लक्ष्मीप्रताप का सवाल: ज़मानत न देने का आधार ह्वाटसप चैट ही है तो जेल सिर्फ आर्यन को ही क्यों अर्णब गोस्वामी क्यों नहीं?

आर्यन खान के मामले में कोर्ट ने उसकी जमानत याचिका ख़ारिज करते हुए कहा की उसकी व्हाट्सप्प चैट से सिद्ध होता है की… रुकिए! क्या सिद्ध होता है ये बाद में बात करेंगे पहले ये बात करते हैँ की ह्वाटसप चैट कोर्ट में कुछ भी सिद्ध कर सकती है क्या?

अर्नब गोस्वामी की ह्वाटसप चैट में बालाकोट स्ट्राइक से ठीक तीन दिन पहले कहा गया की “कुछ बड़ा होने वाला है” उसे स्ट्राइक की पहले से जानकारी थी. लेकिन कोर्ट ने इसे नहीं माना, जबकि ये देशद्रोह की श्रेणी का अपराध था. अर्नब की चैट में पुलवामा हमले का मजाक बनाया गया, यूपी के मुख्यमंत्री का मज़ाक उड़ाया गया। इन सब में संगीन धाराओं में मुकदमा और जेल होनी चाहिए थी लेकिन कोर्ट और पुलिस ने ह्वाटसप चैट को ही किसी प्रकार का साक्ष्य नहीं माना।

क्या कहता है सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सीधा कहा की सोशल मीडिया, ह्वाटसप चैट को कोर्ट में साक्ष्य के तौर पे आधार नहीं बनाया जा सकता क्योंकि इसमें कुछ भी लिखा और मिटाया जा सकता है। इसका एक कारण यह भी है की ह्वाटसप एक बिजनेस है और इसका मालिक फेसबुक है, इसकी सारी चैट दोनों व्यक्तियोँ के आलावा ह्वाटसप सर्वर में भी रहती हैं. सर्वर यानी एक प्राइवेट संस्था द्वारा इसके साथ छेड़छाड़ या मिटाये जाने के पूरे अधिकार है और ऐसी चीज को कोर्ट या न्याय व्यवस्था साक्ष्य के तौर पे स्वीकार नहीं कर सकती।

तब एक देश में दो क़ानून क्यों

ऊपर बताये गए तथ्यों के बावजूद आर्यन खान मामले में उसकी ह्वाटसप चैट को आधार बनाया जा रहा है जबकि उसके पास से ड्रग्स बरामद नहीं हुए है। ध्यान रहे, भाजपा नेता प्रमोद महाजन का बेटा राहुल महाजन जब कोकीन ओवरडोज होने पर बेहोशी की हालत में दिल्ली में पकड़ा गया तब चार दिन अरेस्ट नहीं हुआ था। और बाद में भी उसे जबरिया ड्रग परेडलर बनाने की कोशिश नहीं की गयी थी। उस समय तो अटल बिहारी वाजपेयी ने आकर कहा था की “जवानी में ऐसी गलतियां हो जाती हैँ”।

क्यों हो रहा है खेल

ये सारा खेल मात्र अडानी के मुंद्रा पोर्ट पर पकड़ी गयी 21,000 करोड़ की हेरोइन के मामले को दबाने के लिए खेला जा रहा है। क्योंकि इतनी बड़ी रकम के माल की जांच होने पे अडानी समेत केंद्रीय सत्ताधारी दल के बड़े नेता शामिल होंगे इसकी पूरी आशंका है। अभी कई परते खुलनी बाकी हैं।

(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं, ये उनके निजी विचार हैं)

Lakshmi Pratap Singh

लक्ष्मी प्रताप सिंह स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं, वे आर्थिक मामलों और जियो पॉलिटिक्स के साथ-साथ भारतीय राजनीतिक की भी अच्छी समझ रखते हैं।

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