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जमीयत उलमा-ए-हिंद की बदौलत फिर से पटरी पर लौटी चांद भाई की ज़िंदगी

नई दिल्लीः जमीयत उलमा-ए-हिंद अपने द्वारा किये जाने वाले समाज कल्याण के कार्यों के लिये जानी जाती रही है। इसी क्रम में जमीयत द्वारा उन परिवारों की मदद की गई है जो बीते वर्ष दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों में निशाना बनाए गए थे। जमीयत उलमा-ए-हिंद द्वारा दंगों में जलाई गईं दुकानों को फिर से आबाद कराया गया है। फारूकिया मस्जिद के बराबर में चांद मोहम्मद की कार की दुकान बुर्जपुरी के पुल पर स्थित है। बीते रोज़ जमीयत उलमा-ए-हिंद द्वारा इस दुकान का उद्घाटन जमीयत उलमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना हकीमुद्दीन कासमी के द्वारा किया गया। इस दौरान मौलाना गयूर अहमद कासमी, मौलाना अखलाक कासमी, मौलाना शकील कासमी, हाजी फखरुद्दीन और मुफ्ती मुहम्मद ताहिर और फारूकिया मस्जिद के इमाम और खतीब मौजूद रहे।

इस मौके पर दुकान मालिक चांद मोहम्मद ने जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि उन्होंने शुरू से ही हम सबका ख्याल रखा और हमें हमेशा जानकारी देते रहे और आज भी हमारे साथ खड़े हैं। मुकदमा लड़ रहे हैं। हम सभी दुआ करते हैं कि जमीयत उलमा-ए-हिंद के पदाधिकारी सलामत रहें।

मौलाना हकीमुद्दीन कासमी ने कहा कि जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी के नेतृत्व में यहां जो लोगों की मदद करने का सिलसिला शुरु हुआ वह अल्लाह के करम से ही संभव हो पाया है, और यह सब अल्लाह की रज़ा के किया गया है। उन्होंने कहा कि जमीयत उलमा-ए-हिंद की विशेषता यह है कि यह न केवल लोगों की मदद करता है बल्कि पीड़ितों में आत्मविश्वास और प्रोत्साहन भी जगाता है, इसलिए हम अस्थायी सहायता प्रदान नहीं करते हैं, हम वर्तमान में पीड़ितों के साथ हैं। और तब तक उनके साथ रहेंगे जब तक उनका जीवन वापस पटरी पर नहीं आ जाता।

मौलाना हकीमुद्दीन क़ासमी ने कहा कि जमीयत उलमा-ए-हिंद पीड़ित को न्याय दिलाने और दंगाइयों को सजा दिलाने के लिए अदालतों में लंबे समय तक लड़ती रही है। जमीयत उलमा-ए-हिंद ने  दंगों के 348 मुकदमे लड़ रहे हैं। जिनमें अब 265 मामलों में जमानत मिल चुकी है।