छात्र को स्कूल की छत से लटकाने वाले टीचर पर रवीश का सवाल, ‘ऐसे मास्टर को समाज कैसे मान्यता देता आ रहा है’

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उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में निजी स्कूल में शरारत करने पर कक्षा दो के छात्र को सजा के तौर पर प्रिंसिपल ने बिल्डिंग की छत से पैर पकड़ कर उल्टा लटका दिया। बच्चे को लटकाने का फोटो सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो गया। जिसके बाद एक्शन लेते हुए जिलाधिकारी ने मामले में टीचर के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है।

इस घटना पर जाने-माने पत्रकार रवीश कुमार ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। रवीश कुमार ने अपने फेसबुक पेज पर लिखा कि बात बात में उल्टा टांग देने का मुहावरा किस तरह सोच में समा गया है और हथियार बन गया है। एक इंसान में जाति और धर्म ने नफ़रत ठूँसने में कोई जगह बची छोड़ दी होगी जहां इस तरह की क्रूरताएं स्थापित हो जाती हैं। हर आदमी एक दूसरे को ललकार रहा है। सबने भीड़ बना ली है और सब अपने आप में भीड़ हो चुके हैं। आप ऐसी कितनी तस्वीरों को देखकर शर्मनाक शर्मनाक करेंगे। हर दिन इन क्रूरताओं की प्रचुर सप्लाई है।

रवीश ने लिखा कि मनोज विश्वकर्मा नाम के इस शिक्षक के भीतर कितना ग़ुस्सा भरा होगा, इसने बच्चे को ही उल्टा टांग दिया है। कहाँ से इतना ग़ुस्सा आता होगा? यह स्कूल में कैसे हैं? ऐसे मास्टर को समाज कैसे मान्यता देता आ रहा है, हम सब जानते हैं। हर दूसरे टीचर के भीतर एक छड़ी समा गई है। वह छड़ी की तरह लचकता हुआ छात्रों के कमसिन मन पर बरसता रहता है, दहशत पैदा करता है। क्या कोई बच्चा स्वाभाविकता को जी पाएगा।

उन्होंने कहा कि आपसे ये तस्वीर देखी नहीं जाएगी लेकिन देख तो रहे ही हैं। नियंत्रित करने का यह क्रूर खेल इस देश में हर दिन में कहीं न कहीं से आ जाता है। हर आदमी यहाँ एक दूसरे से ठिठका हुआ है। चिढ़ा रहा है। रगेद रहा है । दिन के एक हिस्से में वह बहुसंख्यक की तरह क्रूर और एक हिस्से में अल्पसंख्यक की तरह बेबस होता रहता है।

 

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