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पत्रकार रूबी अरुण का दावा, ‘कोरोना का मास्टरमाइंड है इजरायल, अब वैक्सीन के सहारे करेगा दुनिया पर राज’

कब से तो कहते आ रहे हैं हम कि सारा खेल, इज़रायल का है. 2009 में हमने इस बाबत एक बड़ा ही विस्तृत इनवेस्टीगेटीव रिपोर्टाज़ लिखा था. और आज जो कुछ भी हमारे देश में हो रहा है, उस सब का पुख्ता अंदेशा मेरे आर्टीकल में था. पिछले छ सालों से मेरे उस आर्टिकल में लिखा एक एक शब्द सच हो रहा है. फिर कह रहे हैं हम कि आप लिख कर रख लीजिए कि आने वाले कुछ वर्षों में ये मुठ्ठी भर इज़रायली दुनिया पर राज करेंगे. ना अमेरिका विश्वशक्ति रहेगा ना चीन. अपने देश को तो खैर आप भूल ही जाइए.

भारत में इसका खेल, लालकृष्ण आडवानी के उप प्रधानमंत्री के समय ही शुरू हो गया था, जब अटल जी की सरकार ने इज़रायल की खुफ़िया एजेंसी मोसाद को भारतीय खुफिया एजेंसियों के साथ मिलकर आधिकारिक तौर पर काम करने की इजाज़त दी थी. और उसके बाद से ही अपने मुल्क में दंगे फसाद, और मज़हब की राजनीति परवान चढ़ने लगी. चौथी दुनिया में मेरी ख़बर छपने के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय में मुझे बुलाकर आई बी को दो बड़े अधिकारियों बहुत देर तक कुरेद कुरेद कर मेरे सोर्सेज़ के बारे में पूछताछ की थी. बहरहाल इस बारे में फिर कभी लिखेंगे हम.

अब जरा गिरीश मालवीय का यह लेख पढ़िए बधाई हो आप सभी को, कोरोना वैक्सीन का पहला ह्यूमन ट्रायल सफल हो गया है मॉर्डना पहली अमेरिकी कंपनी है, जिसने वैक्सीन की रेस में सबको पीछे छोड़ दिया है। mRNA-1273 नाम का यह वैक्सीन 16 मार्च को जिस महिला कैंडिडेट को दिया गया था, उसके रिजल्ट आ गए हैं उसके शरीर में केवल मामूली दुष्प्रभाव देखे गए और वैक्सीन का प्रभाव सुरक्षित और सहनीय पाया गया, मॉर्डना ने बताया कि वैक्सीन पाने वाले कैंडिडेट्स का इम्यून सिस्टम वायरस से लड़ने में कोविड-19 से रिकवर हो चुके मरीजों के बराबर या उनसे ज्यादा ताकतवर पाया गया।

अब सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि भाई मॉर्डना कम्पनी के पास ऐसी कौन सी जादू की छड़ी थी जिससे वह दुनिया भर की वैक्सीन निर्माताओं कंपनियों से आगे निकल गयी? जवाब है बिल गेट्स की संस्था CEPI से मिली फंडिंग. यानी कोरोना की दवाई रेमडीसीवीयर बनाने वाली गिलियड साइंस के पीछे भी बिल गेट्स ओर mRNA-1273 नामक सफल वैक्सीन बनाने वाली कम्पनी moderna के पीछे भी बिल गेट्स! क्या कमाल की बात है. क्या अब भी आप इसे कस्पिरेन्सी थ्योरी कहेंगे? एक अनुरोध है आज जो आप पढ़ने जा रहे है उसकी सच्चाई कमेन्ट बॉक्स में दिए गए लिंक से जरूर चेक कर ले. अगर मैं कहूँ कि इस वैक्सीन के बारे में मैंने आपको बिल गेट्स सीरीज की पहली पोस्ट में ही बतला दिया था तो क्या आप यकीन करेंगे? 19 अप्रैल को मैंने इस सीरीज की पहली पोस्ट लिखी थी उसमे साफ साफ लिखा है ‘जनवरी 2020 के पहले हफ्ते में ही विश्व आर्थिक मंच, दावोस, से एक आश्चर्य में डालने वाली घोषणा होती है कि WEF-Gates CEPI के समर्थन से 2019-nCoV के लिये mRNA वैक्सीन का निर्माण करेगी, WEF यानी वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम ओर गेट्स यानी बिल गेट्स ओर CEPI है Coalition for Epidemic Preparedness Innovations.

ध्यान दीजिए MRNA वैक्सीन

इस सीरीज की अगली पोस्ट जो 19 अप्रैल को लिखी गयी थी उसमें मैंने आपको CEPI के बारे में जानकारी देते हुए कहा था कि ‘महामारियों में अपनी रुचि के चलते बिल गेट्स इस क्षेत्र में अरबों रुपये की फंडिंग की ओर एक विशेष संगठन की स्थापना की ओर अपना ध्यान लगाया जिसका नाम है CEPI यानी ‘कोएलिशन फॉर एपिडेमिक प्रिपेयर्डनेस’ इनोवेशन नाम से बहुत कुछ स्पष्ट है इसका हेडक्वार्टर नॉर्वे में बनाया गया सीईपीआई एक गैर-लाभकारी संगठन है, जिसकी स्थापना 2017 में हुई थी। “यह एक पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप” है, जिसका उद्देश्य टीका विकास प्रक्रिया को तेज गति से आगे बढ़ाकर महामारी पर अंकुश लगाना है।

यह संगठन मौजूदा दौर की खतरनाक बीमारियों के लिए तेजी से वैक्सीन तैयार करता है. ‘सीईपीआई ने कुछ दिन पहले ही यह घोषणा भी की थी कि वह कोरोना वायरस के टीके बनाने के लिये यूनिवर्सिटी ऑफ क्वींसलैंड और अमेरिका – बेस्ड बायोटेक कंपनी मोडेर्ना को फंड उपलब्ध करा रहा है.’ CEPI में वाइस चेयरमैन पद पर भी नियुक्त भारतीय वैज्ञानिक गगनदीप कंग के बारे में भी आपको बता चुका हूं. यानी साफ साफ लिख दिया है मोडर्ना ही वह कम्पनी है जो वैक्सीन निर्माण में सफल होगी और वही हुआ भी. अब देश विदेशी मीडिया जमकर इस वैक्सीन का प्रचार करेगा और आप भी इसे ख़ुशी ख़ुशी लगवाने को तैयार हो जाएंगे. अब एक बार आपका ध्यान जरा WEF यानी वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम में 23-24 जनवरी की गतिविधियों पर आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं क्योकि WHO के महानिदेशक के पास बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन, बिग फार्मा और वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) का समर्थन था। ऐसे संकेत भी मिले हैं कि डब्ल्यूएचओ द्वारा ग्लोबल इमरजेंसी घोषित करने का निर्णय दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की ही बैठक जो 21-24 जनवरी को हुई थी उसमे लिया गया था.

23 जनवरी दुनिया का पहला लॉक डाउन चीन के वुहान में किया जाता है पूरी दुनिया को इस खतरे के बारे में ठीक से कोई अंदाजा ही नही है और 24 जनवरी को wef की साइट पर एक लेख प्रकाशित होता है इस लेख की लेखिका है Samantha Sault जो वाशिंगटन पोस्ट में लिखती हैं. लेख का शीर्षक है ‘What we know about the Wuhan coronavirus and urgent plans to develop a vaccine’ यानी गाँव बसा नही ओर लुटेरे पहले आ गए. अब इस लेख के एक उप शीर्षक पर ध्यान दे ‘what’s this means for business’ यह लेख एक प्रेसकांफ्रेस के सवाल जवाबो पर आधारित है जो एक दिन पहले हुई थी आपसे अनुरोध है कि इस प्रेसकांफ्रेस का वीडियो आप जरूर देखें लिंक कमेन्ट बॉक्स में दिया गया है.

इस प्रेसकांफ्रेस मे चार लोग उपस्थित है पहले है जेरेमि फेरर जो बड़े वैज्ञानिक है और वेलकम ट्रस्ट से जुड़े हैं जिन्हें बिल गेट्स फाउंडेशन ने 125 मिलियन डोनेट पिछले महीने ही दिया है दूसरे है रिचर्ड हेकेट जो CEPI के चेयरमैन है, तीसरे है मोडर्ना के स्टीफन बेंसेल, चौथी है जूलियन चैन जो एंकर की भूमिका में है कृपया ये वीडियो एक बार देखे. इसी प्रेसकांफ्रेस में CEPI कोरोनोवायरस के खिलाफ एक नया टीका विकसित करने और इसकी रिसर्च”जल्द से जल्द” करने के लिए अमेरिकी बायोटेक कंपनी मॉर्डन इंक और यूएस नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इंफेक्शस डिसीज (एनआईएआईडी) के साथ एक नई साझेदारी की घोषणा करता है. अब आप ही बताइए….. कि इतनी अच्छी प्लानिंग इन्होंने की थी तो सबसे पहले टीका तो इन्ही का ही आना था. m RNA वैक्सीन किस तरह से एक आम वैक्सीन से अलग है, CEPI ओर मोडर्ना के गठजोड़ की ओर कितनी परते है इस पर विस्तार से फिर कभी.

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