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गोदी मीडिया का प्रोपगेंडा, आईटी सेल की करतूत और राहुल गांधी की राजनीति

Sanjaya Kumar Singh
संजय कुमार सिंह

मैं सुशील मोदी जैसे लोगों को फॉलो नहीं करता। इसलिए ऐसे मूर्खतापूर्ण सवालों का सामना नहीं करना पड़ता है। राहुल गांधी का नहीं पता। आज देश में जो हालत है उसके लिए मैं मुख्य रूप से मीडिया को दोषी मानता हूं क्योंकि यह आम जनता को भाजपा और भाजपा नेताओं की सच्चाई नहीं बताता है। सुशील मोदी जैसे भाजपा नेता और चाहे जो हों, अपना भला भी नहीं कर सकते, अपने लिए नहीं लड़ सकते बाकी के लिए क्या करेंगे, राम जानें। तमाम बाहरी लोगों को पार्टी में शामिल किया जा रहा है, पद दिए जा रहे हैं पर उप मुख्यमंत्री रहे सुशील मोदी के घर में पानी भर गया, रेस्कू कराना पड़ा। और तो और पुल पर परिवार समेत खड़ा कर दिया गया, दुनिया देखी पर मुख्यमंत्री बनाना तो दूर बिहार बाहर कर दिया गया है। ये सब उनका और पार्टी का मामला है। पर वे राहुल गांधी से शिक्षा मंत्रियों के बारे में पूछ रहे हों तो उन्हें उनकी पार्टी की शिक्षा मंत्री के बारे में बता दूं।

स्मृति ईरानी का एक बयान है जो बताता है कि वे शिक्षा मंत्री रहते हुए नहीं जानती थीं कि डिग्री क्या होती है। उन्होंने जिसे डिग्री कहा वह स्मृति ईरानी के विकीपीडिया पेज पर येल विश्वविद्यालय डिग्री विवाद शीर्षक के तहत लिखा है (अंग्रेजी से अनुवाद) – “भारत के मानव संसाधन विकास मंत्री के रूप में 2014 के इंडिया टुडे समिट में ईरानी ने कहा, ‘मेरे पास येल की भी डिग्री है, उसे लाकर मैं दिखा सकती हूं कि येल ने कैसे नेतृत्व की मेरी क्षमता का सम्मान किया। सुश्री ईरानी जिस डिग्री की बात कर रही थीं वह येल फैकल्टी का एक प्रमाणपत्र निकला जो विश्वविद्यालय के छह दिन के प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए था।“ सुश्री ईरानी जिसे डिग्री कह रही थीं वह क्या है इसे बताने के लिए विकीपीडिया पर ही एनडीटीवी की खबर का लिंक है (कमेंट बॉक्स देखें) जिसका शीर्षक है, भारतीय सांसदों की टीम ने येल विश्वविद्यालय में क्रैश कोर्स किया। और स्मृति ईरानी शायद राज्यसभा की सदस्य थीं। लोकसभा की सीट तो इस बार जीत पाई हैं।

इस खबर से भी साफ है कि इसमें शामिल होने वाला बाद में मिले सर्टिफिकेट को डिग्री समझे या कहे तो अर्थ यही होगा कि वह डिग्री का मतलब नहीं जानता है। बेशक इसका मतलब यह नहीं है कि उसके पास डिग्री भी नहीं है। ऐसी पार्टी और ऐसे पार्टी के नेता राहुल गांधी से पूछ रहे हैं कि राहुल गांधी के जन्म से कई साल पहले उनके पिता के नाना ने मुसलमानों को (एक ही समुदाय लिखा है और वह भी गलत है फिर भी) शिक्षा मंत्री क्यों बनाया। कायदे से शिक्षा मंत्री के लिए शिक्षित होना जरूरी है। पर जो सरकार 2014 में गैर डिग्री धारी को शिक्षा मंत्री बना सकती है उसी सरकार के समर्थक 2021 में हिन्दू मुसलमान करें तो आप समझ सकते हैं कि देश की राजनीति का स्तर क्या है। और मामला इतना ही नहीं है। भाजपा ने कांग्रेसी (और मुसलमान भी) आरिफ मोहम्मद खान को गवरनर बना दिया। गुलाम नबी आजाद का मामला सामने है। धर्म विशेष के कांग्रेसी  शित्रामंत्रियों में एक की नातिन नज्मा हेपतुल्ला बहुत पहले भाजपा में शामिल हो गई थीं। जानते हैं कहां हैं? मणिपुर में मिलेंगी।

पूर्व तड़ीपार को गृहमंत्री बनाने वाली पार्टी (और एक गृह राज्य मंत्री पर बलात्कार का आरोप लगा था सो अलग) के लोग राहुल गांधी के बारे में कहते हैं कि वे जमानत पर हैं। यह दिलचस्प है कि अपराधियों के चुनाव नहीं लड़ने का कानून राहुल गांधी की ही बदौलत है पर उसमें भी राहुल गांधी अध्यादेश फाड़ने के दोषी ठहराए जाते हैं। कानून बनवाने का श्रेय किसी को नहीं दिया जाता। वैसे भी राहुल गांधी अगर जमानत पर हैं तो उनपर किसी जज की हत्या करवाने का आरोप नहीं है। यही नहीं, बेदाग होने का दावा करने वालों ने क्लीन चिट देने वालों को क्या ईनाम दिए हैं उसकी लंबी फेहरिस्त है। और क्लीन चिट कैसे मिली उसकी भी दिलचस्प कहानियां हैं पर आरोप हैं कि लगा ही दिए जाते हैं। और सब कुछ पूरी तरह नियंत्रित चलता है। मीडिया में वही होता है जो प्रचारक चाहते हैं।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं, ये उनके निजी विचार हैं)