चर्चा में

सुप्रीम कोर्ट के ये तीन फैसले बता रहे हैं कि रंजन गोगोई अपने पद पर एक मिनट भी बने रहने योग्य नहीं रहे

विक्रम सिंह चौहान

सीजेआई रंजन गोगोई अपने पद पर एक मिनट भी बने रहने योग्य नहीं रह गए हैं। कल हुए तीन फैसले साफ बता रहा है कि गोगोई ने मोदी का गिफ्ट किया संघ का चड्डी बनियान पहन लिया है! सॉरी! पेंट औऱ बनियान पहन लिया है! कभी जस्टिस चेलामेश्वर की आड़ लेकर सुप्रीम कोर्ट को खतरा बताने वाले,कभी महिला कर्मचारी के यौन उत्पीड़न के आरोप पर खुद जज बनकर फैसला सुनाने वाले और खुद को निर्दोष बताने वाले गोगोई अब पूरी तरह से मोदी के सुर में सुर मिला रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट में कल जो हुआ वह अप्रत्याशित था,दुर्भाग्यपूर्ण था।जस्टिस गोगोई ने कल अनुराधा बसीन के कश्मीर में प्रेस पर पाबंदी,ईनाक्षी गांगुली और शांता सिन्हा की कश्मीर में बच्चों को हिरासत पर रखने की याचिकाओं को सुनने से इंकार कर दिया।गोगोई ने कहा कि उनके पास कश्मीर के लिए टाइम नहीं है।वे अयोध्या के मामले की सुनवाई करेंगे।इसी के साथ कई याचिकाओं को 5 सदस्यीय संवैधानिक पीठ और जम्मू कश्मीर हाई कोर्ट को रेफर कर दिया।जबकि सभी जानते हैं कश्मीर में हाई कोर्ट में एक वकील भी नहीं है,वे या तो जेल में हैं या घर में कैद।

एक दूसरे फैसले में गोगोई सोमवार को मानवाधिकार कार्यकर्ता गौतम नवलखा की याचिका की सुनवाई से हट गयें। कोरेगांव-भीमा हिंसा मामले में गौतम ने बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ याचिका दायर की थी। कोर्ट ने गौतम के खिलाफ एफआईआर रद्द करने से मना कर दिया था।चीफ जस्टिस ने कहा कि इस मामले को उस बेंच को भेजा जाए, जिसमें मैं पार्टी न हूं। अब यह मामला जस्टिस एसए बोबडे और जस्टिस एस अब्दुल नजीर की बेंच को भेजा गया है।

एक तीसरे मामले में गोगोई ने मद्रास हाई कोर्ट की पूर्व चीफ जस्टिस वीके ताहिलरमानी के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों पर सीबीआई को जांच करने के लिए फ्री हैंड दिया है.जांच दो फ्लेट खरीदने को लेकर हो रहा है।कमाल यह है कि इस पर आईबी की 5 पन्नो की रिपोर्ट है।ईमानदार छवि की मानी जाने वालीं ताहिलरमानी पिछले दिनों अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उनका यह कदम सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम द्वारा मेघालय उच्च न्यायालय में स्थानांतरित करने के प्रस्ताव के विरोध में माना जा रहा था। तहिलरामनी के बारे में जो लोग नहीं जानते होंगे उन्हें बता दूं एक जज के रूप में उन्होंने उस पीठ की अध्यक्षता की थी जिसने गुजरात दंगों से संबंधित बिलकिस बानो मामले में सजा सुनाई थीं।

अब गोगोई से यह कौन पूछेगा कि कश्मीर के बच्चों की जगह आपकी प्राथमिकता राम मंदिर कब हो गई? जेल में सड़ रहे मानवाधिकार कार्यकर्ता गौतम नवलखा की याचिका सुनवाई से आप किसके कहने पर हट रहे हैं? मद्रास हाई कोर्ट की पूर्व चीफ जस्टिस वी के ताहिलरमानी द्वारा दो फ्लैट खरीदना इतना बड़ा भ्रष्टाचार कब हो गया कि उसकी जांच आप सीबीआई से करवाना चाहते हैं?यही सही समय है इस गोगोई को नंगा करने की।ये मोदी का आदमी है,आप लोग नाहक दीपक मिश्रा को भला बुरा कहते रहें।इससे तो वे लाख गुना अच्छे थे।

(लेखक युवा पत्रकार एंव स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं, ये उनके निजी विचार हैं)

2 thoughts on “सुप्रीम कोर्ट के ये तीन फैसले बता रहे हैं कि रंजन गोगोई अपने पद पर एक मिनट भी बने रहने योग्य नहीं रहे

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