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यूपी में जमातियों के लिये क़ैदखाना बन चुके हैं क्वॉरेंटाइन सेंटर

वसीम अकरम त्यागी

चैनल अभी भी विपक्ष पर निशाना साधने में लगे हुए हैं. वे उस रास्ते से बिल्कुल भी नहीं भटके जिस रास्ते पर पिछले छ साल से चलते आ रहे थे। मार्च के आख़िर और अप्रैल के शुरुआती हफ्ते में तब्लीग़ी जमात का मरकज़ मीडिया चैनलों के लिये कोरोना का मरकज़ बना हुआ था। कोरोना जैसी महामारी को एक तब्लीग़ी जमात के बहाने मुसलमानों से जोड़ने में कोई कमी नहीं छोड़ी गई। जमातियों के बारे में ऐसा प्रोपेपेंडा फैलाया गया मानो जमाती होना इस बात की दलील माना जाने लगा कि भारत में कोरोना जमातियों द्वारा फैलाया गया. इस पर सरकार ने भी तुरंत एक्शन लिया, जमातियों के लिये अलग से शासनादेश जारी हुए. लेकिन सरकार की तमाम नाकामियों का ठीकरा जमात के सर फोड़ने में मीडिया और सरकार दोनों ही सफल हो गए। इसके बाद जिस इलाक़े में भी जमाती मिले उन्हें क्वॉरेंटाइ कर दिया गया. उत्तर प्रदेश में हजारों की संख्या में अभी भी ऐसे जमात मौजूद हैं जो पचास दिन से भी अधिक समय से क्वॉरेंटाइन सेंटर में हैं. लेकिन पूरी तरह स्वस्थय होने के बावजूद इन्हें रिलीज नहीं किया गया।

उत्तर प्रदेश के अमरोहा से बसपा सांसद कुंवर दानिश अली ने इस बाबत सूबे के मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिखकर जमातियों को रिलीज किये जाने की मांग की थी। उनकी चिट्ठी पर तत्काल संज्ञान नहीं लिया गया, दो दिन बाद अमरोहा क्वॉरेंटाइन सेंटर में अम्बेडकरनगर निवासी हफ़ीज़ुल्लाह की हार्ट अटैक से मौत हो गई। इसके बाद 21 मई को अमरोहा में क्वॉरेंटाइन किये गये जमातियों को रिलीज कर दिया गया। लेकिन अमरोहा के अलावा प्रदेश के दूसरे राज्य में अभी भी जमाती क्वॉरेंटाइन सेंटर में रह रहे हैं। ये जमाती देश के अलग अलग राज्यों से जमात में आए थे, लेकिन लॉकडाउन की वजह से फंस गए. इसके बाद शुरु हुए मीडिया के प्रोपेगेंडा ने इन्हें अपराधी बनाने में कोई कमी नहीं छोड़ी. स्वास्थय विभाग के मुताबिक़ कोरोना संक्रिमत अथवा ऐसा शख्स जो कोरोना संदिग्ध है 14 दिन क्वॉरेंटाइन किये जाने की समय सीमा निर्धारित की गई है. लेकिन इसके बावजूद यूपी के कई शहरो में अभी 50 दिन से भी अधिक से जमातियों को क्वॉरेंटाइन सेंटर में रखा हुआ है।

उत्तर प्रदेश के मेरठ, बुलंदशहर, सम्भल, मुरादाबाद, सहारनपुर, बाग़पत, गोंडा मऊ जैसे शहरों में ऐसे जमाती मौजूद हैं जो अपने जमाती होने की सजा काट रहे हैं। मऊ जनपद में मुंबई के जमाती 50 दिन से भी अधिक से क्वॉरेंटाइन सेंटर में रह रहे हैं. शुरुआत में मऊ जिला प्रशासन द्वारा 14 दिनों के लिए क्वॉरेंटाइन किया गया था। प्रशासन का कहना था कि 14 दिनों के क्वॉरेंटाइन के बाद उन्हें छोड़ दिया जायेगा. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. प्रशासन द्वारा फिर कहा गया की सरकार की तरफ से 28 दिन क्वॉरेंटाइन किये जाने का आदेश है. लेकिन देखते देखते 50 दिन गुजर गए लेकिन अभी तक इन जमातियों को रिलीज नहीं किया गया है।

28 दिन की अवधी बीत जाने के बाद प्रशासन का कहना था कि इन जमातियों की टेस्ट रिपोर्ट आनी बाकी है जिसके बाद उन्हें रिलीज कर दिया जाएगा. अब जब उनकी टेस्ट रिपोर्ट भी आ चुकी है तो अब प्रशासन कह रहा है की उनकी मुंबई से वेरिफिकेशन रिपोर्ट आनी बाकी है. अब तक उन तबलीगी जमात के 13 लोगों को क्वारंटाइन किये जाने का आज 52 वां दिन है. इतने दिन तक क्वॉरेंटान रहने के कारण इन जमातियों में एक जमाती की मानसिक स्थिति अब बिगड़ने लगी है. तो कल जमाती ने तो हताश होकर अपने कपडे तक फाड़ लिए थे. सवाल है कि अगर ऐसे में कोई व्यक्ति हताशा और निराशा में उस से भी बड़ा कोई गलत कदम उठा ले तो कौन ज़िम्मेदार होगा? ऐसी घटना पहले भी हुई हैं, जब जमात से लौटे एक शख्स ने कोरोना फैलाने के तानों से तंग आकर आत्महत्या कर ली थी।

मऊ के पूर्व चेयरमैन अरशद जमाल क्वॉरेंटाइन किये गए लोगों को रिलीज करने की मांग कर रहे हैं। उनके मुताबिक़ इन जमातियों को बिना किसी कारण के बंद कर रखा गया है। उनमें से कई लोगो की तनाव के कारण मानसिक स्थिति ठीक नही है। अब ईद को लेकर सभी लोग बहुत परेशान है।

सवाल यह है कि आख़िर ये लोग किस जुर्म की सजा पा रहे हैं? यूपी में बनाए गए क्वॉरेंटाइन सेंटर की हालत कैसी है यह किसी को बताने की जरूरत नही है। जब ये लोग पूरी तरह स्वस्थय हैं तो उन्हें उनके घरों को क्यों नहीं भेजा जा रहा है? आख़िर वे कौनसे कारण हैं जिनकी वजह से इन लोगों को अभी तक इनके घर वालों से दूर क़ैदी बनाया हुआ है? सरकार को इस ओर संज्ञान लेना चाहिए और जो लोग स्वस्थय हैं, और उन्हें उनके घरों को भेजना चाहिए.

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