भारत की आजादी के लिए शहीद होने वाले उलेमा-ए-किराम, जिनमें से ज्यादातर कर दिए गए फरामोश

भोपाल: हर साल की तरह इस साल भी जश्न-ए-आजादी के मौके पर पूरे भारत में सभी रियासती सरकारें चाहे वह राइटविंग पार्टी हों या लेफ्टिस्ट हों, या नाम निहाद सेक्यूलर पार्टी की हों। सभी जंग-ए-आजादी के मुजाहिदों को याद करने का ढोंग और स्वांग रचती है और ढिंडोरा भी पीटती है। इसी के तर्ज-ए-अमल पर कमोबेश ढेर सारी तंजीमें जिन का तअल्लुक किसी न किसी पार्टी या नेता से होता है, वही करती हैं जो उनसे करवाया जाता है, या जिस से उन्हें कुछ सियासी फायदा मिल सके।

जंग-ए-आजादी में अहम किरदार अदा वाले उलेमाओं में गुमनाम मुजाहिदीन आजादी में से शायद ही किसी नीता को 10/20 से ज्यादा याद हों। हर साल उन्हें रटे रटाए नामों का गुणगाण गाया जाता है और आज की ऐसी सियासी माहौल में तो तमाम बड़े पाया के सहाफियों और मुजाहिदीन-ए-आजादी को जानबूझकर भुलाया जा रहा है, या नए सिरे से उन्हें खारिज करने (हाशिए पर डालने) की कोशिशें की जा रही हैं। होना तो यह चाहिए था कि तमाम उलेमा-ए-किराम, मुजाहिदीन-ए-आजादी और सहाफियों, जिन्होंने मक़ामी सतह पर, जिला सतह पर, रियासती सतह पर और कौमी सतह पर कुर्बानी दी हों, काम किया हो, अंग्रेजों के जुल्म-व-सितम को बर्दाश्त किया हो, सभी को मंजर-ए-आम पर लाना चाहिए और बच्चों से मज़मून निगारी का मुकाबला, वगैरह-वगैरह और साथ ही डिबेट वगैरह कराना चाहिए।

जंग-ए-आजादी के चंद मुजाहिदीन-ए-आजादी (उलेमा-ए-किराम) जिनको अवाम जानती हैंः

(1) मौलाना अबुल कलाम आज़ाद। (2) मौलाना हसरत मोहानी। (3) मौलाना मुहम्मद अली जौहर। (4) मौलाना शौकत अली जौहर। (5) मौलाना महमूदुल हसन मदनी। महली। (8) मौलाना शाह अब्दुल अजीज देहलू। (9) मौलाना सैयद सुलेमान नाडु। (01) मौलाना फज़ल हक खैराबादी। (11) मौलाना बरकतुल्लाह भोपाली। (41)। 02) मौलाना मुहम्मद जफर थानेसारी। (12) मौलाना अहमदुल्ला शाह मद्रासी (22) मौलाना किफायत अली कफी मुरादाबादी। (32) हजरत सैयद अहमद शहीद (42) मौलाना अब्दुल हलीम सिद्दीकी (52) मौलाना जहूर अहमद खान सहारनपुरी (62) मौलाना मजहर नंतोवी (72) मौलाना मंजूर अहमद अंसारी। (82) मौलाना पीर मुहम्मद हैदराबादी (92) ) (03) मौलाना अलाउद्दीन हैदराबाद। (13) शेख इस्लाम मौलाना सैयद अब्दुल है। (23) हजरत सैयद शाह मुहम्मद इस्माइल शहीद। (33) मौलाना इमाम बख्श सहबाई। (43) मौलाना मुफ्ती इनायत अहमद काकुरी। (53) मुफ्ती सदरुद्दीन खान अजरदा देहली (63) मौलाना मुहम्मद मियां उर्फ मौलाना मंसूर अंसारी (73) मौलाना शाह अब्दुल रहीम रायपुरी। (83) मौलाना अहमद सईद देहलवी (93) मौलाना अब्दुल जलील शहीद (04) मौलाना फैज अहमद बदायोनी (14) ) मौलाना अब्दुल रहीम सादिक पुरी (24) मौलाना सलामत अल्लाह फरंगी महली (34) मौलाना गुलाम जिलानी रफत आदि।

इसी तरह के और 20 से 25 नामी गिरामी उलेमा-ए-किराम होंगे जिन्हें सरकार कभी भुले से याद कर लेती होगी, लेकिन जिन मुस्लिम मुजाहिदीन-ए-आजादी की तादाद सैकड़ों, हजारों में नहीं बल्कि लाखों में है, क्या सरकार, सियासतदां और तारीखदां उन्हें याद करते हैं?

जंग-ए-आजादी के गुमनाम मुजाहिदीन-ए-आजादी (उलेमा-ए-किराम) जिनकी तफसीलात कुछ इस तरह हैं। (1) मौलाना अमीरुद्दीन मालदी। (2) मौलाना सैयद नसीरुद्दीन देहलू। (3) मौलाना मुहम्मद बशीर फिरोज पुरी। (4) मौलाना अब्दुल रज्जाक हैदराबाद। (5) मौलाना इमाम बख्श सहबाई। (6) मौलाना मुफ्ती इनायत अहमद काकुरी। (7) मुफ्ती सदरुद्दीन खान अजरदा देहली (8) मौलाना रहमतुल्लाह किरानी। (9) मौलाना वहाजुद्दीन मुरादाबादी। (01) मौलाना मुनीर नाडु (11) मौलाना अजीज गुल पेशावर (21) मौलाना सैयद मुहम्मद फकीर मियां बिजनूरी (31) मौलाना मुहम्मद मियां उर्फ मौलाना मंसूर अंसारी। (41) मौलाना शब्बीर अहमद उस्मानी देवबंदी। (51) मौलाना मुर्तजा हसन चांदपुरी। (61) मौलाना सादिक कराची। (71) मौलाना अहमद सईद देहलवी। (81) मौलाना खलील अहमद अंबितवी। (91) मौलाना आज़ाद सुभानी (02) मौलाना अबुल हसन ताज। (12) मौलाना मुहम्मद मुबीन देवबंदी। (22) मौलाना शाह अब्दुल रहीम राय पुरी। (32) मौलाना अहमद अल्लाह चकवाली। (42) मौलाना गुलाम मुहम्मद भावलपुरी। (52) मौलाना अब्दुल रहीम पोपलजई (62) मौलाना मुहम्मद अकबरियागस्तानी (72) मौलाना अब्दुल जलील शहीद (82) मौलाना फैज अहमद बदायोनी (92) मौलाना फजल रबी पेशावर। 13) मौलाना अब्दुल सिराज गुलाम मुहम्मद भावल पुरी। ( 23) मौलाना विलायत अली सादिक पुरी। (33) मौलाना इनायत अली सादिक पुरी। (43) मौलाना फरहत हुसैन सादिक पुरी। (53) मौलाना अहमदुल्ला सादिक पुरी। (63) मौलाना अब्दुल्ला। सादिक पुरी। (73) मौलाना फैयाज अली सादिक। पुरी। (83) मौलाना याह्या अली सादिक पुरी। (93) मौलाना अब्दुल रहीम सादिक पुरी। (04) मौलाना सैयद मुहम्मद नज़ीर हुसैन उर्फ मियां साहिब। (14) मौलाना अब्दुल अजीज रहीमाबादी। (24) मौलाना सैयद शाह बदरुद्दीन कादरी फलवारवी। (34) मौलाना इब्राहिम दरभंगी। (44) मौलाना सैयद मुहम्मद इशाक मंगिरी। (54) मौलाना खुदा बख्श मुजफ्फर पुरी। (64) मौलाना अबुल मुहासन मुहम्मद सज्जाद। (74) मौलाना अब्दुल हकीम ग्यावी। (84) मौलाना हकीम अब्दुल रहमान वफा अज़ीमाबादी फिर दमरा नवी। (94) मौलाना सैयद शाह मोहिउद्दीन कादरी। (05) मौलाना अबुल बरकत अब्दुल रऊफ दानापुरी। (15) मौलाना अब्दुल वहाब दरभंगी। (25) मौलाना शेख अहमद उस्मानी भागलपुरी। (35) मौलाना अब्दुल वदूद मोहिउद्दीन नगरी समस्ती पीओ पुन (45) मौलाना सैयद अताउल्लाह शाह बुखारी (55) मौलाना सैयद निसार अहमद अनवारी दरभंगी (65) मौलाना अतीकुर रहमान एआरवी। (75) मौलाना अब्दुल बारी झमकारी (84) मौलाना मुहम्मद रहमतुल्लाह चित्रवी (95) मौलाना उस्मान गनी देवरी (06) मौलाना सैयद मुहम्मद कुरैश बारवी (16) मौलाना अज़ीज़ुल रहमान दरभंगवी। (26) मौलाना हकीम यूसुफ हसन खान सूरी (36) मौलाना असगर हुसैन बिहारी। (46) मौलाना अब्दुल अलीम असी दरभंगवी (56) मौलाना मुहम्मद इब्राहिम तबान पुराणी (66) मौलाना हाफिज अब्दुल रशीद समस्ती पुरी। (76) मौलाना अब्दुल रहीम डोगरवी दरभंगवी। (86) मौलाना अब्दुल रशीद हसरत बेलहियावी (96) मौलाना लुत्फुर रहमान हरसिंह पुरी। (07) मौलाना सैयद नूरुल्ला रहमान। (17) मौलाना महमूद आलम समस्ती पुरी। (27) मौलाना मुहम्मद कासिम सोपोलो। (37) मौलाना सैयद मंतुल्ला। रहमानी (47) मौलाना मुहम्मद सुलेमान आवा पुरी (57) मौलाना सैयद अब्दुल बरब निश्तार खगदियावी (67) मौलाना सैयद शाह औन अहमद कादरी फलवारी। (77) मौलाना मुफ्ती जफीरुद्दीन दरभंगी (87) मौलाना हबीबुल्लाह गयावी। (97) ) मौलाना मुहम्मद अब्दुल हमीद भागलपुरी। (08) मौलाना नूरुद्दीन बिहारी। (18) मौलाना अब्दुल मजीद अल हरीरी। (28) मियां अब्दुल मलिक एडवोकेट दानापुरी। (38) शम्स उलमा अल्लामा मुख्तार अहमद नाडु। (58) अल्लामा अरशद अल-कादरी। (68) मौलाना अतीकुर रहमान मंसूरी आर.वी. (78) मौलाना मौला बख्श अंसारी। (88) हाजी शरीयतुल्ला अंसारी। (98) मौलाना मंसूर अंसारी। (09) मौलाना अब्दुल लैफ अंसारी सीतामढ़ी आदि।

आज हर नेता यह कहता है कि हजारों नहीं बल्कि लाखों की तादाद में उलेमा-ए-किराम और मुस्लिम मुजाहिदीन-ए-आजादी ने कुर्बानी दीं तो आज 10/20 नामों को शुमार कराने में ही क्यों सिमट जाते हैं। इसी 10/20 नामों को सड़कों, चौराहों, प्रोग्रामों में याद करने के साथ-साथ स्कूलों, कॉलेजों खासकर प्राइमरी स्कूलों में तजकिरा करते और याद करते हैं।

ऐसे तो मुल्क को आजाद कराने में सभी धर्म, मजाहिब, जात और समाज के लोगों ने मिलकर कुर्बानी दी और मल्क को आजाद कराया। तहरीक-ए-जंगे आजादी के वक्त मुल्क एक होकर आजादी की जंग लड़ी, मगर जो अंग्रेजों ने बीज बोया आज वही बीज बोने का काम हमारी सियासी पार्टियां भी कर रही है कि मुल्क को ष्बांटो और राज करोष् सियासी अदावत की वजह से एक खास तबके के मुजाहिदीन-ए-आजादी को भी फरामोश कर हाशिए पर डालने की कोशिश जारी हैं।

जंग-ए-आजादी की लड़ाई में शहीद होने वाले मुजाहिदीन की दिल्ली की इंडिया गेट पर जो तादाद लिखी हैं इसमें तकरीबन 92000 मुजाहिदीन आजादी के नामों में से 62000 मुस्लिम मुजाहिदीन-ए-आजादी के नाम हैं। क्या कभी इन मुजाहिद-ए-आजादी को जानने और बताने की कोशिश की गई कि यह कौन लोग थे?

भारत में आजादी के लिए चलने वाली तहरीकें

(1)दारूल-उलूम-देवबंद, (2)रेशमी रुमाल तहरीक, (3)समरतुत-तरबियत, (4) जमियतुल- अनसार, (5)तहरीक क़याम मदारिस, (6)भारत छोड़ो आंदोलन/भारत छोड़ो तहरीक, (7)चंपारण सत्याग्रह, (8)दांडी मार्च, (9)स्वदेशी और अदम तआउन तहरीक वगैरह-वगैरह। यहां तक कि आजाद हिंद फौज में भी 40 फीसद से जायद मुस्लिम ऑफिसर और जवान थे जिन्हें याद नहीं किया जाता है। आज पूरे भारत में सुभाष चंद्र बोस के साथ-साथ तमाम मुस्लिम मुजाहिदीन-ए-आजादी को भी याद करने, मलिक के लिए की गई उनकी खिद्मात पर रोशनी डालने औ आने वाली नस्लों को बताने की जरूरत है।

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