मैदान के अंदर विराट कोहली की कैप्टनशिप बाबर आज़म से अच्छी थी

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फ़ायक अतीक़ किदवई

आप जीतते है तो सबकुछ बेहतर मान लिया जाता हैं यहाँ तक बैटिंग कोच हेडन की भी जमकर तारीफ हो रही जबकि उन्हें टीम से जुड़े एक हफ्ता भी नही हुआ और न वो उर्दू समझते है और न पाकिस्तान के आधे  खिलाड़ी इंग्लिश। इतनी जल्दी आप जादू की छड़ी नही चला सकते पर जीत सबके लिए फायदेमंद होती है तो कल के हीरो हेडन भी हो गए।

बाबर आज़म प्लानिंग के साथ गए पर ये प्लान आपको मैदान पर बदलना पड़ता है, शाहीन आफरीदी ने पहले ही ओवर में दो विकेट लिए ऐसे में कैप्टनशिप करना आसान हो जाता है, कोई भी कैप्टन होता तो शाहीन से ही ओवर करवाता पर जब स्विंग मिल रही थी और विराट को तेज़ आउट स्विंगर बॉलर से दिक्कत होती है तो  ईमाद से ओवर करवाना समझदारी नही थी।

इमाद ने कसी हुई बॉलिंग की पर बीच के ओवरों में उसका तीसरा ओवर बनता था पर दो ओवर ही करवाये, हफ़ीज़ लेफ्ट हैंड बैट्समैन पर बहुत कामयाब है इसलिए उनसे ओवर करवाना ठीक फैसला था।

फील्डिंग में बदलाव कर रहे थे ये एक समझदारी थी। टीम सेलेक्शन में उनकी भी भारी कमी है, हसन अली भले विकेट ले गए हो पर कुछ सालों से वो बेहद औसत बॉलिंग कर रहें है जबकि विकल्प के तौर पर दाहनी मौजूद है और ये मैं दावा कर सकता हूँ बतौर बॉलर वो पूरी टीम में सबसे बेहतर है उसके पास गुड लेंथ से उछाल हैं।

जबकि कोहली की बात करें तो टॉस हार गए, दो विकेट गिरने के बाद उनके पास इस तरह ही बैटिंग करने के अलावा कोई और प्लान नही था, बॉल बैट पर आसानी से नही आ रही थी ऐसे में क्रिकेट समझने वाला हर खिलाड़ी जानता था 150 से 160 स्कोर बढ़िया होगा, ख़ासकर पाकिस्तान के लिए जिसके ऊपर ऑलरेडी दबाव है।

पर सबकुछ एकदम उलट गया, पिच में काफी फ़र्क़ आ गया, मसला सिर्फ ओस का नही रहा अब उछाल भी नही थी, कोई भी बॉल सीने तक नही जा रही थी।

चूंकि पहली इनिंग में बॉल काफी स्विंग हुई थी तो सभी को पता था भुवनेश्वर आम पिच पर स्विंग करा लेते है तो इसपर तो लहराती हुई फेंकेंगे, पहली बॉल हल्की स्विंग भी हुई  जिसे रिज़वान सही से खेल नही पाए पर अगली बॉल पर फ्लिक से चार रन लिए और फिर सिक्स ने सारा दबाव खत्म कर दिया।

कम स्कोर पर कैप्टन सोचता है कि बूमरह जैसे स्ट्राइक बॉलर को बचाये या ओवर निकलवाये, चूंकि जब एक ओवर बूमरह का उन्होंने बिना विकेट दिए खेल लिया तो आपके पास जल्द जल्द बदलाव के सिवा कुछ रह नही जाता, कोहली ने यही किया।

वो जो नया स्पिनर लाये थे ऐसा नही है उसने ठीक बॉलिंग नही की बल्कि उसने एक ओवर बाबर को थोड़ा परेशान किया और एकबार तो लेट कट में बचे भी। टीम सेलेक्शन यहाँ भी ठीक नही था, हार्दिक पांड्या फिट भी होते फिर भी वो टीम में रहने लायक नही है। पाकिस्तान टीम में कुछ बदलाव साफ देखने को मिला, फील्डिंग बेहतर थी और बैटिंग के वक़्त वो अपनी विकेट की क़ीमत समझते थे जबकि ऐसा पहले कभी नही देखा।

रिज़वान रन आउट से बचने के लिए पूरी तरह डाइव लगा रहा था यहाँ तक जब सिर्फ तीस रन बचे तब भी, किसी ने भी रिवर्स शॉट, पैडल स्वीप शॉट, पल्लू शॉट वगैरह नही खेला ये ज़ाहिर करता है कि वो विकेट फेंकना नही चाहते।

बाबर आज़म और रिज़वान दोनो स्लोवर को बहुत अच्छे से पढ़ रहे थे और सिंगल लेकर स्ट्राइक रोटेट कर रहे थे। बाबर का सबसे बड़ा प्लस पॉइंट है कि वो बहुत शांत है, एक पंच शॉट ने उनके क्लास को दिखा दिया कि वो किस स्तर के हैं।

खैर लोग दस विकेट से हार को बहुत बुरा समझ रहे है जबकि कम स्कोर पर अक्सर सेकेंड इनिंग में ऐसा हो जाता है, 1999 के वर्ल्ड कप में पाकिस्तान ने लीग मैच में ऑस्ट्रेलिया को हराया और फाइनल में 132 रन पर आउट हो गई, चूंकि पिच वाक़ई बॉलिंग के लिए बहुत अच्छी थी और शोएब अख़्तर वसीम, अकरम सकलैन जैसे बॉलर्स थे तो ये तय था कि ऑस्ट्रेलिया के भी तीन चार विकेट गिरेंगे पर हुआ ये की गिलक्रिस्ट ने धो दिया और नौ विकेट से जीत दर्ज की, कल के मैच में आप दस के बजाय नौ विकेट से हार जाते तो कुछ अनोखा नही हो जाता।

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