देश

‘हेट क्राइम’ का शिकार हुए मदरसा छात्र और मजदूर से जमीयत उलमा-ए-हिंद ने की मुलाक़ात

नई दिल्लीः  पिछले दिनों उत्तर प्रदेश में मदरसा छात्र जीशान और मज़दूर कामिल और शहजाद को धार्मिक नारे नहीं लगाने पर पीटा गया था। जमीयत उलमा-ए-हिंद के एक प्रतिनिधिमंडल ने दोनों पीड़ितों से मुलाकात की और मुजरिमों  के खिलाफ जिला प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है। जमीयत-ए-हिंद के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को गाजियाबाद, मसूरी  के एक मदरसा छात्र जीशान और महली निवासी राजमिस्त्री कामिल और शहजाद से मुलाकात की।  इन लोगों को अलग अलग  घटना में दतौड़ी  एसएस पब्लिक के पास  मौजूद कुछ असामाजिक तत्व ने धार्मिक घृणा के आधार पर बेरहमी से पीटा था। घटना चार जून की है।

जमीयत के प्रतिनिधिमंडल ने जीशान, कामिल और  शहजाद  से उनके घरों पर जाकर मुलाक़ात की  और संबंधित अधिकारियों से तत्काल सजा की मांग करते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं किसी भी सभ्य समाज के लिए घृणित  हैं। जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी  ने बार-बार कहा है कि भारत जैसे महान लोकतांत्रिक देश में इस तरह की घटनाएं बहुत दुर्भाग्यपूर्ण हैं और रास्ता गुजरने वालों को धार्मिक नारे लगाने के लिए मजबूर करना शर्म की बात है।

जमीयत उलमा-ए-हिंद के पास पीड़ितों  की एफआईआर की कॉपी और उसकी ओर से एक याचिका है। जिसके मुताबिक जीशान मदरसा फैजुल उलूम का छात्र है। वह जैसे ही वह दतौड़ी एसएस पब्लिक स्कूल के पास  पहुंचा, तो वहां पहले से ही मौजूद असमाजिक तत्वों ने बगीचे से बाहर आकर उसे रुकने को कहा और फिर उसे जे श्री राम के नारे लगाने को कहा। मना करने पर उस पर धारदार हथियार से हमला कर दिया। इसी बीच फरीद नगर से एक ऑटोरिक्शा को आते देखा गया, तो ये असमाजिक तत्व वहां से भाग गए। किसी तरह यह छात्र भी वहां से भागने में सफल रहा, लेकिन वह बुरी तरह घायल हो गया था । वह  घंटों बिस्तर पर लेटा तड़पता रहा।

इसी तरह की घटना भोजपुर के माहली थाना निवासी नुसरत पुत्र शहजाद के साथ हुई, जो प्रतिदिन अपने साथी कामिल पुत्र अमरीन के साथ पत्थर के काम के लिए इस स्थान से गुजरता था। वहां छिपे दस-बारह लोगों ने उस पर लाठियों से हमला कर दिया। दोनों ने पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई है, जिसके आधार पर कुछ लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

जमीयत उलमा-ए-हिंद का एक प्रतिनिधिमंडल जिसमें महासचिव मौलाना हकीमुद्दीन कासमी, मौलाना गयूर अहमद कासमी और हापुड़  के मौलाना इफ्तिखार अहमद कासमी, मुफ्ती असजद आबिदी बुलंद शाहरी, चौधरी अतहर जीवन नरसिंह होम, मौलाना मुस्तफा नाहल, सरवरी साहब नाहली और प्रधान कामिल  शामिल थे।