न शमी देशद्रोही है न चेतन शर्मा, अगर ऐसा है तो फिर हर हारे हुए मैच में कोई न कोई देशद्रोही निकल जाएगा।

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सुशील महापात्रा

पाकिस्तान के खिलाफ मैच हारने के बाद मोहम्मद शमी को देशद्रोही कहने वाले न तो देशप्रेमी हैं न क्रिकेट प्रेमी।यह लोग सेल्फ प्रेमी हैं मतलब खुद  से प्रेम करने वाले हैं जिनका समाज और देश से कोई प्रेम नहीं है कोई लेना देना नहीं है।  इनकी प्रेम कहानी हिन्दू मुस्लिम राजनीति से शुरू होती है और समाज में दरार के साथ खत्म होती है।मोहम्मद शमी को ट्रोल करने वालों को याद रखना चाहिए कि शमी भारत के लिए 54 टेस्ट और 79 एकदिवसीय मैच खेल चुके हैं। कई मैचों में शमी की  प्रदर्शन के  वजह से भारत ने जीत हासिल की है। जिस पाकिस्तान के खिलाफ ख़राब खेलने के वजह से शमी को ट्रोल किया जा रहा है उसी पाकिस्तान के खिलाफ शमी पहले कई बार अच्छा प्रद्रशन कर चुके हैं।

पाकिस्तान के खिलाफ सम्मी कोई टेस्ट मैच तो नहीं खेले  है लेकिन ODI में पाकिस्तान के खिलाफ शमी ने  तीन मैच खेली है और तीनों में अच्छा प्रदर्शन किया है। 2015 में शमी ने पाकिस्तान के खिलाफ आखिरी एकदिवसीय मैच खेला था और इस मैच में शमी ने 9 ओवर में सिर्फ 35 रन देकर 4 विकेट लिए थे। शमी के शानदार गेंदबाजी के वजह से भारत ने इस मैच को 76 रन से जीता था। यूनुस खान, शाहिद अफरीदी और पाकिस्तान कप्तान मिस्बाह उल हक जैसे शानदार खिलाड़ियों को शमी ने आउट किया था.

सबसे बड़ी बात है कि मिस्बाह उल हक इस मैच में सबसे ज्यादा 76 रन बनाए थे और शमी ने उनकी  विकेट लिया था। शमी की गेंदबाजी के लिए काफी तारीफ हुई थी लेकिन तारीफ करने वाले में वो सेल्फ प्रेमी नहीं होंगे जो आज शमी को ट्रोल कर रहे हैं। शमी के देशभक्ति पर सवाल उठा रहे हैं। असल में जैसे मैंने कहा यह लोग न तो क्रिकेट प्रेमी है न देश प्रेमी,इनका काम ही है एक समुदाय के लोगों को ट्रोल करना। देशप्रेम के नाम से देश में दरार पैदा करना।

क्या अज़हरुद्दीन को नहीं जानते

मोहम्मद शमी को ट्रोल करने वाले मोहम्मद अजहरुद्दीन को शायद नहीं जानते होंगे। अगर अजहरुद्दीन को जानते होते तो शमी की आलोचना नहीं करते। किसी खास धर्म के खिलाड़ियों को लेकर ट्रोल नहीं करते। महेंद्र सिंह धोनी के बाद मोहम्मद अजहरुद्दीन ही एकदिवसीय मैच में भारत के लिए सबसे ज्यादा मैचों में कप्तानी की किये हैं।। अजहरुद्दीन ने 174 मैच में कप्तानी की है जिस में से 90 मैच में भारत ने जीत हासिल की है। अजहरुद्दीन के कप्तानी में भारत ने शानदार प्रदर्शन किया है। अगर पाकिस्तान के खिलाफ अजहरुद्दीन की प्रदर्शन की बात की जाए तो अजहरुद्दीन अपने कैरियर में कुल 7 एकदिवसीय शतक लगाए हैं जिस में से 2 तो पाकिस्तान के खिलाफ है।  खिलाड़ी के रूप में अजहरुद्दीन सबसे ज्यादा 64 मैच पाकिस्तान के खिलाफ ही खेले हैं. । धोनी के बाद भारत के लिए सबसे ज्यादा एकदिवसीय मैच अजहरुद्दीन ही खेले हैं। अजहरुद्दीन भारत के लिए 334 एकदिवसीय मैच खेले हैं। धोनी 350 खेले हैं। किसी एक खास धर्म के खिलाड़ी को लेकर ट्रोल  करना एक आदत बन गया है। वही लोग ट्रोल कर रहे हैं जो क्रिकेट को नहीं समझते हैं, अगर क्रिकेट को समझते होते तो न शमी को ट्रोल करते न शर्मा को।

शर्मा मतलब चेतन शर्मा की बात कर रहा हूँ। शमी को ट्रोल करने वाले शायद नहीं जानते होंगे आज से करीब 35 साल पहले शारजाह के मैदान पर चेतन शर्मा ने ही भारत को हराया था वो भी पाकिस्तान के खिलाफ फाइनल मैच में। इस बार मोहम्मद शमी दुबई के मैदान पर खेल रहे थे तो 1986 में चेतन शर्मा शारजाह के मैदान पर खेल रहे थे। दुबई से शारजाह सिर्फ एक घंटे की रास्ता है। एशिया कप फाइनल था. । भारत और पाकिस्तान दोनों फाइनल में पहुंचे थे। भारत ने पहले बल्लेबाजी करने हुए 50 में 245 रन बनाया था। उस समय फाइनल मैच में 245 रन बहुत बड़ी स्क्रोर थी। पाकिस्तान टीम पूरी तरह दवाब में थी। 61 रन पर पाकिस्तान के तीन विकेट गिर चुके थे लेकिन जावेद मियांदाद ने भारत से मैच छीन लिया था। 241 रन पर पाकिस्तान के 9 विकेट गिर चुके थे। आखिरी गेंद पर पाकिस्तान को जीतने के लिए 4 रन चाहिए थे। स्ट्राइक पर जावेद मियांदाद थे। गेंदबाजी चेतन शर्मा कर रहे थे। मियांदाद ने आखिरी गेंद पर छक्का लगाकर पाकिस्तान को जीत दिलाई थी। भारतीय खिलाड़ियों को समझ नहीं आया कि क्या हुआ?  उस समय आखिरी गेंद पर छक्का मरना कोई छोटी बात नहीं थी वो भी फाइनल मैच में। मैच के बाद चेतन शर्मा मैदान के कुछ देर के लिए बैठते रहे। चेतन शर्मा खुद कई बार कह चुके हैं कि कप्तान कपिल देव उनसे इतने नाराज़ थे कि कई दिनों तक बात नहीं किये। फ्लाइट में देश वापस आते वक्त भी शर्मा से कोई भी  खिलाड़ी बात नहीं कर रहा था।

चेतन शर्मा की काफी आलोचना हुई थी जो नहीं होना चाहिए था । चेतन शर्मा इस एपिसोड पूरी तरह भूलना चाहते थे लेकिन लोग और मीडिया ने भूलने नहीं दिया। जब भी कोई इंटरव्यू करते थे तो यही सवाल पूछा जाता था कि वो आखिरी गेंद फुलटॉस क्यों डाले। लोग भी यही सवाल करते थे। ट्रैफिक लाइट पर भी लोग यही सवाल करते थे. चेतन शर्मा ने कई बार कह चुके हैं वो यॉर्कर डालना चाहते थे लेकिन वो फुलटॉस हो गया। चेतन शर्मा की कोई गलती नहीं थी। क्रिकेट में ऐसा होता है। कोई भी खिलाडी परफेक्ट नहीं है।  फाइनल मैच में दबाव रहना स्वाभाविक बात है। दबाव  में लाइन लेंथ में गड़बड़ी  हो जाती है।

लोगों को याद रखना चाहिए अगर चेतन शर्मा फुलटॉस डालकर मैच हराया था तो जोगिन्दर  शर्मा फुलटॉस डालकर 2007 T20 वर्ल्ड कप जिताया था वो भी पाकिस्तान के खिलाफ फाइनल मैच में, एक शर्मा हराया तो एक शर्मा जिताया था। दोनो ही हरियाणा के थे और दोनो ने ही फुलटॉस गेंद डाले थे। इसीलिए फुलटॉस के नाम पर किसी खिलाड़ी के खेल पर सवाल उठाना गलत बात है. क्रिकेट एक खेल है। खेल को खेल तरह देखना चाहिए। चाहे शर्मा हो शमी सब खिलाड़ी है और भारत के लिए खेल रहे हैं। किसी को भी इस तरह ट्रोल नहीं करना चाहिए। अगर हर मैच में खिलाड़ियों की देशप्रेमी पर सवाल उठेगा तो फिर हर हारे हुए मैच में कोई न कोई देशद्रोही निकल आएगा। इसीलिए खेल को खेल की तरह रहने दीजिए। खिलाड़िओं को खेलने दीजिये, क्रिकेट प्रेमिओं को देखने दीजिये और सेल्फ प्रेमी ट्रोल करने वाले आप तो क्रिकेट से दूर रहिये.

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं, और एनडीटीवी में कार्यरत हैं)

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