चर्चा में देश

दुनिया के ग़रीब से ग़रीब देश भारत को मदद भेज रहे हैं, लेकिन हमारे प्रधानमंत्री 20 हज़ार करोड़ का महल बनवा रहे हैं

कृष्णकांत

कांगो और रवांडा जैसे देश हमारी जान बचाने के लिए मदद भेज रहे हैं और हमारे प्रधानमंत्री अपने लिए 20 हजार करोड़ का हवा महल बनवा रहे हैं। इस सरकार ने देश को पाकिस्तान, कांगो और  रवांडा से भी पीछे धकेल दिया है। भारत की ऐसी छवि तो तब भी नहीं बनी थी जब हम तीसरी दुनिया के गरीब देशों में गिने जाते थे।

शिवसेना ने एकदम सही कहा है कि “देश अभी नेहरू-गांधी के बनाए सिस्टम की वजह से सर्वाइव कर रहा है। कई गरीब देश भारत की मदद कर रहे हैं। पहले पाकिस्तान, रवांडा और कॉन्गो दूसरों से मदद लेते थे। लेकिन भारत के मौजूदा शासकों की गलत नीतियों की वजह से देश इस स्थिति से गुजर रहा है। छोटे पड़ोसी देश महामारी से निपटने में भारत को मदद दे रहे हैं, वहीं मोदी सरकार दिल्ली में कई करोड़ के सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का काम रोकने के लिए तैयार नहीं है। नेपाल, म्यांमार और श्रीलंका जैसे देश आत्मनिर्भर भारत को मदद की पेशकश कर रहे हैं।”

इंटरनेशनल मेडिकल जर्नल द लैंसेट ने लिखा है कि मोदी सरकार को अपनी गलतियां स्वीकार करते हुए जिम्मेदार नेतृत्व प्रदान करना चाहिए। खतरे के बारे में आगाह करने पर सुपरस्प्रेडर एवेंट हुए। अब जब तबाही मची है तो सरकार इसे रोकने के प्रयास करने की जगह फेसबुक और ट्विटर पर अपनी आलोचना करने वालों पर शिकंजा कसने में जुटी है।

दुनिया के सभी बड़े मीडिया संस्थान कोरोना की दूसरी लहर में मची तबाही के लिए भारत में ‘अक्षम सरकार’ और लुंजपुंज नेतृत्व को जिम्मेदार मान रहे हैं जिसने महामारी के समय चुनावी रैलियां कीं, कुंभ आयोजित किया और लोगों के बेपरवाह होने में अहम भूमिका निभाई। जब देश को कोरोना से निपटने की तैयारी करनी थी, तब भारत के प्रधानमंत्री झूठ का कारोबार करने में व्यस्त थे। अब जब मामला हाथ से निकल गया है तो सरकार अपनी छवि चमकाने में व्यस्त है।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) स्वास्थ्य मंत्रालय से गुजारिश कर रहा है कि ‘सरकार अब तो जाग जाओ’। एसोसिएशन कोरोना संकट पर केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए कह रहा है कि वह स्वास्थ्य मंत्रालय की ‘सुस्ती’ देखकर हैरान है। IMA ने कहा है, “महामारी की दूसरी वेव की वजह से पैदा हुए संकट से निपटने में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की सुस्ती और अनुचित कार्रवाई देखकर हम हैरान हैं।।।सामूहिक चेतना, सक्रिय संज्ञान और IMA समेत दूसरे समझदार साथियों के निवेदन को कूड़ेदान में डालकर और बिना जमीनी हालात समझे फैसले लिए जाते हैं।”

एसोसिएशन का कहना है कि “सरकार झूठ बोलना बंद करे। आंकड़ों में पारदर्शिता लाए। कोविड मौतों को गैर-कोविड मौतें बताना बंद करे। देश में ऑक्सीजन का प्रोडक्शन पर्याप्त है, लेकिन दिक्कत उसके डिस्ट्रीब्यूशन में है।” झूठ के रेत के सहारे नए भारत बनाने की प्रचार-पिपासा ने देश को ऐसे संकट में धकेल दिया है जहां कितने लाख मारे जाएंगे, किसी को अंदाजा तक नहीं है।

(लेखक युवा पत्रकार एंव कथाकार हैं, ये उनके निजी विचार हैं।)