देश के पहले अटॉर्नी जनरल थे तीस्ता सीलडवाड़ के दादा एमसी सीतलवाड़, कराया था जनरल डायर का कोर्ट मार्शल

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नई दिल्लीः जानी मानी पत्रकार और सोशल एक्टिविस्ट तीस्ता सीतलवाड़ को बीते रोज़ गुजरात एटीएस ने गिरफ्तार किया है। तीस्ता की गिरफ्तारी के बाद से एक विशेष वर्ग मुंबई के जुहू स्थित उनके बंग्ले की तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट करते कुछ और ही रंग दे रहा है। अब सोशल एक्टिविस्ट सत्येंद्र पीएस ने तीस्ता के बारे में सोशल मीडिया पर एक टिप्पणी कर बताया कि उनका बैकग्राउंड किया है।

सत्येंद्र ने बताया कि ये वही तीस्ता सीतलवाड़ हैं जिनके दादा एमसी सीतलवाड़ देश के पहले अटॉर्नी जनरल थे। ये वही तीस्ता सीतलवाड़ हैं जिनके दादा चिमणलाल सीतलवाड़ ने जालियावाला बाग में 400 हिंदुस्तानियों को मार देने वाले जनरल डायर के खिलाफ ब्रिटिश अदालत में मुकदमा लड़ा और डायर को कोर्ट मार्शल कराया। वे डा.भीमराव आंबेडकर के हितकारिणी सभा के फॉऊंडिंग प्रेसिडेंट थे! ये वही तीस्ता हैं जो दंगो में मारे गए सैकड़ो हिंदुओ के न्याय की लड़ाई ही नहीं लड़तीं, बल्कि दर्जनों की शिक्षा दीक्षा का काम भी देखती हैं। मुम्बई बम ब्लास्ट 1993 में मारे गए “हिंदुओ” की लड़ाई भी तीस्ता ही लड़ीं, सरकार से मदद दिलाई।

सत्येंद्र ने लिखा कि उन्हें ये सावरकर के समर्थक गुंडे हिन्दू नहीं मानते क्योंकि ब्लास्ट में मरने वाले ठेले खोमचे वाले और आम नागरिक थे। पूरा परिवार पीढ़ी दर पीढ़ी आम लोगों की लड़ाई लड़ता रहा है। तीस्ता के पिता भी जाने माने बैरिस्टर थे और जनहित के मुद्दों पर लड़ने के लिए जाने जाते हैं। ये लोग देश भक्ति का ढोंग नहीं करते, इनकी तीन पीढ़ी आम लोगों के लिए गोरे अंग्रेजों से लड़ी है और स्वतंत्रता के बाद की पीढ़ी काले अंग्रेजों से लड़ रही है। समस्या यह है कि इस समय गद्दारों और वादा माफ गवाह बनने वाले सावरकर के भक्तों की सरकार है।

सत्येंद्र ने लिखा कि अंग्रेजों के पेंशन पर पलने वालों की मानस औलादों, भीख मांगकर, मन्दिर के नाम पर चंदा मांगकर जिंदगी बिताने वालों को लगता है कि हर कोई सिर्फ पैसे के लिए काम करता है। हर किसी को डराया जा सकता है। तीस्ता सीतलवाड़ के होने का मतलब एक बहादुर औरत का पब्लिक स्फीयर में होना है, जिससे देश की साम्प्रदायिक ताकतों और उनके सबसे बड़े आका को डर लगता है। तीस्ता को बर्बाद करने के लिए सरकार ने जितनी ताकत झोंक रखी है, वही तो तीस्ता होने का मतलब है। सत्येंद्र ने लिखा कि खौफ ऐसा होना चाहिए कि आधी आबादी जिसे ईश्वर समझे बैठी हो, वह एक अकेली महिला से कांपता नजर आए। भले ही उसकी जेब मे आईबी सीबीआई, सीआरपीएफ हो और वह डेल्टा सिक्योरिटी के घेरे में रहता हो।

वहीं पूर्व आईपीएस विजय शंकर सिंह ने तीस्ता की गिरफ्तार पर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। विजय शंकर सिंह ने ट्वीट किया कि RSS आजादी के लिए लड़ने वाले हर व्यक्ति, परिवार, विचारधारा से स्वाभाविक रूप से नफरत करता है और उनके खिलाफ कार्यवाही करने का कोई भी मौका नहीं छोड़ता है। ऐसा एक भी आज़ादी का नायक आप को नहीं मिलेगा जिसके समर्थन में RSS के लोगों ने 1925 से 47 तक कोई लेख लिखा या कोई आंदोलन चलाया हो। उस समय या तो यह जिन्ना के हमखयाल थे, या अंग्रजी राज की फंडिंग पर स्वाधीनता संग्राम सेनानियों की मुखबिरी कर रहे थे।

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