युवा सपनों का कब्रगाह बन चुका है उत्तर प्रदेश

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उत्तर प्रदेश में पिछले पांच साल में 83 लाख युवा भर्तियों में भ्रष्टचार के शिकार हुए और उनके सपनों को रौंदा गया। लगभग एक दर्जन बार या तो पेपर लीक हो गया, या परीक्षा कैंसिल हो गई, या किसी दूसरे तरह की धांधली हुई। भ्रष्टाचारियों पर बुल्डोजर चलाने का दावा जुमला था। बुल्डोजर हर बार युवाओं के सपनों पर चलाया गया।

सपा और बसपा की सरकारों में भी यही हाल था। अखिलेश यादव के कार्यकाल में यूपी लोकसेवा आयोग से लेकर हर विभाग ​भ्रष्टाचार के कारण चर्चा में रहा। भाजपा ने वादा किया कि वह आएगी तो यह भ्रष्टाचार रोक देगी। योगी आदित्यनाथ ने सत्ता संभाली तो आयोग को भंग कर दिया था। युवाओं को उम्मीद थी कि कुछ सुधार होगा, लेकिन योगी ने भर्तियों में भ्रष्टाचार के मामले में अखिलेश को भी पीछे छोड़ दिया।

मार्च 2017 में योगी ने शपथ ली। महज चार महीने बाद जुलाई 2017 में दारोगा भर्ती का पर्चा लीक हो गया। UPPCL का पेपर लीक हुआ। UPSSSC लोअर सबॉर्डिनेट का पेपर लीक हुआ। UPSSSC ट्यूबवेल ऑपरेटर परीक्षा का पेपर लीक हुआ। यूपी आरक्षी नागरिक पुलिस की परीक्षा पेपर अदला बदली के चलते रद्द हुई। धांधली के चलते ग्राम विकास अधिकारी की परीक्षा रद्द हो गई। 69000 शिक्षक भर्ती में भ्रष्टाचार हुआ। UPSSSC पेट एग्जाम और यूपी टीईटी का भी यही हाल हुआ।

योगी सरकार कोई भी परीक्षा बिना पेपर लीक या भ्रष्टाचार के नहीं करवा पाई। नवंबर 2021 में, जब चुनाव सिर पर थे और प्रदेश के युवा भर्तियों के लिए लाठी खा रहे थे, तब UPTET का पेपर लीक हो गया।

बुल्डोजरनाथ का पूरा कार्यकाल पर्चा लीक और भ्रष्टाचार का कार्यकाल रहा। वे बुल्डोजर लेकर निकले लेकिन उनकी आंख पर सांप्रदायिकता का चश्मा चढ़ा है। वे चुन चुनकर विरोधी पार्टी के मुसलमानों पर बुल्डोजर चलाते रहे और अपनी पार्टी के गुंडों, माफियाओं और भ्रष्टाचारियों को बुल्डोजर की कमान थमाते रहे।

युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी त्रासदी है। पिछली तीन सरकारें एक ऐसा पारदर्शी सिस्टम नहीं बना सकीं जिसमें योग्य युवाओं को रोजगार मिल सके। भाजपाई वॉट्सएप यूनिवर्सिटी में जहर फैलाते हैं कि बेरोजगारी की सबसे बड़ी वजह आरक्षण है। वे ऐसा इसलिए करते हैं ताकि सवर्ण और दलित-पिछड़े आपस में लड़ जाएं और इनसे सवाल न पूछें कि पांच साल में एक भी परीक्षा क्यों नहीं करा पाए।

जो भाजपा 70 लाख नौकरियां देने का वादा करके सत्ता में आई थी, अब वही भ्रष्ट पार्टी साढ़े चार लाख और पांच लाख नौकरियों का फर्जी पोस्टर लगाने में जनता के अरबों रुपये फूंक रही है। लेकिन इस भ्रष्टाचार से लाखों लाख युवाओं की जिंदगी बर्बाद हुई, उसका हिसाब कौन देगा?

क्या किसी पार्टी के पास इस समस्या से निपटने का ब्लूप्रिंट है? अगली जो भी सरकार आएगी, भ्रष्टाचार और लाठियां भांजने से अलग वह क्या करेगी? क्या आप ये सवाल पूछने को तैयार हैं या सिर्फ ताली और थाली बजाएंगे?

(लेखक पत्रकार एंव कथाकार हैं, ये उनके निजी विचार हैं)