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ओलंपिक में नीरज ने रचा स्वर्णिम इतिहास, भारत ने लंदन को पीछे छोड़ा

टोक्यो: भारत के स्टार भाला फेंक एथलीट नीरज चोपड़ा ने शनिवार को अपने दूसरे प्रयास में 87.58 मीटर की थ्रो के साथ टोक्यो ओलम्पिक में भाला फेंक स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर नया स्वर्णिम इतिहास रच दिया। नीरज ने ओलम्पिक में भारत का पहला एथलेटिक्स पदक जीता और वह भी स्वर्ण पदक के रूप में। भारत ने इसके साथ ही ओलम्पिक में अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन का कीर्तिमान बना डाला और लंदन में छह पदक जीतने के अपने पिछले सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन को पीछे छोड़ दिया।

भारत का इन खेलों में यह सातवां पदक था। भारत ने इससे पहले दो रजत और चार कांस्य पदक जीते थे। भारोत्तोलक मीराबाई चानू और पहलवान रवि कुमार दहिया ने रजत पदक जीते जबकि महिला मुक्केबाज लवलीना बोर्गोहैन, बैडमिंटन स्टार पीपी सिंधू, भारतीय पुरुष हॉकी टीम और पहलवान बजरंग पुनिया ने कांस्य पदक जीते। बजरंग ने कुछ घंटे पहले ही कांस्य पदक जीता था लेकिन उनके पदक में नीरज ने स्वर्णिम ख़ुशी का रंग भर दिया।

युवा एथलीट नीरज ने अपने दूसरे प्रयास में 87.58 मीटर की थ्रो फेंकी जो अंत में उन्हें स्वर्ण पदक दिलाने वाली साबित हुई। चेक गणराज्य के दो एथलीटों जाकूब वादलेच (86.67) को रजत और विट्ज़सलाव वेस्ली (85.44) को कांस्य पदक मिला। टूर्नामेंट में प्रबल दावेदार के रूप में उतरे जोहानस वेटर फाइनल राउंड में भी नहीं पहुंच सके और नौंवें स्थान पर रहकर बाहर हो गए।

नीरज ने अपने स्वर्ण प्रदर्शन के साथ ही राइफल निशानेबाज अभिनव बिंद्रा के 2008 बीजिंग ओलम्पिक में देश का पहला व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतने के प्रदर्शन की भी बराबरी कर ली। नीरज इसके साथ ही ओलम्पिक के इतिहास में भारत का पहला स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट भी बन गए।

2018 एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता भारतीय भाला फेंक एथलीट नीरज चोपड़ा ने अपने टोक्यो ओलंपिक अभियान का शानदार आगाज किया है। उन्होंने यहां बुधवार को क्वालीफिकेशन राउंड में अपने पहले प्रयास में 86.65 मीटर के थ्रो के साथ सीधे क्वालीफिकेशन से पुरुषों के भाला फेंक फाइनल के लिए क्वालीफाई किया। उल्लेखनीय है कि फाइनल के लिए सीधे क्वालीफाई करने के लिए योग्यता चिन्ह 83.50 रखा गया था।

नीरज ने फाइनल में भी शानदार शुरुआत की और पहली थ्रो में 87.03 मीटर की दूरी नाप ली। उनकी दूसरी थ्रो इससे भी बेहतर रही जिसमें उन्होंने 87.58 मीटर का फासला तय किया। उनकी तीसरी थ्रो 76.79 मीटर रही। इसके बाद उनकी अगली दो थ्रो फ़ाउल रही। उनकी आखिरी थ्रो से पहले उनका स्वर्ण पक्का हो चुका था। उनकी अंतिम थ्रो 84.24 मीटर रही लेकिन उनकी दूसरी थ्रो उन्हें स्वर्ण दिलाने के लिए काफी थी।

दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे चेक खिलाड़ियों ने सत्र का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया लेकिन वे नीरज के खिलाफ मुकाबले में नहीं आ पाए और उन्हें रजत तथा कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा। जर्मनी के जूलियन वेबर को चौथा और पाकिस्तान के अरशद नदीम को पांचवां स्थान मिला।

नीरज के इस स्वर्ण पदक के साथ पदक तालिका में 47 वें स्थान पर आ गया और कुल पदकों के लिहाज से उसे पदक तालिका में 31वां स्थान मिला। भारत 2012 के लंदन ओलम्पिक में अपने छह पदकों के पिछले सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के साथ 57वें स्थान पर रहा था। इस युवा एथलीट ने वो कारनामा कर दिखाइए जो मिल्खा सिंह और पीटी उषा जैसे दिग्गज एथलीट क्रमशः 1960 और 1984 के ओलम्पिक खेलों में नहीं कर पाए थे। नीरज के इस स्वर्णिम प्रदर्शन से भारत ने अपना टोक्यो अभियान शानदार ढंग से समाप्त किया क्योंकि यह आखिरी स्पर्धा थी जिसमें किसी भारतीय एथलीट ने हिस्सा लिया।

चोपड़ा 2016 में भारतीय सेना से जुड़े थे और इस समय वह नायब सूबेदार के रूप में जूनियर कमीशंड अफसर के तौर पर काम कर रहे हैं। उन्होंने जकार्ता में 2018 के एशियाई खेलों में 88.06 मीटर की थ्रो के साथ नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया था । नीरज ने 2021 में इंडियन ग्रां प्री में 88.07 मीटर के साथ अपना ही रिकॉर्ड तोडा था। भाला फेंक एथलीट ने 2018 राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीता था और वह 2016 की अंडर 20 विश्व चैंपियनशिप में 86.48 मीटर का नया रिकॉर्ड बनाया था।