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कृषि सुधार बिल के विरोध में पीस पार्टी का प्रदेशव्यापी प्रदर्शन, इरफान बोले ‘किसानों को ग़ुलाम नहीं बनने देंगे’

लखनऊ/नई दिल्लीः केन्द्र सरकार द्वारा बनाए गए कृषि सुधार अधिनियम का विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार को पीस पार्टी कार्यकर्ताओं ने उत्तर प्रदेश के कई जनपदों में इस अधिनियम का विरोध किया, और जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। इस मौके पर पीस पार्टी के उत्तर प्रदेश प्रभारी मोहम्मद इरफान ने कहा कि किसानों को ग़ुलाम नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह क़ानून किसी भी तरह किसानों के पक्ष में नहीं है।

पीस पार्टी द्वारा उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर, लखीमपुर खीरी, बागपत, गोरखपुर, देवरिया, मऊ, हापुड़, बुलंदशहर, समेत कई जनपदों में कृषि सुधार अधिनियम को काला कानून बताते हुए प्रदर्शन किया गया। बता दें कि हाल ही में राज्यसभा में इस बिल को ध्वनीमत से पारित कर दिया गया था। हालांकि राज्यसभा में भाजपा के पास बहुमत नहीं है लेकिन इसके बावजूद यह बिल पारित हो गया था। जिसका विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है।

जिला बुलंदशहर पीस पार्टी द्वारा शांति पूर्वक दे रहे धरना प्रदर्शन को उत्तर प्रदेश सरकार के इशारे पर पुलिस प्रशासन द्वारा धरने को रोकने की पूरी कोशिश की पीस पार्टी के जिला अध्यक्ष डॉक्टर सुजात अली के साथ काला आम चौकी इंचार्ज नोकझोंक करते हुए

पीस पार्टी प्रभारी मोहम्मद इरफान ने कहा कि इस क़ानून के द्वारा पूंजीपतियों को यह अधिकार मिल जाएगा कि वे बिना कोई शुल्क चुकाए किसानों के खेतों से ही फसल उठवा लें और समर्थन मूल्य देने की भी उस पर कोई कानूनी बाध्यता नहीं रहेगी। कृषि व्यापार में अंतर्राज्यीय बाधाएं ख़त्म हो जाने के बाद अब कॉर्पोरेट घरानें भी अपनी निजी मंडियां स्थापित कर लेंगी और गांव-गांव में कम भाव में किसानों की फसल खरीदने के लिए दलाल नियुक्त करेगें जो उस इलाके के ताकतवर लोग होंगे जिनको इस काले  कानून में एग्रीगेटर (जमाकर्ता) कहा गया है।

उन्होंने कहा कि कॉर्पोरेट  ऑनलाइन व्यापार भी स्थापित करेंगे, जो फसल के बाज़ार में आने के समय भाव गिराने का खेल पूरे देश के पैमाने पर खेलेंगे। कागजों में सरकारी मंडियां तो होंगी, लेकिन किसानों की फसल खरीदने वाला कोई नहीं होगा। फसलों का मूल्य निर्धारण  सब कुछ सरकारी नियंत्रण से बाहर होगा।