देश विशेष रिपोर्ट

‘मुल्ला’ मुलायम के बेटे अखिलेश को मुस्लिमों से परहेज़ है?

निसार अहमद सिद्दिक़ी

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव होने में 10 महीने से कम का वक्त बचा है। चुनाव में पार्टी को मजबूत बनाने के लिए समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव यूपी के अलग-अलग शहरों का दौरा कर रहे हैं। पूर्वांचल से बुन्देलखंड, सेंट्रल यूपी और पश्चिमी यूपी के कई जिलों का अखिलेश यादव दौरा कर चुके हैं। इस दौरान अखिलेश यादव मंदिर और मठ जाकर पूजा-अर्चना भी कर रहे हैं। अखिलेश यादव ने आंवला के जैन मंदिर और पांडवों का किला, वाराणसी के संत रविदास मंदिर, मिर्जापुर के विध्यांवासिनी मंदिर, स्वामी अड़गड़ागंद मठ, काम्पिल्य के जैन मंदिर, श्रावस्ती के बौद्ध स्तूप, चित्रकूट के कामदगिरी की परिक्रमा की। इसके अलावा वह मध्य प्रदेश के मुरैना के चौसठ योगिनी मंदिर भी गए। अखिलेश जिन शहरों में गए वहां हिन्दू धर्म के अलावा मुस्लिम धर्म के कई प्रसिद्ध धर्म स्थल भी हैं। लेकिन अखिलेश मुस्लिमों के कई प्रसिद्ध धर्म स्थलों पर नहीं गए।

मिर्जापुर के विंध्यवासिनी मंदिर जब अखिलेश यादव गए तो वहीं पास में मशहूर दरगार कंतित शरीफ के नाम मशहूर हजरत ख्वाजा इस्माइल चिश्ती की दरगाह पर जियारत के लिए नहीं गए। जबकि बड़ी संख्या में लोग फूल-माला और चादर लेकर उनका इंतजार कर रहे थे। यहां यह बताना जरूरी है कि कंतित शरीफ दरगाह हिन्दू-मुस्लिम एकता की मिसाल है। यहां पिछले चार दशकों से एक हिन्दू कसेरा परिवार ही सबसे पहले चादर चढ़ाता है। यहां कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी जियारत कर चुके हैं। इसके अलावा अखिलेश यादव बरेली के दौरे पर गए। वहां पर वो जैन मंदिर और पांडवों के किले का दौरा किया। लेकिन बरेली की प्रसिद्ध आला हजरत दरगाह नहीं गए। जबकि आला हजरत दरगाह की मान्यता ना सिर्फ मुस्लिमों में है बल्कि हिन्दू समुदाय में भी बहुत है।

आजम और हसन परिवार पर अखिलेश की खामोशी!

 

समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान और उनका परिवार पिछले एक साल से जेल में बंद है। इतने बड़े नेता के जेल में बंद होने के बाद भी समाजवादी पार्टी की तरफ से कोई बड़ा आंदोलन नहीं हुआ। अब चुनाव के दिन नजदीक आ रहे हैं तो अखिलेश यादव रामपुर दो-दो बार गए। उन्होंने आजम खान की पत्नी से मुलाकात की और जौहर विश्वविद्यालय के लिए साइकिल रैली निकाली। वहीं जिस तरह आजम खान की राजनीतिक विरासत है उसी तरह हसन परिवार का भी दखल है। सपा के कद्दावर मुस्लिम नेता मरहूम मुनव्वर हसन कई बार सांसद और विधायक रहे हैं। उनकी पत्नी तबस्सुम हसन भी सांसद रही हैं और बेटे नाहिद हसन अभी भी विधायक है। हाल ही में तबस्सुम हसन और नाहिद हसन के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई हुई है, लेकिन इस मामले पर अखिलेश यादव की चुप्पी रही। वहीं समाजवादी पार्टी की तरफ के कोई आंदोलन नहीं किया गया। उत्तर प्रदेश की राजनीति के जानकार वसीम अकरम त्यागी कहते हैं कि एक बार किसी आंदोलन में धर्मेंद्र यादव का सिर फट गया तो पश्चिम से लेकर पूरब तक सपाई सड़क पर उतरकर आंदोलन कर रहे थे लेकिन जब आजम और हसन परिवार पर राजनीतिक तौर पर निशाना बनाया जा रहा है तो समाजवादी पार्टी की तरफ से उन्हें सहारा नहीं दिया जा रहा है ना ही सपा मुखिया इस मामले पर कुछ बोल रहे हैं। वसीम कहते हैं कि आम मुसलमानों के बीच ये चर्चा हो रही है कि जब सपा मुखिया अपने नेताओं पर हो रहे जुर्म पर नहीं बोल रहे हैं तो आम मुसलमानों पर होने वाले ज्यादती पर कैसे बोलेंगे?

 

…जब मुलायम ने अखिलेश को कहा-मुस्लिम विरोधी

 

2017 में यादव परिवार के अंदर विवाद उभरा था। समाजवादी पार्टी पर आधिपत्य को लेकर अखिलेश और उनके चाचा शिवपाल के अंदर जंग छिड़ी थी। उस वक्त में अखिलेश को उनके पिता मुलायम सिंह यादव ने मुस्लिम विरोधी करार दिया था। मुलायम ने अखिलेश को मुस्लिमों के प्रति नकारात्मक रवैये वाला नेता करार दिया था। मुलायम ने कहा था कि आईपीएस जावीद अहमद को राज्य का डीजीपी बनाए जाने पर तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव नाराज हो गए थे और अखिलेश यादव उनसे (मुलायम) 15 दिन दिन तक बात नहीं की थी। मुलायम के अनुसार अखिलेश नहीं चाहते थे कि राज्य की पुलिस का प्रमुख कोई मुस्लिम अधिकारी बने।

 

मायावती ने भी अखिलेश को कहा था मुस्लिम विरोधी

 

मुलायम सिंह यादव के अलावा बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने भी अखिलेश यादव पर मुस्लिम विरोधी होने के आरोप लगाए थे। मायावती ने कहा था कि अखिलेश यादव ने उन्हें 2019 के लोकसभा चुनाव में मुस्लिम उम्मीदवारों को ज्यादा टिकट देने से मना किया था। आपको बता दें कि 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा और आरएलडी ने महागठबंधन के तहत चुनाव लड़ा था। मायावती ने यह भी आरोप लगाया था कि सपा का कोर वोट उन्हें नहीं मिला था, जिसकी वजह से गठबंधन को नुकसान हुआ था।

सपा में इग्नोर किए जाते हैं मुस्लिम नेता !

 

पूर्वांचल के समाजवादी पार्टी के एक बड़े मुस्लिम नेता ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि पार्टी के अंदर मुस्लिम नेताओं की स्थिति पंगु हो गई है। उन्होंने बताया कि 2019 के लोकसभा चुनावों में पार्टी ने किसी भी मुस्लिम नेता को पार्टी के प्रचार के लिए मैदान में नहीं उतारा। यहां तक कि पार्टी के लोग मुस्लिम मोहल्लों में वोट तक मांगने नहीं गए। इसके अलावा मुस्लिमों के मुद्दों पर बोलने की आजादी भी कुंद कर दी गई है। मीडिया में भी पार्टी का पक्ष रखने के लिए मुस्लिम नेता नहीं जाते हैं।

अखिलेश यादव की राजनीति के इतर उनके पिता मुलायम सिंह यादव की मुस्लिम समुदाय को लेकर स्पष्ट नीति थी। वह हमेशा मुस्लिमों के बीच रहे और उनके लिए आवाज उठाते रहे। शायद यही वजह है कि मुस्लिम समुदाय मुलायम को अपना नेता मानता रहा है। इसकी बानगी ऐसे भी देखी जा सकती है कि 1996 के लोकसभा चुनाव में मुलायम के एक भाषण ने चुनाव हार रहे सपा प्रत्याशी को जीत दिला दिया था। उस चुनाव में डूमरियागंज में सपा प्रत्याशी बृजभूषण तिवारी की हालत एकदम खस्ता थी मुलायम ने चुनाव से पहले एक जनसभा की। जिसमें उन्होंने कहा था- मुस्लिम भाईयों मुझे आपके अधिकारों की लड़ाई लड़ने की वजह से मुल्ला मुलायम और मुस्लिमों की औलाद कहा जाता है। मैं आपसे दूर रहकर राजनीति कर सकता था लेकिन मैं आपकी मदद के लिए खड़ा रहा। लेकिन इसके बदले मुझे गालियां मिली। मुलायम ने झोली फैलाकर बृजभूषण तिवारी के लिए वोट मांगे और मुसलमानों से अपनी इज्जत रखने की गुहार लगाई। नतीजा ये हुआ कि चुनाव हार रहे तिवारी ने शानदार जीत हासिल की। मुलायम सिंह यादव मुस्लिमों के बीच जाते थे तो बकायदा टोपी और शाफा पहनकर जाते थे। उन्हें ना तो मुस्लिम पहचान से कोई दिक्कत थी, ना ही वह कभी मुस्लिमों के बीच जाने से परहेज किए। लेकिन उनके बेटे की समाजवादी पार्टी में शायद ही मुस्लिम पहचान को लेकर असमंजस की स्थिति है।

(लेखक जामिया मिलिया इस्लामिया में रिसर्च स्कॉलर हैं)

Donate to TheReports!
Independent journalism that speaks truth to power and is free of corporate and political control is possible only when people contribute towards the same. Please consider donating in support of this endeavour to fight misinformation and disinformation.

Donate Now

To make an instant donation, click on the "Donate Now" button above. For information regarding donation via Bank Transfer/Cheque/DD, click here.Code by SyncSaS