इंसानियत की मिसाल

बेबसी की तस्वीरः अमृत ने दुनिया छोड़ दी, सरकार ने इंसानियत छोड़ दी लेकिन याकूब ने इंसानियत बचा ली

कृष्णकांत

उन दोनों की उम्र 23 साल की थी. एक का नाम था अमृत कुमार, दूसरे का नाम था मोहम्मद याक़ूब. दोनों सूरत की टैक्सटाइल फैक्ट्री में काम करते थे. वे उत्तर प्रदेश में बस्ती जिले के एक ही गांव के थे. दोनों एक ही कमरे में रहते थे. वे साथ में ही घर के लिए निकले थे. याक़ूब अपने घर का अकेला कमाने वाला था, उसने 10,000 रुपये कमाए थे और अपने घर भेज चुका था. घर जाना हुआ तो पैसा खत्म था. अमृत ने ही ट्रक ड्राइवर से बात की और याक़ूब के घर जाने का किराया भी उसी ने दिया था.

वे सूरत से चले थे, तभी से अमृत को बुखार था. साथ में पैरासीटामॉल ले ली थी. जब मध्य प्रदेश पहुंचे तो अमृत की ​तबियत बिगड़ने लगी. याक़ूब ने ट्रक में सवार बाकी लोगों से कहा कि इसे अस्पताल ले जाना पड़ेगा. लेकिन ट्रक ड्राइवर और अन्य सवारियों ने रुकने से इनकार कर दिया. शिवपुरी में याक़ूब और अमृत उतर गए. ड्राइवर ने याक़ूब से कहा कि उसका सामान दे दो और आओ अपनी जगह पर बैठो. याक़ूब ने कहा, “मैं नहीं आने वाला. तुम लोगों को जाना है तो जाओ. ऐसी हालत में छोड़ के कैसे जा सकता हूं.”

याक़ूब ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “मुझे डर नहीं लगा. बस यही लग रहा था कि ये जल्दी ठीक हो जाए और घर पहुंच जाएं सही सलामत. हम दोनों के मम्मी पापा इंतजार कर रहे थे. मैंने सोचा कि जब तक इलाज नहीं होता, मैं यहीं रहूंगा.” ट्रक से उतर कर अमृत जमीन पर लेट गया. याक़ूब ने अपनी गोद में उसका सिर रख लिया था और रुमाल भिगोकर उसके माथे पर रख दी थी ताकि तापमान कम हो सके. उनके पास आधा बोतल पानी था. एंबुलेंस आई और अमृत को अस्पताल ले गई.

अस्पताल ले जाने तक अमृत बोल नहीं पा रहा था. कम्युनिटी हेल्थ सेंटर में डॉ ने कहा, “उसका शुगर कम हो गया था. मैंने ओआरएस दिया. तापमान काफी बढ़ा हुआ था. मुझे लगा कि उसे हीट स्ट्रोक आया है. उसे बुखार था.” अमृत को शिवपुरी जिला अस्पताल भेजा गया. डॉक्टर ने पाया कि उसे गंभीर किस्म का डिहाइड्रेशन था. उसके फेफड़े तो पूरी तरह ठीक थे. अमृत को वेंटीलेटर पर रखा गया था, लेकिन शुक्रवार रात को उसकी मौत हो गई. उसका सैंपल जांच के लिए भेजा गया है और याक़ूब सहित डॉक्टरों को कोरंटाइन कर दिया गया.

अमृत और याक़ूब को आपस में लड़ाने वाले वॉट्सएप विष विद्यालय के संस्थापक लोग गायब हैं. अमृत और याक़ूब आपस में मिलजुल कर निपट रहे हैं. ​कोई खुशनसीब है कि जान बचाए अपने घर पहुंच जा रहा है, कोई बदनसीब कभी नहीं पहुंचेगा. याक़ूब अगर घर पहुंचा तो अमृत की मां उससे पूछेगी कि ‘हे भैया, हमरे अमरित को कहां छोड़ आए?’

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