. उन्होंने अर्श से फर्श तक का सफ़र कड़ी मेहनत से हासिल किया. उन्होंने पाकिस्तान के लिए खेलते हुए टेस्ट क्रिकेट में 124 टेस्ट में 52.57 की औसत से 8832 रन बनाये और ये लम्बे अरसे तक पाकिस्तानी रिकॉर्ड रहा. इसे यूनुस खान ने 2015 में तोड़ा. इंज़मामुल हक़ उनसे बस चार रन दूर रह गए. मियांदाद ने एकदिनी में भी बेहतरीन प्रदर्शन किया. 41.70 की एवरेज से 7381 रन बनाये. उन्हें लॉर्ड्स के प्रतिष्ठित ‘हाउस ऑफ़ फेम’ में भी जगह मिली. 1982 में विसडेन क्रिकेटर भी रहे. ईएसपीएन की ‘लीजेंड्स ऑफ़ क्रिकेट’ में उनका स्थान 44वां है. सचिन तेंदुलकर के साथ वो ही एकमात्र ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्हें छह एकदिनी वर्ल्ड कप में हिस्सा लेने का का सौभाग्य प्राप्त हुआ. सबसे कम उम्र (19 साल 119 दिन) में दोहरा टेस्ट शतक बनाने का वर्ल्ड रिकॉर्ड भी उनके नाम है. ऐसे कई अन्य  रिकॉर्ड भी उनके नाम हैं.

शानदार बल्लेबाज़ होने के बावजूद मियांदाद का कैरीयर हमेशा विवादों से घिरा रहा. 1979 में जब आसिफ़ इक़बाल ने कैप्टेंसी छोड़ी तो पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने 22 साल के युवा मियांदाद के कन्धों पर कप्तानी का बोझ डाल दिया. बोर्ड के इस फ़ैसले की पाकिस्तान में बहुत आलोचना हुई. ज़हीर अब्बास, इमरान ख़ान, सरफ़राज़ नवाज़ और वसीम बारी जैसे सीनियर तजुर्बेकारों को क्यों दर किनार किया गया? मियांदाद को गलियों में परवरिश पाने वाला आदमी कहा गया. सिंधी-पंजाबी अनबन से भी जोड़ कर देखा गया. उन दिनों पाकिस्तानी टीम में पंजाबियों का बहुत दबदबा होता था और मियांदाद एकमात्र खिलाड़ी थे जो सिंध से आते थे. उनकी कैप्टेंसी को लेकर टीम में काफ़ी अनबन भी रही. हालाँकि इस बीच मियांदाद मैदान में बहुत अच्छा परफॉर्म करते रहे. लेकिन ऑस्ट्रेलिया में डेनिस लिली पर बल्ला तानना उन पर भारी पड़ा. आख़िरकार 1982 में उनसे कैप्टेंसी लेकर इमरान ख़ान को दी गयी.

1982-83 में विज़िटिंग भारतीयों के विरुद्ध उनका प्रदर्शन बहुत शानदार रहा. उन्होंने मुद्दसर नज़र और ज़हीर अब्बास के बाद सबसे ज्यादा 594 रन बनाये. हैदराबाद (सिंध) टेस्ट में जब वो 280 पर थे तो कप्तान इमरान ने इनिंग डिक्लेयर कर दी. मियांदाद हैरान रह गए. दावा किया जाता है कि जिस फॉर्म में वो उस वक़्त खेल रहे थे, उसमें वो तिहरा शतक तो बना ही सकते थे और शायद सोबर्स का उस समय का अछूता 365 नॉट आउट का रिकॉर्ड भी तोड़ देते. इमरान के इस फ़ैसले की बहुत आलोचना हुई थी, सिंधी-पंजाबी के विवाद ने फिर सिर उठाया था. इमरान-मियांदाद की आपसी खुन्नस सतह पर आ गयी.

कहा जाता था, पाकिस्तान में मियांदाद कभी एलबीडब्ल्यू आउट नहीं हो सकते. दरअसल वो न्यूट्रल अंपायर का युग नहीं था. 1985-86 के श्रीलंका टूर के दौरान उन्हें एलबीडब्लू दिया गया तो वो अंपायरों से बहस करने लगे. जब वो पवेलियन लौट रहे थे तो एक तमाशबीन ने उन पर पत्थर फेंक दिया. इससे पहले की सुरक्षा दल एक्शन में आता, गुस्से से आगबबूला होकर मियांदाद बदला लेने के लिए फेंसिंग फांद कर भीड़ में घुस गए. ये तो शुक्र है कि सुरक्षा दल ने समय पर दख़ल दे दिया वरना मियांदाद दर्शकों के हाथ बुरी तरह पिट जाते.

मियांदाद से भारतीयों की खुन्नस बहुत पुरानी है जिसकी शुरुआत 1986 में शारजाह से हुई थी जब उन्होंने फ़ाईनल में चेतन शर्मा की आख़िरी गेंद पर छक्का मार कर पाकिस्तान को जिता दिया था. ये छक्का और मियांदाद अरसे तक भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के दिल में नासूर की तरह चुभते रहे. मियांदाद भी भारतीयों से खासी खुन्नस रखते थे. 1992 के एकदिनी वर्ल्ड कप मैच में कीपर किरण मोरे की नक़ल करते हुए जब वो मेंढ़क की तरह उछले तो उनकी खूब जग हंसाई हुई. अंततः पाकिस्तान ये मैच हार गया. लेकिन अंततः ऑस्ट्रेलिया में खेला गया ये वर्ल्ड कप पाकिस्तान ने ही जीता. 1996 के वर्ल्ड कप में उन्हें कब्र से निकाल बंगलौर के क्वार्टर फ़ाईनल मैच में शामिल किया गया, इस तथ्य के मद्देनज़र से कि हो सकता है, इस बूढ़े शेर की मौजूदगी से भारतीय टीम ख़ौफ़ खाये. लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ, उलटे पाकिस्तानी टीम एक बार फिर भारत से हार गयी. भारतीयों की मियांदाद से ख़ास खुन्नस की एक और वज़ह भी है, जो बहुत बड़ी है. भारत का नंबर एक दुश्मन माफ़िया 1992 के बॉम्बे ब्लास्ट्स का मास्टर माइंड दाऊद इब्राहिम मियांदाद का समधी है. दाऊद की बेटी मियांदाद के बेटे को ब्याही है.

कुछ साल पहले मियांदाद को आईसीसी ने क्रिकेट के प्रति उनके अपूर्व योगदान को देखते हुए उन्हें चीन भेजा ताकि वहां पर क्रिकेट को प्रोमोट करने में वो मदद करें. वहां उनके साथ बहुत बड़ा मज़ाक हुआ जिसे वो भूल नहीं सकते. हुआ यों कि खेल प्रेमी चीनी लोगों को बताया गया कि मियांदाद क्रिकेट के बहुत बड़े फन्ने-खां हैं, तुर्रम खां हैं, कई वर्ल्ड रिकार्ड्स के मालिक हैं. सब उन्हें कौतुहल से देखने लगे. तभी उनमें से एक ओलिंपिक प्रेमी बच्चे ने सवाल दाग दिया, वो सब तो ठीक है, लेकिन ये बताएं आपने अब तक कितने मैडल जीते हैं. मियांदाद खिसिया कर रह गए.