अंधेरे में रोशनी की किरण, क्या रोशन होगी कांग्रेस की किस्मत?

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कुछ लोगों ने पूछा, कांग्रेस ने पिछले दशकों में कितना महिला सशक्तिकरण किया? स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान कांग्रेस ने तीन महिलाओं को पार्टी अध्यक्ष बनाया था. 1917 में एनी बेसेंट पार्टी की पहली महिला अध्यक्ष बनीं. 1925 में सरोजिनी नायडू कांग्रेस अध्यक्ष बनीं और 1933 में नेल्ली सेनगुप्ता कांग्रेस अध्यक्ष बनीं. 1925 में ही आरएसएस की स्थापना हुई थी. आजतक वह सोच नहीं पाया कि कोई महिला भी सरसंघचालक बन जाए. बीजेपी का गठन 1980 में हुआ तो कुछ महिला नेता जरूर पार्टी में आईं, लेकिन आजतक एक भी महिला अध्यक्ष नहीं बनी. खैर उन्हें छोड़िए.

भारत को आजादी मिलने तक कांग्रेस पार्टी में तीन महिला अध्यक्ष रह चुकी थीं. आजादी के बाद 1959 में इंदिरा गांधी एक साल के लिए अध्यक्ष बनीं. 1978 में इंदिरा गांधी फिर से अध्यक्ष बनीं और 1983 तक रहीं. इसके बाद 83 में फिर चुनीं गईं और मृत्युपर्यंत रहीं. राजीव गांधी के बाद कांग्रेस एक बिखरी हुई पार्टी थी. कांग्रेस के बार बार कहने के बाद 1998 में सोनिया गांधी ने पद संभाला. तब वे छह बार अध्यक्ष चुनी गईं.

पहली महिला प्रधानमंत्री भी कांग्रेस ने दिया. इंदिरा गांधी भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं और अब तक की सबसे कड़क प्रधानमंत्री रहीं. पहली महिला राष्ट्रपति भी कांग्रेस ने बनाया. पहली महिला लोकसभा स्पीकर कांग्रेस ने बनाया. पंचायतों में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण भी राजीव गांधी के समय कांग्रेस ने दिया. अब कई राज्यों में यह 50% है.

लोकसभा और विधानसभा में 33 फीसदी महिला आरक्षण की संस्तुति इंदिरा गांधी के समय हुई. बाद में संसद में विधेयक भी कांग्रेस ही लेकर आई. राज्यसभा में विधेयक पास भी हो गया, लेकिन लोकसभा में विधेयक गिर गया क्योंकि दलित और पिछड़े समाज के नेताओं की मांग थी कि उनके समाज के लिए प्रतिनिधित्व अलग से सुनिश्चित हो. यह मांग भी जायज थी. इसमें एससी/एसटी कोटे को शामिल किया गया, लेकिन सपा और जदयू ने खासा हंगामा किया, बिल पढ़ने तक ​नहीं दिया, न खुद पढ़ा. अंतत: सहमति नहीं बन सकी और वह विधेयक पास नहीं हो सका. नई सरकार आने के ​बाद उसकी कोई चर्चा नहीं हुई.

योगदान और हैं. अंतहीन हैं. अभी बस इतने याद हैं. मेरा बस इतना कहना है कि कोई भी पार्टी अगर महिलाओं, दलितों, आदिवासियों और पिछड़ों की भागीदारी बढ़ा रही है तो बिना वजह दांत काढ़ने की जगह उसका स्वागत कीजिए. हां, अगर आप संतुष्ट नहीं हैं तो सत्तारूढ़ पक्ष से मांग कीजिए कि कमी पूरी कर दे. हम आपका साथ देंगे.

(लेखक पत्रकार एंव कथाकार हैं, ये उनके निजी विचार हैं)

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