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डॉ. अंबेडकर के कैबिनेट मंत्री रहते आरक्षण के अधिकार से महरूम किए गए थे दलित मुस्लिम एंव ईसाईः डॉ. अय्यूब

नई दिल्ली/लखनऊः पीस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एंव पूर्व विधायक डॉक्टर अय्यूब हाल ही में जेल से बाहर आए हैं। जेल से बाहर आते ही उन्होंने आक्रामक तेवर अपना लिये हैं। उन्होंने आर्टिकिल 341 का मुद्दा उठाया है। डॉक्टर अय्यूब ने कहा कि अम्बेडकर जी ने कैबिनेट मंत्री रहते, सन 1950 की कैबिनेट मीटिंग में मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध दलितों को दलित आरक्षण से बाहर कराने का अध्यादेश पास कराया। सिख, बौद्ध को बाद में आरक्षण मिला, पर मुस्लिम, ईसाई दलित को नहीं। क्या यह धर्म के आधार पर देश के दलितों के साथ अम्बेडकर जी का भेदभाव नहीं?

डॉक्टर अय्यूब ने ये बातें एक ट्वीट करके कही हैं। उन्होंने एक और ट्वीट में कहा कि पिछड़ों व दलितों के सम्मान व अधिकार के नारों पर चार-चार बार बनी, सपा, बसपा की सरकारों को पिछड़े व दलित मुसलमान/ईसाइयों ने क़रीब 70-80% वोट दीया। सपा व बसपा सरकारों ने क़रीब 14 जातियों को विधान सभा से पास कराकर दलित आरक्षण देने केंद्र को भेजा उनमें एक भी दलित मुस्लिम/ईसाई क्यों नही? डॉक्टर अय्यूब ने द रिपोर्ट से बात करते हुए सवाल किया कि अगर कोई दलितों का नेता होने का दंभ भरता है, तब चाहे वह मायावती हों, या कोई और पार्टी उसे दलित मुस्लिम एंव ईसाई की भी लड़ाई को लड़ना चाहिए। क्योंकि मुस्लिम एंव ईसाई समाज में दलितों की एक बहुत बड़ी आबादी है, लेकिन उसे आरक्षण से महरूम किया हुआ है।

क्या है आर्टिकिल 341

पीस पार्टी के अध्यक्ष के बयान से आर्टिकिल 341 पर एक फिर बहस का विषय का बन सकता है। दरअस्ल  10 अगस्त 1950 को तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू सरकार ने एक अध्यादेश पास कराया था। जिसके मुताबिक़ अनुसूचित जाति के लोगो में केवल उन्हीं वर्गों आरक्षण तथा अन्य सुविधाओं का लाभ मिल सकता था  जो हिन्दू हों। इसके मुताबिक अनुसूचित जाति के किसी ऐसे व्यक्ति को आरक्षण का लाभ नहीं मिल सकता था जो गैर हिन्दू हैं। इसके खिलाफ सिख समुदाय के दलितों ने इसे असंवैधानिक अन्याय पूर्ण बताकर इसके खिलाफ अपने अधिकार की लड़ाई लड़ी तब 1956 में इस अध्यादेश में संशोधन करके हिंदू और सिख को भी इसमें शामिल कर लिया गया.

इसके बाद 1958 में दोबारा इस अध्यादेश को संशोधन करते यह बढ़ोतरी भी कि जिन दलितों के पूर्वज कभी हिदू धर्म से निकल गए थे यदि वह पुनः हिन्दू धर्म स्वीकार करें तो उन्हें भी आरक्षण व अन्य सुविधायें मिलेंगी। 1990 में इस अध्यादेश में एक संशोधन करके इसमें बौद्ध दलितों को भी शामिल कर लिया गया। लेकिन मुस्लिम एवं ईसाई दलित आज भी अपने आरक्षण के संवैधानिक अधिकार से वंचित हैं। और समय समय पर उनके द्वारा इसमें संशोधन की मांग होती रही है। इस आर्टिकल में शामिल होने के लिये संघर्ष करने वाले नेताओं का कहना है कि आर्टिकिल 341 में शामिल न करके मुस्लिम दलितों, एंव ईसाईयों से आरक्षण का अधिकार असंवैधानिक तरीके से छीना गया है जो कि संविधान की धारा 14 ,15 ,16 और 25 का खुला उल्लघन है।