लखीमपुर बवाल: राकेश टिकैत बोले “हमारा समझौता पैसे पर नहीं, गिरफ्तारी पर है”

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भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा है कि समझौता पैसे पर नहीं, गिरफ्तारी पर है। उन्होंने कहा कि जरूरी हुआ तो मुआवजे का साढ़े तीन करोड़ सरकार को लौटा देंगे. हमारा समझौता गिरफ्तारी पर है, मंत्री की बर्खास्तगी पर है, पैसों पर नहीं है. अभी सारे सवाल बरकरार हैं. जो समझौता हुआ वह दाह संस्कार तक सीमित था. किसी की बॉडी को रोक लेना एक लिमिट तक ही ठीक था. बाकी हम आंदोलन करने के लिए स्वतंत्र हैं. जो समझौता हुआ वह मेरा अकेले का नहीं था. वहां पर हजारों लोग थे.

राकेश टिकैत ने कहा कि उन्होंने गिरफ्तारी के लिए 8 दिन का टाइम मांगा, वह हमने दिया. 12 तारीख तक का समय हमने उन्हें दिया है और 12 तारीख को अगला निर्णय पूरा देश देखेगा. कल किसी मिनिस्टर ने बयान दिया है कि समझौता हो गया तो समझौता पैसे पर नहीं हुआ है. आंदोलन तब तक होगा जब तक मंत्री बर्खास्त नहीं होगा और मंत्री के बेटे की गिरफ्तारी नहीं होगी. हमको उनकी गिरफ्तारी चाहिए. जानकारी के लिए बता दें कि लखीमपुर के तिकुनिया में तीन अक्टूबर को प्रदर्शन कर रहे किसानों पर गाडी चढा दी थी, इसमें कई किसानों की जान चली गई थी।

लोकतंत्र के खंभे को गिरा गई थार

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, कल तक बताओ कि लखीमपुर मामले में अब तक कितने गिरफ्तार हुए, क्या क्या कार्रवाई हुई. इसका असर ये हुआ कि चार दिन से सन्नाटा मारकर बैठी यूपी पुलिस ने आज दो गिरफ्तारी की और शहजादे टेनीपुत्र के लिए छापेमारी होने की बात कही जा रही है. आखिर कोर्ट को कुछ कहानियां भी तो सुनानी पड़ेंगी.

दावा कर रहे थे कि कोई गोली नहीं चली. अब पुलिस को घटनास्थल से खाली कारतूस भी मिल गए हैं. मंत्री जी कह रहे थे कि पहले किसानों ने तलवार से हमला किया. अब एक स्पष्ट वीडियो भी आ गया जिसमें पीछे से आकर गाड़ी कुचलते हुए निकल जाती है और किसानों को संभलने का मौका तक नहीं मिलता.

सारे विपक्षी दल अलग टाइट हैं. नेता हों या जनता, हर किसी को मालूम है कि कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है. पुलिस अब कुछ करती हुई दिख रही है. लेकिन गृहमंत्री लापता हैं. गृहराज्य मंत्री सक्रिय हैं क्योंकि सबसे पहले उन्होंने ही भड़काने वाला दंगाई भाषण दिया था. जिस मंत्री को सबसे पहले बर्खास्त होना चाहिए था, वही सबसे ज्यादा सक्रिय है और पूरी ताकत से प्रशासन, कार्रवाई, गवाहों और सबूतों को प्रभावित कर रहा है.

बिना बात के दो दो घंटे का भाषण ठेलने वाले मजबूत महानायक मौन व्रत पर चल रहे हैं. केंद्र सरकार और राज्य सरकार, दोनों मिलकर इस नगीने मंत्री टेनी और टेनीपुत्र को बचाने के लिए पूरी मशीनरी लगाकर झूठ फैला रही है.

जो हो रहा है, उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि कोर्ट के दखल के बावजूद न्याय की कोई खास उम्मीद नहीं है. इस लोकतंत्र के चारों खंभे तानाशाही की थार से कुचलकर ध्वस्त किए जा चुके हैं.

क्यों खुला घूम रहा है मंत्री पुत्र?

सेक्युलरों को गाली देने वालों से अपील है कि गाली देने के लिए विवेक और तमीज भी जरूरी है. एक केंद्रीय मंत्री, एक मुख्यमंत्री, एक सांसद और किसान में से संवैधानिक विशेषाधिकार किसे हासिल है? इसका दुरुपयोग करने की संभावना किसके साथ है? क्या एक आम आदमी बर्बर ढंग से चार हत्याएं करके खुला घूम सकता है? लेकिन मंत्रीपुत्र घूम रहा है.

केंद्र में गृह राज्यमंत्री, जिस पर राज्य की आंतरिक सुरक्षा का जिम्मा है, वह भड़काने वाला भाषण और धमकी देता है और उसका बेटा चार लोगों को गाड़ी से रौंद देता है. मंत्री पद पर बैठकर झूठ भी वही फैला रहे हैं, पुलिस और राज्य प्रशासन को कंट्रोल भी वही कर रहे हैं.

एक पत्रकार मारा गया. उसके बारे में झूठ फैलाया गया. अब तक परिवार कह रहा है कि शरीर पर गोली का कोई निशान नहीं था. शरीर पर घिसटने और कुचले जाने के निशान थे. उस परिवार पर दबाव डाला ​गया कि इल्जाम किसानों पर लगाया जाए. यह दबाव कौन डाल रहा था या किसके प्रभाव में डाला जा रहा था?

जो बीजेपी के कार्यकर्ता मारे गए, उसका जिम्मेदार कौन है? उन्हें मारा किसानों ने, लेकिन उपद्रव भड़काने और किसानों को काफिले से रौंदने के लिए उन्हें कौन ले गया? वे किसकी गुंडागर्दी में हिस्सेदार थे? इसके लिए किसान कैसे जिम्मेदार हैं?

कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी राज्य प्रशासन और गृह राज्य मंत्री की है या किसानों की? क्या आप हमसे यह सुनना चाहते हैं कि मंत्री और सत्ता मद में चूर उसके शहजादे को हत्या का अधिकार है और किसान दोषी हैं?

सेक्युलर होने का यह मतलब नहीं होता कि हम ये भी भूल जाएं कि जवाबदेही भी कोई चीज होती है. जो किसी ताकतवर ओहदे पर है, जिसे विशेषाधिकार हासिल है, जिस पर जिम्मेदारी है, जवाबदेही ही उसी की होगी. क्या आप एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति और एक सामान्य व्यक्ति के अपराध को एक समान मानते हैं?

अगर एक आम आदमी हत्या करे तो वह हत्यारा है. अगर एक मंत्री या मंत्रीपुत्र हत्या करे तो वह सिर्फ व्यक्ति का हत्यारा नहीं है, वह सिस्टम का हत्यारा है.

(लेखक पत्रकार एंव कथाकार हैं)