क्यों याद किए जा रहे हैं पुरानी दिल्ली के पुस्तक विक्रेता निज़ामउद्दीन

रवि चौधरी

कभी दिल्ली की जामा मस्जिद के पास से गुज़रेंगे, तो उर्दू बाज़ार के पास आपको एक उर्दू की मशहूर किताब की दुकान दिखेगी, Kutub Khana Anjuman-e-Taraqqi-e-Urdu, मै कभी उस दुकान में गया नही था, पर आतिश ए चिनार नामी किताब ढूँढते हुवे 30 अक्तूबर 2021 को वहाँ पहुँचा। किताब का नाम लेते ही दुकान मालिक ने कहा के शेख़ अब्दुल्ला की ये किताब दिल्ली में कहीं नही मिलेगी, मैने कहा कोई उपाय, उन्होंने कहा नही मिल पाएगा। इसी बीच एक साहब ने मुझसे कहा के हज़रत निज़ामउद्दीन की जानिब एक पुरानी दुकान है वहाँ शायद मिल जाएगा, इस पर दुकानदार ने फिर कहा के नही मिलेगा, चालीस साल से मै इस जगह बैठ रहा आज तक तो मुझे नही मिला। ये कोई 60-70 सेकंड की गुफ़्तगू रही होगी।

लेकिन उनकी बात से एहसास हो गया था के काफ़ी गहरे आदमी हैं, हमारे साथी जिन्हें कुछ रेयर किताब चाहिए था, उन्होंने उनसे बात शुरू की। चूँकि मै साथ था, मैं उनकी बात सुन रहा था, जो रेफ़्रेंस उन्होंने दिया, और जिस जिस किताब का नाम उन्होंने बताया वो नायाब था। बैठे बैठे उन्होंने दर्जनो किताब का नाम लिया वो सामने आ गई। वो Bibliography की तरह काम कर रहे थे। मैने कुछ विडीओ शॉट लिए, फिर तरह तरह की बात हुई। उन्होंने पुरानी दिल्ली के बारे में बताना शुरू किया। आस पास की पुरानी इमारत के बारे में, पुराने लोगों के बारे में, मै भी कुछ कुछ चीज़ बोल कर उनको टॉपिक दे देता।

जब मैने उनसे उनके दुकान के बारे में पूछा, तब वो अपने दुकान के बारे में बताने लगे, के यहाँ पर रोज़ मौलाना इमदाद साबरी आ कर बैठा करते थे, यहाँ पर नेहरू आए हैं, जोश मलीहाबादी, मौलाना आज़ाद आते थे। और भी अपने वालिद साहब से रिलेटेड चीज़ उन्होंने बातों बातों में बताया।

मैने उनसे कहा के मुझे आप बाइट लेनी है, आपको जानकारी है, हमारे काम आएगा। वो इनकार करते गए। फिर जबहमने और हमारे साथी ने काम के बारे में बताया तो वो हामी भर गये। पर वक़्त की कमी की वजह कर उनसे मज़ीद बात चीत नही हो सकी। उनसे हमलोगों ने कई दर्जन किताब ख़रीदी। कुछ रेयर किताब के लिए उन्होंने कुछ वक़्त माँगा, के मिलते ही कॉल कर बताऊँगा। हम लोग चले आए। पर हम लोगों ने एक चीज़ ग़ौर किया था के उनके पैर में तकलीफ़ थी, पट्टी लगा हुआ था। उन्होंने बताया के वो डायबेटिक हैं, और ये ज़ख़्म काफ़ी दिनों से है और ठीक नही हो रहा।

आज ख़बर मिली के उनका इंतक़ाल हो गया, उनका नाम निज़ामउद्दीन था, चलते फिरते encyclopedia जिन्हें हिस्ट्री और उर्दू की बहुत जानकारी थी। मैने उनसे पहली मुलाक़ात के वक़्त एक छोटा सा विडीओ बनाया था, जो डिलीट हो गया है, जिसका मुझे आज बहुत मलाल है।

إِنَّا ِلِلَّٰهِ وَإِنَّا إِلَيْهِ رَاجِعُونَ

प्रस्तुती:- मोहम्मद उमर अशरफ

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