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उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा किया जा रहा “उत्तर प्रदेश स्मार्ट प्रदेश” का दावा धोखा है : ललन कुमार

लखनऊ:  हाल ही में प्रदेश में जगह-जगह पर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लगाए गए बड़े-बड़े होर्डिंग्स देखे गए जिनमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहित उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मुस्कुराते चेहरे दिखाई देते हैं। इन होर्डिंग्स में बड़े अक्षरों में लिखा है कि “उत्तर प्रदेश देश में नंबर 1” और “उत्तर प्रदेश-स्मार्ट प्रदेश”। छोटे अक्षरों में लिखा है “इंडिया स्मार्ट सिटीज अवार्ड-2020 में प्रथम पुरस्कार”। अब यह तो ईश्वर ही जानता है कि स्मार्ट सिटी मिशन में निर्धारित किये गए मापदंडों में किस प्रकार उत्तर प्रदेश खरा उतरा है।

यूपी कांग्रेस के मीडिया संयोजक ललन कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 25 जून 2015 को स्मार्ट सिटी मिशन का शुभारम्भ किया गया था जिसके तहत पूरे देश के 100 शहरों को इन मिशन में शामिल किया गया। इस मिशन की वेबसाइट के अनुसार उत्तर प्रदेश के कुछ शहरों को इस मिशन में शामिल किया गया है जिसमें अलीगढ, बरेली, झाँसी, आगरा, कानपुर, मुरादाबाद, लखनऊ, सहारनपुर, प्रयागराज, वाराणसी इत्यादि शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि इस मिशन के अनुसार पूरे देश के 100 प्रशहर स्मार्ट सिटी बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उत्तर प्रदेश के ये शहर भी इस दौड़ में शामिल है। उत्तर प्रदेश को नंबर 1 बता तो दिया गया है मगर इन शहरों की हालत देखकर कहा जा सकता है कि ये शहर सही मायने में स्वच्छ भी नहीं हैं। इन शहरों में ऐसे कई चौराहे आपको दिखाई दे सकते हैं जहाँ पोल पर नंबर 1 की होर्डिंग के नीचे बरसात का गन्दा पानी भरा हो। प्रधानमंत्री ने चुनाव के पहले अपने संसदीय क्षेत्र ‘काशी को क्योटो’ बनाने का जुमला भी दिया था। उसी काशी में हाल के दिनों में सड़कों को झील बनते देखा गया। वाराणसी के अच्छे-अच्छे इलाके पानी में डूबे दिखाई दिए।

कांग्रेस नेता ने कहा कि कोरोना की दूसरी लहर से आई तबाही के बारे में तो सभी जानते हैं। उस दौर में तो प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था ही ठप हो गयी थी। यहाँ तक कि अंतिम संस्कार करने के लिए भी संसाधन उपलब्ध नहीं थे। लखनऊ, प्रयागराज समेत हर एक शहर ने इस बीमारी के आगे घुटने टेक दिए थे। क्या स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवहन इत्यादि स्मार्ट सिटी मिशन के अंतर्गत नहीं आते?

ललन कुमार ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा किया जा रहा यह प्रचार धोखा है। स्मार्ट सिटी जैसी कोई सुविधा इन शहरों में हमें देखने को नहीं मिल रही। गंदगी, पानी, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता इत्यादि के वही हालात हैं जो पहले हुआ करते थे। जिन पैसों का इस्तेमाल इस अभियान को सफल बनाने में किया जाना चाहिए था उनका उपयोग यह विज्ञापन दिखाकर झूठा यकीन दिलाने में कर रही है। जनता इस ठग गैंग के झाँसे में अब नहीं आने वाली। 2022 के चुनावों जनता भाजपा की झूठ की फ़सल को उखाड़ फेंकेगी।