राहुल के आक्रामक तेवर, 700 किसान शहीद हुए हैं, सरकार मुआवज़ा दे

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि किसान आंदोलन के दौरान सात सौ किसान शहीद हुए हैं और खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृषि कानून वापस लेते समय कानून लागू करने के लिए माफी मांगी थी इसलिए उन्हें शहीद किसानों के परिजनों को मुआवजा देना चाहिए।

राहुल गांधी ने शुक्रवार को यहां कांग्रेस मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि श्री मोदी के माफी मांगने से यह साफ हो गया है कि वह स्वीकार कर चुके हैं कि कृषि कानूनों को लागू करने की उनसे गलती हुई और उस गलती के कारण किसान शहीद हुए हैं। उन्होंने कहा कि इस स्वीकारोक्ति के बाद उन्हें किसानों को आर्थिक मदद देनी चाहिए और अगर मारे गये किसानों की सूची चाहिए तो उन्हें उपलब्ध करा दी जाएगी।

राहुल गांधी ने कहा कि आश्चर्य की बात यह है कि हाल के दिनों में सरकार ने संसद में आंदोलन के दौरान मारे गये किसानों को वित्तीय सहायता देने संबंधी सवाल पर कहा कि उसके पास शहीद किसानों का कोई रिकार्ड नहीं है इसलिए मुआवजा नहीं दिया जा सकता। कांग्रेस नेता ने कहा कि सरकार किसानों को आर्थिक सहायता दे और इसके लिए उन्हें शहीद किसानों की सूची दी जा सकती है।

उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार ने मानवता के आधार पर शहीद किसानों की सूची तैयार कर 403 परिजनों को आर्थिक सहायता और 152 को नौकरी दी है। पंजाब सरकार के पास 500 शहीद किसानों की सूची है और अगर केंद्र सरकार इस सूची के आधार पर किसानों को मुआवजा देना चाहती है तो उसे सूची उपलब्ध कराई जा सकती है और केंद्र उस सूची के आधार पर किसानों को मुआवजा दे। इसी तरह का कदम केद्र सरकार को भी उठाना चाहिए और इस सूची का इस्तेमाल करके सात सौ लोगों को मुआवजा देना चाहिए।


कांग्रेस नेता ने कहा कि कोरोना से कितने लोग मारे गये और किसान आंदोलन के दौरान कितने किसान शहीद हुए हैं इसका सरकार के पास कोई रिकार्ड नहीं है। सरकार ने संसद में यह बात स्वीकार किया है। उनका कहना था कि किसानों को पैसा मिलना चाहिए और सरकार चाहे तो उनसे सूची ले और सात सौ लोगों को मुआवजा दे।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने खुद कहा है कि उनसे गलती हुई है। श्री मोदी अगर गलती स्वीकारते हैं तो हमसे सूची लेकर सरकार को शहीद किसानों के परिजनों को मुआवजा देना चाहिए। मुआवजा करोड़ों और अरबों में नहीं है। मामूली है और उन्हें यह राशि दी जानी चाहिए। उनका कहना था कि इस सरकार के पास दो तीन उद्योगपतियों को देने के लिए पेैसे की कमी नहीं है और इसके लिए वह हर समय तैयार रहती है लेकिन आंदोलन में मरे सात सौ किसानों के परिजनों को न्यूनतम मदद करने के लिए उसके पास पैसा नहीं है।

राहुल गांधी ने कहा कि सरकार यह राशि अगर पीड़ित परिजनों को देती तो शहीद किसानों का यह न्यूनतम सम्मान होगा लेकिन मोदी सरकार क्रूर है और उसने संसद में मौन रखकर मारे गये किसानों को श्रद्धांजलि तक नहीं दी। उन्होंने कहा कि यदि यह सरकार थोड़ा भी संवेदनशील होती तो उसे किसानों के परिजनों की सूची पंजाब सरकार से मांगकर किसानों की मदद करती।


उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार शहीद किसानों के परिजनों को आर्थिक मदद देना चाहती है तो शहीद परिजनों के नाम, पते और फोन नम्बर सब उपलब्ध हैं। प्रधानमंत्री भी यदि खुद बात करना चाहते हैं तो सीधे फोन कर उनकी स्थिति से अवगत हो सकते हैं।
कांग्रेस नेता ने कहा कि श्री मोदी किसानों के साथ हुए व्यवहार के लिए खुद को दोषी मानते हुए पहले ही माफी मांग चुके हैं। उनकी इस माफी से साफ है कि उन्होंने स्वीकार किया है कि तीन कृषि कानून लागू करके उन्होंने गलत काम किया है। अब उन्हें यह भी स्वीकार करना होगा कि किसानों की मृत्यु के लिए मोदी सरकार जिम्मेदार है और इस सरकार को किसानों को मुआवजा देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री अगर मानवीय स्तर पर पीड़ित परिवारों के बारे में सोचते हैं तो वह तुरंत शहीद किसानों के परिजनों को मुआवजा देना शुरु कर देंगे लेकिन वह खुद की छवि बनाने में लगे रहते हैं। उनका कहना था कि पंजाब सरकार की जिम्मेदारी नहीं थी वह किसानों का नाम खोजती और उन्हें मदद करती लेकिन उसने संवेदनशील बनकर किसानों की मदद की है।

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