रवीश का लेख: एक ख़ूबसूरत मुल्क में हर दिन काँटे लगाए जा रहे हैं, इसकी रूह का बदन कुछ और छिलता जा रहा है।

बहुत दिनों तक भरमाया गया कि मुल्क को एक मज़बूत नेता की ज़रूरत है और वह आ गया है। अब फ़रमाया जा रहा है कि मज़बूत नेता के आमद के सातवें साल में अस्सी करोड़ हिन्दू असुरक्षित हो गए हैं। मुसलमानों को मारने और मुल्क को हिन्दू राष्ट्र में बदलने का एलान हो रहा है।

दूसरी तरफ़ मज़बूत नेता नीली चादर ओढ़े अंबेडकर की तस्वीर के नीचे खड़ा है ताकि भरमाया जा सके कि उसके दिल में संविधान की कितनी इज़्ज़त है। फिर उसी मज़बूत नेता के समर्थक फ़रमा रहे हैं कि हिन्दुओं के बच्चे कॉपी किताब छोड़ कर तलवार उठा लें। मज़बूत नेता के यह सात साल खोखले हो चुके हैं। वह चंद सरकारी योजनाओं की पेंच में उलझ गया है। ग़रीबी और बेरोज़गारी बेतहाशा बढ़ चुकी है। नौजवानों को उसी रास्ते पर धकेलने के लिए भरमाया जा रहा है और फ़रमाया जा रहा है कि डॉक्टर नहीं दंगाई बनने का ख़्वाब देखो।

एक ख़ूबसूरत मुल्क हर दिन कुछ और काँटे लगाए जा रहे हैं। इसकी रूह का बदन कुछ और छिलता जा रहा है। जिन्हें लगता है कि ऐसे फ़रमाने वाले कुछ लोग हैं, बाक़ी कंपनियों में मैनेजर बनने का ख़्वाब बचा हुआ है उन्हें एक बात कह दूँ कि ये भरम भर है। आपको और आपके बच्चों को ख़ून की सियासत के लिए भरमाया जा रहा है।

इस कार्यक्रम को देखिएगा जो इसमें फरमाया जा रहा है। नीली चादर ओढ़े एक शख़्स का दीदार होगा तो एक दिन अंबेडकरी है फिर चादर बदल कर कुछ और दिखता है। भारत की राजनीति धर्म में उलझ गई है। आपकी क़िस्मत की भाषा यही है जो ये लोग बोल रहे हैं, जिनकी भाषा आप बोल रहे हैं। एक देश एक क़ानून के नाम भरमाया गया और अब फ़रमाया जा रहा है कि उनके लिए काई क़ानून नहीं होगा जो नरसंहार की आग में युवाओं को झोंकने का आह्वान कर रहे हैं।

शहर में केवल लकड़ी के सामान नहीं जलते हैं, नफ़रत की आग में आप भी भीतर से चलेंगे। आलीशान कंपनियों में नौकरी करने वाले लोग भले चुप हैं और इन सबको सही मानते हैं लेकिन इस आग में भी जलेंगे। मेरा एक ही सवाल है। मुसलमानों को मारने का नारा लगाने वाले मारने के लिए हत्यारे कहाँ से लाएँगे? किनके बच्चे होंगे? शर्म कीजिए।

(लेखक जाने-माने पत्रकार हैं, यह लेख उनके फेसबुक पेज से लिया गया है)

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