चर्चा में देश

सुदर्शन टीवी का कोई एक प्रोग्राम ही नहीं बल्कि पूरा चैनल ही एक समुदाय को टारगेट करने के लिए बनाया गया है

श्याम सिंह

सुप्रीम कोर्ट ने सुदर्शन टीवी के “UPSC Jihad” प्रोग्राम पर रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस प्रोग्राम में किसी भी तरह की “खोजी पत्रकारिता” जैसा कुछ भी नहीं है, ये सिर्फ एक खास समुदाय को टारगेट करने के लिए दुर्भावना से बनाया एक प्रोग्राम है। जिसकी अनुमति पत्रकारिता के नाम पर किसी को भी नहीं दी जा सकती, आगे इस शो पर इस नाम से या किसी दूसरे बदले हुए नाम से प्रसारित करने पर रोक लगाई जाती है।”

इससे पहले इस प्रोग्राम के 4 शो 11,12,13,14 तारीख को पब्लिश हो चुके हैं जो 20 तारीख तक चलने थे। अदालत ने बाकी के सभी शो पर रोक लगा दी है। अब सवाल ये उठता है कि क्या केवल रोक लगाने से सुदर्शन टीवी का अपराध कम हो जाता है? संविधान के आर्टिकल 19 में लिखा हुआ है कि देश की एकता अखंडता को तोड़ने वाले स्पीच पर युक्तियुक्त प्रतिबंध लगाया जा सकता है। फिर सुदर्शन टीवी जैसे चैनल का प्रसारण एक पंथनिरपेक्ष देश में कैसे हो सकता है? इस देश को खतरा ऐसे दंगाइयों से है जो इस देश की नस्ल की नस्ल खराब कर रहे हैं, जो दो बड़े समुदायों में घृणा फैला रहे हैं।

सुदर्शन टीवी का कोई एक प्रोग्राम ही नहीं बल्कि पूरा चैनल एक समुदाय को टारगेट करने के लिए बनाया गया है, उस चैनल का केवल एक प्रोग्राम ही नहीं बल्कि उस एंकर का एक एक वाक्य, एक एक शब्द आपत्तिजनक है। उस पूरे चैनल पर प्रतिबंध लगना चाहिए। अगर इस देश में संविधान बचा रहेगा तो अदालतें भी बचीं रहेंगी, जज साहब भी बचे रहेंगे। अन्यथा ऐसे दंगाई एक दिन अदालतों की छतों पर चढ़कर नाचेंगे। जो इनके नेता के नारे गाएंगे बच जाएंगे, जो इनके नेता के नारे नहीं गाएंगे, मारे जाएंगे। मुसलमानों को आतंकवादी कहकर मार दिया जाएगा, हिंदुओं को वामपंथी और अर्बन नक्सली का नाम देकर मार दिया जाएगा।

सुदर्शन चैनल पर कानूनी कार्यवाई करते हुए उसके एंकर को सजा दी जानी चाहिए, और पूरे देश में संदेश देना चाहिए ताकि इस बात को दोबारा से स्थापित किया जा सके कि हिंदुस्तान में अब भी संविधान का शासन है, अन्यथा ऐसे चैनलों में इस सुंदर से देश को गृहयुद्ध में डालने की पूरी तैयारी कर रखी है, ये देश नफरत और घृणा के बारूद पर रखा हुआ है, ये अभी नहीं रोका गया तो बहुत देर हो चुकी होगी… जहां से लौटना एक सपना भर रह जाएगा।

(लेखक युवा पत्रकार हैं, ये उनके निजी विचार हैं)

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