चर्चा में

दिल थाम कर ध्यान से पढ़िए यह सच्चाई, सरकार मजदूरों को मुफ्त यात्रा करवा रही है तो…

कृष्णकांत

वह सर्कुलर कहां से आया जिसे मीडिया ने छापा कि राज्य सरकारें मजदूरों से किराया और 50 रुपये अतिरिक्त वसूलेंगी और रेलवे को देंगी? रेलवे टिकट प्रिंट करके राज्यों को दे देगा. यह सर्कुलर कई संस्थानों में छपा, अवीक साहा और योगेंद्र यादव आदि ने भी शेयर किया था, यह ​सोशल मीडिया पर भी वायरल हुआ. इसी सर्कुलर में कहा गया कि टिकट काउंटर नहीं खुलेंगे, टिकट राज्य सरकारों को हैंडओवर किए जाएंगे.

क्या यह सर्कुलर जवाहरलाल नेहरू ने जारी किया? केंद्र 85 फीसदी और राज्य 15 फीसदी खर्च उठाएंगे, यह बात आज से पहले किसी ने क्यों नहीं सुनी? आज ही बिहार पहुंचे मजदूर कैसे कह रहे हैं कि हम केरल से 910 रुपये देकर आए हैं? कर्नाटक ने बस का दोनों तरफ का किराया क्यों वसूला? तर्क था कि बस जाएगी तो वापस भी आएगी. इसलिए दोहरा किराया लेना है. खबरें छपने और फजीहत के बाद इसमें सुधार ​किया गया कि एक ही तरफ का किराया लिया जाएगा.

 

अगर केंद्र और राज्यों को मिलकर खर्च उठाने का फैसला किया था तो हेमंत सोरेन और अशोक गहलोत आदि गैरबीजेपी मुख्यमंत्रियों को यह क्यों नहीं मालूम था? सोरेन ने दो मई को मजदूरों से किराया वसूलने की निंदा की. अगर रेलवे मजदूरों से किराया नहीं वसूल रहा था तो कांग्रेस किसका खर्च उठाने चली है? अगर सरकार मुफ्त यात्रा करवा रही थी तो सोनिया गांधी के ट्वीट के बाद सुब्रमण्यम स्वामी नाराजगी क्यों जता रहे थे? स्वामी ने ही ट्वीट करके जानकारी दी कि पीयूष गोयल से बात की है, 85 फीसदी केंद्र और 15 फीसदी राज्य देगा.

ना मुख्यमंत्रियों को मालूम, न अपने नेताओं को मालूम, न रेलवे को मालूम, तो यह आदेश जारी किसे किया गया? कल तीन मई को महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और कांग्रेस नेता नितिन राउत ने 5 लाख रुपये अपनी जेब से दिया और बयान दिया कि यह गलत है. सरकार को यह खर्च उठाना चाहिए. जब मुफ्त यात्रा करवा रहे हैं तो नितिन राउत ने किसका टिकट खरीदा? आज की खबरें हैं कि गुजरात से मजदूरों ने टिकट खरीद कर रेल यात्रा शुरू की है. यह कैसे हुआ? अगर यह व्यवस्था बन चुकी है तो नीतीश कुमार यह कैसे कह रहे हैं कि जो मजदूर आएंगे, उन्हें टिकट का खर्च और 500 रुपये दिए जाएंगे? फिर फ्री ट्रेन कहां गई?

 

सबसे अंतिम बात, अभी तक ऐसा कोई सर्कुलर सामने नहीं आया है जिसमें कहा गया हो कि 85 फीसदी रेलवे देगा और 15 फीसदी राज्य देंगे. यह कैसे माना जाए कि यह बात भी सही है? अब हम बता रहे हैं कि हुआ क्या? सुबह सोनिया गांधी ने कहा कि हर राज्य में मजदूरों का किराया कांग्रेस देगी. इसके बाद सियासत खतरे में पड़ गई और झूठ का कारोबारी सेंसेक्स आसमान जा पहुंचा.

सीधे बोलिए कि आप अपनी आदत के मुताबिक क्रूरतापूर्ण वसूली कर रहे थे. जब हल्ला मचा त​ब आपने आज ये व्यवस्था की है कि 85 फीसदी केंद्र देगा और 15 फीसदी राज्य देंगे. जिस बेशर्मी से वसूली शुरू की थी, अब उसी बेशर्मी से नई अफवाहें फैला रहे हैं.