चर्चा में

तो मौजूदा सरकार को ‘आंख दिखाने’ की क़ीमत चुका रहा है संजीव भट्ट का परिवार!

विक्रम सिंह चौहान

मोदी सरकार की आंख में आंख डालकर कोई शख्स लड़ा और उसकी कीमत चुका रहा है तो वे आईपीएस संजीव भट्ट हैं। 33 माह से संजीव भट्ट पालनपुर जेल में हैं। उन्हें पहले 23 साल पुराने ड्रग्स केस में फंसाया गया, फिर 32 साल पुराने हिरासत में मौत मामले में फंसाया गया है। ड्रग्स केस में पिछले हफ्ते गुजरात हाईकोर्ट ने संजीव भट्ट के पुनरीक्षण आवेदन पर सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया है। इसी मामले में संजीव भट्ट को पहले गिरफ्तार किया गया, फिर हिरासत में मौत मामले में उम्रकैद की सजा दी गई।

इस मामले में वे सजा निलंबित करने का लगातार सुप्रीम कोर्ट में अपील कर रहे हैं, लेकिन उन्हें न्याय नहीं मिला। रंजन गोगोई के सामने बेहतर ग्राउंड था वे चाहते तो संजीव भट्ट के साथ न्याय कर सकते थे, लेकिन एक राज्यसभा सीट के लिए गोगोई ने ईमान से समझौता कर लिया। बाद के न्यायमूर्तियों ने भी वही किया। संजीव भट्ट की पत्नी श्वेता, उनके बेटे शांतनु, बेटी आकाशी संजीव भट्ट की रिहाई के लिए कभी हाई कोर्ट तो कभी सुप्रीम कोर्ट का चक्कर काट रहे हैं। लेकिन न्याय का दरवाजा बंद है। सबको पता है ये किसके इशारे पर हो रहा है। संजीव भट्ट सच बोलने की कीमत चुका रहे हैं।

यह बात चर्चित है गुजरात दंगों के वक़्त 27 फरवरी 2002 की रात को एक क्लोज मीटिंग में मोदी ने संजीव भट्ट सहित 8 आईपीएस को मुस्लिमों को सबक सिखाने की बात कही थी। बाकी सब आईपीएस ने हां कह दिया पर संजीव भट्ट ने मना कर दिया। उन्होंने कहा लॉ एंड ऑर्डर हमारी ड्यूटी है और एक आईपीएस के रूप में इसे पालन करना मेरी जिम्मेदारी है। यह बात मोदी को नागवार गुजरा, बताते हैं उनकी आंखें इस विरोध से लाल हो गई थीं। 2011 में आईपीएस संजीव भट्ट को निलंबित कर दिया गया। उन्हें मोदी ने साबरमती जेल में डाल दिया,फिर केंद्र में आने पर 2015 में पुलिस अधिकारी के रूप में उनकी सेवा भी खत्म कर दिया।

संजीव भट्ट हार मानने की जगह लगातार लड़ते रहे। मोदी को यह बर्दाश्त नहीं हुआ इसलिए पुराने मामलों में संजीव को जेल में डाल दिया। एक गुजराती एक्टिविस्ट ने दावा किया कि जेल में संजीव भट्ट को शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना दी गई है। संजीव भट्ट के लिए जोर से सत्ता से टकराती उनकी पत्नी श्वेता पर हमला भी हुआ,उन्हें सुरक्षा मांगने पर भी नहीं दिया गया। संजीव भट्ट के मामले में हाई कोर्ट,सुप्रीम कोर्ट ही नहीं विपक्ष भी नंगा नज़र आता है। पर संजीव भट्ट उनकी पत्नी श्वेता, उनके बेटे शांतनु और बेटी आकाशी बहुत बहादुर हैं।ये अलग ही मिट्टी के बने लोग हैं। मोदी इस परिवार की बहादुरी से गुजरात से डरता आया है। इस बहादुर परिवार का साथ देश के सभी लोगों को देना चाहिए।

(लेखक सोशल एक्टिविस्ट एंव स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं, ये उनके निजी विचार हैं)