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किसान आंदोलन में जान गंवाने वाले किसानों को बिहार में दी गई श्रद्धांजलि, बोले ‘दो कदम आगे बढ़ सकते हैं, लेकिन पीछे नहीं’

नई दिल्ली/मुंगेर/पटनाः किसान आंदोलन के 44वें दिन आज मुंगेर में ऑल इंडिया रिव्यूलुशनरी फोरम मुंगेर की तरफ़ से आंदोलन में शहीद किसानों को श्रद्धांजलि हेतु स्थानीय किला परिसर स्थित शहीद स्मारक पर दीप प्रज्वलन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता समाजसेवी ख़ालिद सैफुल्लाह ने की। फोरम के संयोजक तारीक़ अनवर ने कहा के कि देश के अन्नदाता आज मोदी की हठधर्मिता और ज़िद के कारण ठंड और बारिश में आंदोलन करते हुए अपनी जान दे रहे हैं लेकिन माननीय प्रधानमंत्री रेडियो पर मन की बात करते हुए MonoLouge कर रहे हैं। किसान जब तक जीतेंगे नहीं, वापस नहीं जाएंगे, दो कदम आगे बढ़ सकते हैं, लेकिन पीछे नहीं हटेंगे और ये किसानों ने साबित कर दिखाया है। विगत वर्ष जनता दमनकारी नागरिकता संशोधन कानूनों के ख़िलाफ़ सड़क पर थी और आज कृषि कानूनों के विरुद्ध भी हमलोग सड़क पर संघर्ष कर रहे हैं।

एसयूसीआई कम्युनिस्ट पार्टी के ज़िला सचिव कृष्णदेव साह ने कहा कि सरकार किसानों का इम्तिहान ले रही है, मोदी सरकार को आत्ममुग्धता का वहम हो रहा है. सरकार सोच रही है कि किसान कमजोर हो जाये या फिर टूट कर वापस चला जाये जो होने वाला नही है। आज आठवें दौर की बातचीत बेनतीजा रही है इससे साफ़ ज़ाहिर होता है के सरकार अपनी ज़िद पर अड़ी है और उसे ठंड में ठिठुरते किसानों श्रमिकों से कोई सहानुभूति नही है।

ऑल इंडिया रिव्यूलुशनरी फोरम के सह संयोजक फ़र्रह शकेब ने कहा के किसान आंदोलन ने एक बार फिर केंद्र की दमनकारी नीतियों को बेनकाब किया है। शकेब ने कहा के किसान अपनी MSP के लिए आवाज उठाएगा तो उसे योगी की पुलिस द्वारा छज्जे गिराने की धमकी दी जाएगी। उत्तर प्रदेश में सरकारी गड़बड़ी और लारवाही की वजह से 7.5 लाख से अधिक किसानों को आज तक ‘सम्मान निधि’ नहीं मिली लेकिन उसी बेशर्म निर्लजजे तानाशाह सरकार की तरफ से किसान आंदोलन रोकने के लिए नोडल अधिकारी बनाये गए हैं। मध्यप्रदेश,गुजरात,उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में सत्ता अपने ख़िलाफ़ उठने वाली आवाज़ का पुलिस और तन्त्र के माध्यम से दमन कर रही है।

शकेब ने कहा के लाठी चार्ज किया जा रहा है। मुकदमे लादे जा रहे हैं। समाजसेवी आंदोलनकारी साथियों को जेलों में डाला जा रहा है और बरबर्तापूर्ण व्यवहार किया जा रहा है ये सत्ता की हताशा है। एसयूसीआई कम्युनिस्ट पार्टी के स्थानीय सचिव कामरेड रविन्द्र मंडल ने कहा के आज की बैठक में भी सरकार अपनी हठ पर कायम है और इन दमनकारी कृषि क़ानून की वापसी के लिए तैयार नही है तो हमलोग भी निसन्देह उसी तैयार हैं के जब तक कानून वापस नही होगा हमारा आंदोलन गावँ गावँ सडक सड़क जारी रहेगा। रविन्द्र मंडल ने कहा के केंद्र सरकार के कृषि विरोधी काले कानूनों के तानाशाही निर्णय व कुदृष्टि से अपने अधिकारों, खेती-किसानी को बचाने की लड़ाई लड़ रहे किसान भाइयों की आवाज में अपनी आवाज़ मिलाना हर भारतीय नागरिक का नैतिक दायित्व है ताकि अड़ियल, अहंकारी व असंवेदनशील भाजपा सरकार को ये याद रहे के देश संवैधानिक लोकतांत्रिक मूल्यों से चलेगा न की अडानी अम्बानी के कार्यालय से।

 

वरिष्ठ अधिवक्ता एडवोकेट शाहिद ने कहा के मोदी सरकार निरंकुश हो चुकी है और सरकार के कारिंदे जनता और नागरिकों के बीच भरम फैला रहे हैं। पूंजीवादी और कोर्पोरेटवादी नीतियों को देशहित का नाम दिया जा रहा है। गोदी मीडिया के माध्यम से देश को गुमराह किया जा रहा है और जनता को धर्म की अफ़ीम पिला कर ग़ैर ज़रूरी मुद्दों को प्राथमिकता दी जा रही है उसका संज्ञान हमें बतौर नागरिक लेना होगा। अध्यक्षता करते हुए समाजसेवी ख़ालिद सैफुल्लाह ने कहा के मोदी सरकार पार्टी फंड हाईटेक चुनावी प्रचार के लिए मोटे चंदे की वसूली नीति पर अमल करते हुए अपने पूंजीपति मित्रों के फायदेमंद के लिए देश के अन्नदाता के साथ विश्वासघात कर रही है जिसके लिए उसे शर्म आनी चाहिए। जिस तरह से नागरिकता कानून,लव जिहाद,सितम्बर माह में कोरोना काल मे पारित हुए श्रम विरोधी क़ानून और उसके बाद विपक्ष की भूमिका को शून्य करते हुए जदयू सांसद सह उपसभापति हरिवंश नारायण की संदिग्ध भूमिका के साथ तीनों कृषि विरोधी काले कानूनों को सत्ता के अहंकार में मोदी ने पारित किया है वो आइंदा भविष्य के भारत के लिए अत्यंत ख़तरनाक है जिसने सत्ता के फ़ासीवादी इरादे को भी स्पष्ट कर दिया है।

सभा को संबोधित करते हुए कामरेड विकास ने कहा आज अन्नदाता किसान पूरे दिल्ली को घेरे हुए हैं और देश का सरकार किसानों की मांगों को पूरा करने के बजाय उस पर प्राथमिकी दर्ज करने में लगी है भ्रम फैलाना तथा दूसरे राज्यों में कैसे चुनाव जीता जाए आदि कार्य में लिप्त है यह कृषि कानून इतना खतरनाक है कि सिर्फ किसान ही नहीं बल्कि आम जनता भी भुखमरी के शिकार होंगे आप सोच सकते हैं। किसान पंकज प्रीतम ने कहा अगर किसान विरोधी तीनों कानून केंद्र सरकार वापस नहीं लेती है तो पूरे देश के साथ-साथ मुंगेर में हम लोग गाय, भैंस,बकरी के साथ पूरे परिवार सड़क पर आएंगे तब देखेंगे कि कितना बड़ा जेल है जो हम किसानों को कैद कर पाएगा सरकार तीनों कानून में निजी निवेश की बात करती है हम मांग करते हैं कि निजी पूंजी के जगह पर सरकारी पूंजी कानून में शामिल कर लिया जाए तो यह आंदोलन अपने आप समाप्त हो जाएगा। श्रद्धांजलि सभा मे मुख्य रूप से,गुरुदेव अज़ीज़,बकर अशरफ़, आमिर हुसैन,कांग्रेस अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ की प्रदेश सचिव शमा अंजुम के पति रज़ी अहमद राजू,अधिवक्ता दिलीप पासवान,दिलशाद अहमद,वसीम रज़ा,तारिक़ वसीम,कॉमरेड मणिलाल,इत्यादी मुख्य रूप से उपस्थित रहे।