रद्द हुई इंस्पेक्ट सुबोध के हत्यारोपी की ज़मानत तो शहीद की विधवा बोलीं अब मिला सुकून…

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में 2018 में हुई हिंसा में इंस्पेक्टर सुबोध सिंह की हत्या के मामले में आरोपी योगेश राज की ज़मानत को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया है। लगभग 9 महीने जेल में रहने के बाद योगेश राज को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जमानत दे दी थी। इंस्पेक्टर सुबोध कुमार की पत्नी रजनी सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में जमानत के विरोध में याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरन सुप्रीम कोर्ट ने जमानत रद्द कर कोर्ट में एक हफ्ते में सरेंडर करने का आदेश दिया है।

बुलंदशहर के स्याना थाने के चिंगरावटी में 3 दिसंबर 2018 को गो हत्या की अफवाह के बाद हिंसा हो उठी थी। हिंसा में इंस्पेक्टर सुबोध कुमार की गोली लगने से मौत हो गई थी। इसके अलावा सुमित नामक युवक की भी हत्या हुई थी। इस घटना में 34 लोगों के खिलाफ नामजद समेत अन्य अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी। पुलिस ने 44 लोगों को जेल भेजा था। पुलिस ने इस मामले में बजरंग दल की स्याना इकाई के संयोजक योगेश राज को मुख्य आरोपी बनाया था।

पुलिस ने योगेश राज व‌ अन्य लोगों के खिलाफ इस मामले में आईपीसी की धारा 147, 148, 149, 307, 302, 333, 353, 427, 436, 394 के तहत मामला दर्ज किया था। पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए जनवरी 2019 में योगेश राज, भाजपा की युवा शाखा के पूर्व अध्यक्ष शिखर अग्रवाल, प्रशांत नट समेत कई अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। लगभग 9 महीने बाद अक्टूबर में आरोपी योगेश राज को इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी।

ज़मानत पर बाहर आने के बाद आरोपी योगेश राज ने बुलंदशहर ज़िला पंचायत के वार्ड संख्या 5 स्यान द्वितीय से सदस्य पद पर चुनाव भी लड़ा था। योगेश राज ने यह चुनाव 2150 से वोट से जीता भी था। योगेश राज की ज़मानत को मृतक इंस्पेक्टर सुबोध सिंह की पत्नी रजनी सिंह ने चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के ज़मानत के फैसले को निरस्त करते हुए कहा कि मामला काफी गंभीर है. जहां गोहत्या के बहाने एक पुलिस अधिकारी की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई है। प्रथम दृष्टया यह उन लोगों का मामला है जो कानून अपने हाथ में ले रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने बुलंदशहर की ट्रायल कोर्ट से भी पूछा है कि उसको इस मामले में आरोप तय करने और स्वतंत्र गवाहों की गवाही रिकॉर्ड करने में कितना वक्त लगेगा। सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी योगेश राज को एक हफ्ते में सरेंडर करने का आदेश दिया है।

जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस एम एम सुंदरेश की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। याचिकाकर्ता की ओर से वकील संजय हेगड़े अदालत में पेश हुए थे। सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले की सुनवाई तीन हफ्ते बाद करेगा। फिलहाल इस मामले का एक अन्य आरोपी प्रशांत नट अभी भी जेल में बंद है।

मन को अब जाकर शांति मिली है, यह सुबोध को हमारा सलाम है : रजनी सुबोध

“हमारे मन को अब जाकर शांति मिली है। सुबोध के जाने के बाद हमनें बहुत तकलीफों को बर्दाश्त किया है। बहुत से अनर्गल बातों को चुप रहकर सुना है। लोग कहते थे ‘रजनी ‘ तुम क्या कर रही हो ! मेरे मन मे सुबोध कहते थे इनकी बातों पर मत जाओ ! मैं जानता हूँ तुम मेरे लिए क्या हो और क्या कर रही हो ! इस फैसले के बाद मेरे आंखे एक बार फिर गीली हुई है। मेरे बच्चे मेरे गले से लिपट गए। हमने सुबोध को सेल्यूट किया। अब एक तसल्ली हुई है। सुबोध के लिए कुछ हुआ है।” रजनी यह कहकर एक गहरी सांस लेती है और कुछ क्षण के लिए शांत हो जाती है।

रजनी सुबोध कहती है कि “अगर मैं अपने पति सुबोध के शब्दों में ही कहूँ तो इनका(योगेश राज टीम) इलाज़ हो गया है। उनकी(सुबोध) हत्या में शामिल कोई दरिंदा बच नही पायेगा। उनके हत्यारों को अब जेल में सड़ना होगा! मैं सुबोध को सेल्यूट करती हूं और उन्हें श्रद्धांजलि देती हूं। मैं अपने वकीलों और शुभचिंतको को धन्यवाद देना चाहती हूं। अब मैं सुबोध से नजर मिला सकूँगी,मैं आपसे अपनी तकलीफ नही बता सकती हूं,हमने बहुत कुछ सहा है! जिस दिन योगेश राज को माला पहनाकर स्वागत किया गया था उस दिन हमारे घर मे किसी ने खाना नहीं खाया था। मैं और मेरे बच्चे श्रेय और अभिषेक बहुत तनाव में थे। एक आदमी(सुबोध) खाकी का रखवाला वर्दी की आन-बान-शान और संविधान के लिए गोली खाकर शहीद होता है और प्रदेश को दंगे से बचा लेता है और उसके हत्यारों को फूल -माला पहनाकर स्वागत होता है और मूर्ति बनाकर हीरो स्थापित किया जाता है। उसे वोट देकर जिताते है नेता बनाते है। बहुत बुरा लगता है। अब मैं अपने पति से नजर मिला पाऊंगी। अब इन्हें जमानत नही मिलेगी। मैं अपने वकील संजय हेगड़े और प्रांजल किशोर को धन्यवाद देती हूं”

रजनी बताती है कि उन्हें दृढ़ बनना पड़ा। उन्हें बहकाने और बरगलाने की कोशिशें हुई यहां तक की प्रलोभन भी दिए गए। यहां तक कि कुछ अपने तो यह भी कहते थे कि हम कुछ नही कर रहे हैं। अब शायद उन्हें पता चल होगा,हम क्या कर रहे थे ! फैसला आने के तुरंत बाद मुझे ऐसा अहसास हुआ कि जैसे सुबोध मेरे सामने खड़े होकर मुस्कुरा रहे हो ! मुझे उन लोगों पर भी सख्त नाराजग़ी है जिन्होंने योगेश राज और उसके जैसे गुंडो को हीरो मान रखा है। उत्तर प्रदेश पुलिस को भी एक आर्दश स्थापित करना चाहिए था,व्यवस्था में बहुत सी खामियां है,इन्हें जमानत पर बाहर ही नही आना चाहिए था मगर मैं विभाग की परेशानियों को समझती हूँ। सुबोध हमेशा जिंदाबाद रहेंगे। उन्हें मेरा सलाम।

सभार टू सर्किल नेट

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