किस्सा क्रिकेट का: जब इमरान ख़ान ने श्रीकांत को कॉल बैक किया

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वीर विनोद छाबड़ा

क्रिकेट में ऐसी घटनाएं होती रहती हैं जिससे खेल शर्मसार होता है, और मीडिया भी इसको बहुत बढ़ा-चढ़ा कर बताता है ताकि उनकी टीआरपी बढ़ती रहे. खासतौर पर जब मामला इंडिया और पाकिस्तान के बीच हो तो काफी तूल पकड़ता है. लेकिन बावजूद इसके कुछ ऐसी घटनाएं भी लगातार होती रहती हैं जिससे विश्वास होता है कि क्रिकेट का जेंटलमैन फ्लेवर ज़िंदा है. मगर अफ़सोस कि मीडिया में इसका ज़िक्र कम होता है. आज ऐसी ही एक छोटी सी भलमनसाहत का ज़िक्र करना है जिसे अस्सी और नब्बे के सालों में क्रिकेट में दिलचस्पी रखने वाले नहीं भूले होंगे, कम से कम कृष्माचारी श्रीकांत तो कतई नही.

1989-90 के पाकिस्तान टूर के के लिए श्रीकांत की कप्तानी में इंडियन टीम ने चार टेस्ट खेले थे और चारों ही ड्रा हुए. इसी सीरीज़ में सचिन का डेब्यू हुआ था. बावजूद पूर्वाग्रहों से ग्रस्त अंपायरिंग के ये बहुत बड़ी उपलब्धि थी. इसके बाद चार वन डे इंटरनेशनल मैचों की सीरीज़ शुरू हुई. पेशावर में पहला मैच ख़राब रोशनी की वज़ह से हुआ ही नही. गुजरांवाल में दूसरा मैच पाकिस्तान ने आसानी से 7 विकेट से जीता. कराची ओडीआई पब्लिक के हुड़दंग की वज़ह से रद्द करना पड़ा. उस वक़्त पाकिस्तान के तीन विकेट 14.3 ओवरों में 24 रन पर 3 विकेट गिर चुके थे. अपनी टीम के इस फूहड़ प्रदर्शन को पाकिस्तानी दर्शक बर्दाश्त नहीं कर सके.

अब बारी आई लाहोर ओडीआई की. 22 दिसंबर 1989 कर्नल गद्दाफ़ी स्टेडियम. 40 ओवर के इस मैच में इंडिया को जीतने के लिए 151 रन बनाने की चुनौती मिली. लेकिन इंडिया की हालत बहुत ख़राब थी. रमन लाम्बा, नवजोत सिद्धू और संजय मांजरेकर सस्ते में आउट हो गए. स्कोर था 49 रन पर 3 विकेट. लेकिन ओपनर श्रीकांत रन एक छोर संभाले रहे. हालांकि वो अपनी तेज रफ़्तार स्टाइल से नहीं खेल रहे थे. लेकिन टीम को उनसे बहुत उम्मीदें थीं. पाकिस्तानी टीम को भी मालूम था कि अगर श्रीकांत जमे रहे तो ख़तरा ही ख़तरा है. उस समय इंडिया का स्कोर 66 पर 3 विकेट था और श्रीकांत 31 रन पर थे. लेकिन तभी वक़ार यूनिस की गेंद को श्रीकांत ठीक से खेल नहीं पाए. गेंद उनके पैड पर लगी. एक ज़ोरदार अपील हुई. और अंपायर बेग ने फ़ौरन उंगली उठा दी.

श्रीकांत इस फ़ैसले से कतई खुश नहीं हुए और उन्होंने मैदान में ही अपनी नाराज़गी का प्रदर्शन भी किया. कप्तान इमरान ख़ान को श्रीकांत की यूं खुली नाराज़गी में ईमानदारी नज़र आई. डीआरएस का कोई सिस्टम ही नहीं था. अंपायर का फ़ैसला ही फ़ाइनल है. इमरान अंपायर का फ़ैसला बदल नहीं सकते थे क्योंकि ऐसा करने का उन्हें कोई हक़ ही नहीं था. मगर वो श्रीकांत को दोबारा खेलने की इजाज़त तो दे ही सकते थे. पूर्व में इंटरनेशनल क्रिकेट में ऐसे कई उदाहरण पेश हो चुके थे, जब फ़िल्डिगं कप्तान ने अंपायर के फैसले के विपरीत बैट्समैन को ‘कॉल बैक’ किया था. और इमरान को ज़रूर ये सब घटनाएं याद आयी होंगी. तभी तो उन्होंने श्रीकांत को ‘कॉल’ कर लिया. उस समय टीवी और रेडियो पर बैठे तमाम कमेंटेटर्स ने इमरान की इस सहृदयता की जम कर तारीफ़ की, एक कैप्टेन का दूसरे कैप्टेन को इससे बढ़िया उपहार दूसरा नहीं हो सकता. इमरान ने क्रिकेट की महान परंपराओं को ज़िंदा रखा. वग़ैरह वगैरह.

लेकिन ये श्रीकांत की बदकिस्मती रही कि वो वक़ार की अगली ही गेंद पर विकेट कीपर सलीम यूसुफ को कैच थमा बैठे. और इस बार शक़ की कोई गुंजाईश नहीं थी. उदास श्रीकांत भारी कदमों से लौट आये. उनके आउट होने के बाद विकेट गिरने की झड़ी लग गयी और 31 वें ओवर में इंडियन टीम 112 रन पर आल आउट होकर पैवेलियन लौट आयी. इंडिया भले सीरीज़ 0-2 से हार गयी, लेकिन इमरान की इस दरियादिली की याद लिए घर लौटी.

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