चर्चा में

जिन्हें लगता है कि बिल गेट्स मसीहा और परोपकारी हैं, उन्हें इस सच्चाई को पढ़ना चाहिए

गिरीश मालवीय

आज उन तमाम लोगो को ओपन चेलेंज दे रहा हूं जो अब तक बिल गेट्स को महान परोपकारी ओर विश्व उध्दारक मान कर बैठे हुए हैं, जिन्हें यह लगता है कि वह बड़ा विजनरी व्यक्ति है. खास तौर पर ऐसे लोग जो साइंस ओर मेडिकल या फार्मा फील्ड से जुड़े हुए हैं. चेलेंज सिर्फ इतना है कि ये लोग मेरे कहने पर सिर्फ एक बार DEPO-PROVERA: DEADLY REPRODUCTIVE VIOLENCE AGAINST WOMEN, ‘डेपो-प्रोवेरा डेडली रिप्रोडक्टिव वॉयलेंस अगेंस्ट वूमन’ शब्द कॉपी करें और गूगल सर्च कर ले वहाँ इस नाम की एक पीडीएफ फाइल मिलेगी उसे ठीक से पढ़ने में सिर्फ 15 से 20 मिनट लगेंगे उसके बाद उन्हें बिल एंड मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन की असलियत समझ आ जाएगी कि वह लोग कितने परोपकारी है कितने ‘दूरदर्शी’ है, हिंदी पढ़ने वाले लोग ऑटोमेटिक तरीके के गूगल अनुवाद का सहारा ले सकते हैं.

जो लोग ‘डेपो-प्रोवेरा’ क्या टर्म है इसका भारत से क्या संबंध है उन्हें समझना होगा कि कुछ दिनों से बिल गेट्स फाउंडेशन से जुड़े समाचारों ओर तथ्यों की गहराईयों में जैसे ही उतरा हूँ मुझे लगता है कि जैसे पेंडोरा बॉक्स ही खुल गया है ऐसे ऐसे ज़हरीले जीव जंतु निकल रहे हैं जिसकी कोई कल्पना भी नही की थी. महिलाओं के लिए गर्भनिरोध के कई तरीके उपलब्ध हैं, ‘डेपो प्रोवेरा’ भी उनमें से एक है। यह एक गर्भनिरोधक इंजेक्शन है जिसे ऊपरी बांह या नितंब में लगवाया जा सकता है। इसे लगभग तीन महीने में एक बार लगवाना होता है.

खुले बाजार में इसे ‘सायाना-प्रेस’ के नाम से भी बेचा जा रहा है बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन, इसे मल्टीनेशनल फार्मा कम्पनी ‘फाइज़र’ और चिल्ड्रेन्स इन्वेस्टमेंट फंड फाउंडेशन के साथ मिल कर तीसरी दुनिया के विकासशील ओर गरीब देशों में डीएमपीए को ही ‘सायाना-प्रेस’ नाम से बेच रहा है. डेपो प्रोवेरा मेड्रोक्सीप्रोजेस्टेरोन का ब्रांड नाम है। प्रोजेस्टोजन, एक फीमेल हार्मोन है जिसे शरीर में सुई द्वारा दिया जाता है जो गर्भ निरोध में सहायक सिद्ध होता है. डेपो प्रोवेरा’को इंजेक्शन के रूप में दिया जाता है जिसे ‘डिपो मेडरॉक्सी प्रोजेस्टेरोन एक्सीटेट’ (डीएमपीए) इंजेक्शन कहते हैं भारत में मोदी सरकार ने इसे परिवार नियोजन के उपाय के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति दे दी है इसे ‘अंतरा’ के नाम से देश के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों युवा महिलाओं को लगाया जा रहा है.

सायना प्रेस इसी का एक विकसित रूप है जिसे इसी दशक में मार्केट में लाया गया था दरअसल ‘सायाना-प्रेस’ के पाउच में सुई लगी होती है. सुई को शरीर में चुभोकर पाउच का सिरा दबा देने से दवा शरीर के अंदर इंजेक्ट हो जाती है. युवा महिलाओं में अनचाहे गर्भ से बचने का यह तरीका बेहद लोकप्रिय है. डीएमपीए इंजेक्शन के इस्तेमाल को लेकर पूरी दुनिया मे शुरू से ही कई आपत्तियां उठाई जा रही थी इस कानूनी और व्यापारिक खींचतान में फाइजर कमजोर पड़ती जा रही थी लेकिन बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन के कूद पड़ने से डीएमपीए लॉबी मजबूत हो गई.

फेसबुक पर मित्र पत्रकार प्रभात रंजन दीन ने चौथी दुनिया के लिए 2018 में एक लेख लिखा था जिसे हस्तक्षेप न्यूज़ वेबसाइट ने पब्लिश किया है इस लेख का शीर्षक है ‘मोदी सरकार गेट्स फाउंडेशन की मदद से चला रही जनसंख्या सफाए का अभियान’. इस लेख में डेपो-प्रोवेरा इंजेक्शन कितना खतरनाक है और इसे लगाने की मोदीं सरकार ने अनुमति कैसे दी इसकी विस्तृत कहानी बयान की है. मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में स्वास्थ्य मंत्री रहे JP नड्डा जी के निर्देश पर परिवार कल्याण विभाग ने 24 जुलाई 2015 को विशेषज्ञों का सम्मेलन बुला कर इसे सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र में इस्तेमाल करने की अनुमति दे दी है.

प्रभात रंजन लिखते हैं ‘ड्रग्स टेक्निकल एडवाइज़री बोर्ड ने पब्लिक हेल्थ सिस्टम में डीएमपीए इंजेक्शन का इस्तेमाल किए जाने की 18 अगस्त 2015 को मंजूरी दे दी. इस तरह मोदी सरकार ने देश की मांओं को बांझ बनाने वाली और भावी नस्ल को पंगु और विकलांग पैदा करने वाली दवा के अराजक इस्तेमाल की भूमिका मजबूत कर दी’.

दरअसल कुछ शोध जो डीएमपीए इंजेक्शन के बारे में किये गए हैं वे बताते है कि इसके जरिए कमजोर वर्ग की महिलाओं को भीषण रोग की सुरंग में धकेल रहा है. इस दवा के इस्तेमाल के कुछ ही दिनों बाद महिलाएं फिर मां बनने लायक नहीं रह जातीं. अगर बनती भी हैं तो बच्चे इतने कमजोर होते हैं कि शीघ्र मौत का शिकार हो जाते हैं, जो बच जाते हैं वे विकलांग और पंगु होकर रह जाते हैं. विश्व के कई देशों में खतरनाक यौन अपराधियों की यौन ग्रंथि को रासायनिक विधि से नष्ट करने (केमिकल कैस्ट्रेशन) के लिए डेपो-प्रोवेरा (डीएमपीए) इंजेक्शन का इस्तेमाल किया जाता रहा है.

केंद्र सरकार का यह अभियान देश के निम्न वर्गीय, निम्न मध्यम वर्गीय ग्रामीण और गांव आधारित अशिक्षित, अर्ध-शिक्षित कस्बाई आबादी को टार्गेट कर रहा है. जिला स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के जरिए ‘अंतरा’ के नाम से डीएमपीए दवा का इंजेक्शन महिलाओं में ठोका जा रहा है. प्रभात रंजन दीन लिखते है ‘मोदी सरकार के ताकतवर और हठी स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने जुलाई 2017 में ‘मिशन परिवार विकास’ के नाम पर ‘मिशन परिवार विनाश’ अभियान की शुरुआत कर दी. नड्डा ने खुलेआम कहा कि इसके जरिए वे 2025 तक देश की जनसंख्या को काबू में ले आएंगे. कैसे काबू में लाएंगे, अब तक तो आप इसे समझ ही चुके होंगे.

अब आप पूछ सकते हैं कि मुख्य मीडिया हमे यह सब क्यो नही बताता तो ‘मितरो’ यही सब न बताने के लिए ही तो मीडिया को पैसे मिलते है. इस सो कॉल्ड परोपकारी संगठन की जड़े देश भर के NGO में और लॉबिंग के जरिए मीडिया में अंदर ही अंदर कहा तक फैली हुई है इसका आप अंदाजा भी नही लगा सकते हैं.

(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं, ये उनके निजी विचार हैं)

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