रवीश का सवाल: अगर CAA विरोधी आंदोलन में मरने वाले 22 नौजवान मुसलमान न होते तब भी ऐसी ही चुप्पी रहती?

जाने माने पत्रकार रवीश कुमार ने नागरिकता कानून के विरोध में उत्तर प्रदेश में पुलिस की गोली से मारे गए नौजवानों का मुद्दा उठाया है। रवीश कुमार ने इस मुद्दे पर विपक्षी की चुप्पी को भी आड़े हाथ लिया है। दरअस्ल दिसंबर 2019 में उत्तर प्रदेश में सीएए विरोधी आंदोलन में हिंसा हुई थी, इस हिंसा में पुलिस की गोली से 22 नौजवानों की मौत हो गई थी। इस घटना के दो साल बाद भी आरोपी पुलिसकर्मियो के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया, और न ही कोई प्राथमिकी दर्ज हुई।

रवीश कुमार ने इस घटना से संबंधित एक समाचार पोर्टल की ख़बर शेयर करते हुए सवाल किया कि प्रधानमंत्री जी,आप यूपी में किस क़ानून व्यवस्था की बात कर रहे हैं? क्या आपने ये रिपोर्ट देखी है? क्या यह शर्मनाक नहीं है कि 22 लोग मारे गए, और इनके मामले में FIR तक नहीं हुई? नागरिकता क़ानून के विरोध में हो रहे प्रदर्शनों में शामिल ये नौजवान पुलिस की गोली से मारे गए थे। क्या पुलिस फ़ायरिंग में मारे गए लोगों के मामले में कोई जाँच नहीं होती है? भयानक रिपोर्ट है ये।

रवीश ने कहा कि किसी भी क़ानून से चलने वाले देश में ऐसी ख़बर पर हड़कंप मच जाता। नागरिक अधिकारों की बात होने लगती है। जाँच होने लगती। अगर ये नौजवान मुसलमान नहीं होते तो क्या पुलिस इस तरह से चुप रहती और विपक्ष इस तरह से चुप रहता कि मुसलमानों की बात करेंगे तो हिन्दू वोट नाराज़ हो जाएगा? राजनीति अपने गुनाहों का अपराध बोध हिन्दू जनता पर लाद रही है। बाद में उसे ही जवाब देते रहना पड़ेगा और नेता लोग इस तरह की करतूत से सत्ता प्राप्त कर मौज कर निकल जाएँगे। ऐसा मत कीजिए।

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