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दिल्ली पुलिस को एक और झटका, ताहिर हुसैन के भाई समेत तीन आरोपित आरोप मुक्त

फरवरी 2020 में नाॅर्थ ईस्ट दिल्ली दंगे में दयालपुर इलाके में खोखा व दुकान जलाने के दो मामलों में गुरुवार को कड़कड़डूमा स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव के कोर्ट ने तीन आरोपितों को सबूतों के अभाव में आरोप मुक्त कर दिया। आरोप मुक्त होने वाले में से एक दंगे के मुख्य आरोपित ताहिर हुसैन का भाई है। अदालत ने आदेश में कहा कि जब इतिहास विभाजन के बाद के दिल्ली के सबसे भीषण सांप्रदायिक दंगे को देखेगा, तो नवीनतम वैज्ञानिक तरीकों के बावजूद उचित जांच करने में पुलिस की विफलता निश्चित रूप से लोकतंत्र के प्रहरी को पीड़ा देगी।

बता दें कि वर्ष 2020 में 24 फरवरी को दंगाइयों ने भजनपुरा गली नंबर-15 में रहने वाले ओम सिंह के खजूरी खास करावल नगर रोड E-पांच स्थित पान के खोखे को जला दिया था। इस घटना के अगले दिन दंगाइयों ने चांद बाग क्षेत्र में मुख्य वजीराबाद रोड पर हरप्रीत सिंह की दुकान आनंद टिंबर फर्नीचर में लूटपाट के बाद आग लगा दी थी। दयालपुर थाने में दर्ज अलग-अलग मुकदमों में दिल्ली पुलिस ने दिल्ली दंगे के मुख्य आरोपित ताहिर हुसैन के भाई शाह आलम के अलावा राशिद सैफी और शादाब को आरोपी बनाया गया था। दोनों ही मामलों में एक-एक कांस्टेबल की गवाही दिलवाई गई।

क्या दी गई दलील

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव के कोर्ट में बचाव पक्ष के वकील दिनेश तिवारी ने कहा कि उनके मुवक्किलों के पास से कोई हथियार नहीं मिला है, न ही उनकी उपस्थिति को दर्शाता वीडियो फुटेज अब तक पेश किया गया। साथ ही कहा कि इन मामलों में केवल एक-एक गवाह है, वो भी पुलिस वाले। कोई सार्वजनिक गवाह नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस कांस्टेबलों ने झूठी गवाही दी है, वह घटनास्थल पर नहीं थे। वह मौके पर होते तो पुलिस कंट्रोल रूम को काल कर सूचना देते, लेकिन इसका कोई रिकार्ड पुलिस के पास नहीं है।

दिनेश तिवारी ने अपनी दलील पेश करते हुए कहा कि घटनास्थलों पर कांस्टेबलों की रवानगी और आमद का कोई रिकार्ड नहीं है। उन्होंने मुवक्किलों की गिरफ्तारी को लेकर भी सवाल खड़ा किया। दिनेश तिवारी ने कोर्ट को बताया कि तीनों की गिरफ्तारी नौ मार्च 2020 को खजूरी खास थाने में दर्ज FIR संख्या 101 में कर ली गई थी। उसके बाद पुलिस ने इन दोनों मामलों में उनके मुवक्किलों को झूठा फंसा कर अप्रैल में इन मामलों में तीनों की गिरफ्तारी दिखाई।

अभियोजन पक्ष की तरफ से वरिष्ठ लोक अभियोजक अमित प्रसाद ने कहा कि कांस्टेबल घटना के वक्त मौके पर मौजूद थे, उन्होंने आरोपितों की पहचान की है। CCTV कैमरों की फुटेज को लेकर उन्होंने तर्क दिया कि दंगाइयों ने उस क्षेत्र में काफी संख्या में कैमरे तोड़ दिए थे। दोनों तरफ की दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने बचाव पक्ष के तर्कों को मानते हुए सुबूतों के अभाव में दोनों मामलों में तीनों आरोपितों को आरोप मुक्त कर दिया। जानकारी के लिए बता दें कि आरोप मुक्त हुए तीनों आरोपित इस वक्त जमानत पर बाहर हैं। हालांकि शाह आलम अभी नौ मामलों में आरोपित है, जबकि राशिद और शादाब पर सात-सात चल रहे हैं।

इन धाराओं में दर्ज थे मुकदमें

147 (दंगा करने), 148 (घातक हथियार इस्तेमाल करने), 149 (गैर कानूनी समूह में समान मंशा से अपराध करने), 188 (सरकारी आदेश का उल्लंघन करने), 380 (चोरी करने), 427 (पचास रुपये से अधिक की हानि करने) और 436 (संपत्ति या उपासना स्थल को आग लगाने), 454 (छिप कर गृह भेदन करना)

Ashraf Hussain
Ashraf Hussain is an independent Journalist who reports on Hate crimes against minorities in India. He is also a freelance contributer for digital media, apart of this, he is a social media Activist, Content Writer and contributing as Fact Finder for different news website too.
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