कृष्णकांत का लेख: पाकिस्तान की इन घटनाओं से भारत को क्या सीखना चाहिए?

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कृष्णकांत

आपको पाकिस्तान या तालिबान की कट्टरता से चिढ़ है? अच्छी बात है. कट्टरता से चिढ़ना चाहिए. लेकिन इस पर भी ध्यान दीजिए कि आपको भी वैसा ही बनाने का प्रयास क्यों चल रहा है? क्या आप वैसे बनना चाहते हैं? भारत और पाकिस्तान में हाल की कुछ घटनाओं पर गौर फरमाएं.

हाल ही में जब हमारी दिल्ली में एक समुदाय को ‘काटने और मारने’ का नारा लगाया गया और कानपुर में एक छोटी बच्ची के और उसके पिता को प्रताड़ित किया गया, उसी दौरान पाकिस्तान में भी एक मामले ने तूल पकड़ा था.

पाकिस्तान में एक 8 साल के हिंदू बच्चे ने गलती से किसी मजार के पास पेशाब कर दिया. उसके खिलाफ ईशनिंदा का केस दर्ज ​कराया गया. पुलिस ने बच्चे को पकड़कर जेल में डाल दिया. कोर्ट ने दो दिन बाद उस बच्चे को छोड़ दिया. कई लोग ये मान रहे थे कि छोटा बच्चा है, गलती हो गई. ऐसा उसने जानबूझ कर नहीं किया.

हमारे वाले अभी ट्रेनिंग पर हैं, लेकिन पाकिस्तानी जाहिल तो कई दशक पहले ट्रेंड हो चुके हैं. तो कोर्ट के निर्णय के विरुद्ध भीड़ एकत्र हुई. इन लोगों ने रहीमयार खान इलाके के एक मंदिर में घुसकर तोड़फोड़ और आगजनी की. मूर्तियों को क्षतिग्रस्त किया. ये मामला काफी चर्चा में आ गया. पाकिस्तान की फजीहत शुरू हो गई. इस पर सक्रिय हुई पुलिस ने 90 लोगों को गिरफ्तार किया. पाकिस्तान के गृहमंत्री ने कहा, “हिंदू मंदिर को अपवित्र करने की घटना निंदनीय और दुखद है. इस तरह की घटनाएं इस्लाम और पाकिस्तान को पूरी दुनिया में बदनाम करती हैं. दूसरे धर्मों के पूजा स्थल को अपवित्र करना पूरी तरह से इस्लाम की शिक्षाओं के खिलाफ है. धार्मिक नफरत फैलाने और अल्पसंख्यकों के प्रति हिंसा भड़काने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. हम देश के सभी धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे.”

वहां की संसद में ये मामला उठाया गया तो सर्वसम्मति इसके खिलाफ प्रस्ताव पास किया गया. तोड़े गए मंदिर की तुरंत मरम्मत कराई गई. पाकिस्तान हिंदू काउंसिल के सदस्यों ने जाकर फिर से मंदिर का उद्घाटन किया और फिर से पूजा शुरू हो गई. हालांकि, बच्चे के ऊपर दर्ज केस नहीं वापस लिया गया, लेकिन हिंदुओं को भरोसा है कि वह नादान है. केस मुख्य न्यायाधीश के पास है और उसे माफ कर दिया जाएगा. प्रशासन ने भी हिंदू नेताओं से कहा कि बच्चे के खिलाफ कोई सबूत नहीं है. उसे बरी कर दिया जाएगा. सरकार ने कहा कि रहीमयार खान में मंदिर को फिर से खोलना इस बात को दर्शाता है कि पाकिस्तान सरकार द्वारा अल्पसंख्यकों के धार्मिक विश्वासों का सम्मान करना हमारी मूल नीति है और हम सुनिश्चित करेंगे कि सभी नागरिक पाकिस्तान के संविधान के अनुसार जीवन और स्वतंत्रता का आनंद लें.

दूसरी घटना लाहौर में महाराजा रणजीत सिंह की मूर्ति तोड़ने का है. ये मूर्ति एक कट्टरपंथी संगठन के किसी एक सनकी शख्स ने तोड़ दी. इस घटना का वीडियो वायरल हुआ जिसमें वहीं कुछ लोगों ने उसे ऐसा करने से रोका. उस सनकी को गिरफ्तार कर लिया गया. प्रधानमंत्री इमरान खान के करीबी मंत्री चौधरी फवाद हुसैन ने लिखा, ‘शर्मनाक, अनपढ़ों का यह झुंड दुनिया में पाकिस्तान की छवि के लिए वाकई खतरनाक है.’

सनकी तो सब जगह हैं. अपराध हर कहीं होता है. असली मसला है कि अपराध रोकने के लिए क्या किया जा रहा है.

इन दो वाकयों को मैं सिर्फ इसलिए बता रहा हूं कि क्यों हम पाकिस्तान से ऐसी उदारताओं की उम्मीद नहीं करते. वह अपने अल्पसंख्यकों पर जुल्म के लिए दुनिया भर में बदनाम है. लेकिन उनकी सरकार दिखावे के लिए ही सही, उदार या लोकतांत्रिक दिखने की कोशिश कर रही है.

हमारे भारत की विविधता पर दुनिया भर में सैकड़ों किताबें लिखी गई हैं. हमारी पहचान दुनिया के एकमात्र ऐसे देश की है ​जहां सभी धर्म, 3000 जातियां, 1500 भाषाएं हैं और फिर भी हम सब साथ रहते हैं. आजादी मिली तो अंग्रेजी विद्वान कहते थे कि इतनी विविधता है कि ये इंडियन एक साथ रह ही नहीं सकते. भारत जल्दी ही टूट जाएगा. हम सबने उन्हें गलत साबित किया है.

लेकिन क्या कानपुर की उस छोटी बच्ची को वही उदार लोकतंत्र मिला है ​जिसका हम 70 सालों से मजा ले रहे हैं? क्या जंतर मंतर पर हुई जहरीली नारेबाजी पर कानून ने सही काम किया है? क्या हमारी सरकार के किसी बड़े नेता ने कभी किसी घटना के बाद ये भरोसा दिया है कि हम अल्पसंख्यकों को पूरी सुरक्षा देंगे? क्या लिंच मॉब को माला पहनाने वाले मंत्री को दंड मिला था? क्या लिंचिंग में मारे गए सैकड़ों लोगों को इस उदार और मजबूत लोकतंत्र ने न्याय दिलाया है? कौन है जो हमारे महान लोकतंत्र की लिंचिंग करके लिंच मॉब को माला पहना रहा है? एक पार्टी का सम्मानित नेता ऐसा करने की हिम्मत कहां से लाता है?

ऐसा क्यों है कि अपनी उदारता और ‘विविधिता में एकता’ के महान सूत्र से हमारा भरोसा हिलने लगा है? कौन है जो भारत को फिरकापरस्ती और कट्टरता की तरफ धकेल रहा है? कौन है जो भारत के युवाओं को तालिबानी सोच से लैस करना चाहता है?

गृह मंत्री की हैसियत से सरदार पटेल ने कहा था कि अगर हम अपने अल्पसंख्यकों को सुरक्षा का भरोसा न दे सकें तो हम इस लोकतंत्र के लायक नहीं हैं. हम सरदार पटेल, गांधी और नेहरू का भरोसा क्यों तोड़ रहे हैं?

इधर कई घटनाएं आई हैं जिनसे लगता है कि पाकिस्तान लोकतंत्र बनने की कोशिश कर रहा है और हम 7 दशक के स्थापित लोकतंत्र की जड़ खोदने के सारे प्रयास कर रहे हैं. अपनी लाख खामियों के साथ भारत ऐतिहासिक संघर्ष करके एक महान लोकतंत्र बना है. भारत को कट्टरता की ओर धकेला गया तो यह बर्बाद हो जाएगा. धार्मिक कट्टरता ने इस दुनिया में अब तक ऐसा कोई देश नहीं बनाया जो हमारे लिए नजीर बन सके.

(ये तस्वीर रहीमयार खान में मंदिर के जीर्णोद्धार की है.)

(लेखक पत्रकार एंव कथाकार हैं)

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