जमीअत उलमा-ए-हिंद की मांग लखीमपुर हिंसा के गुनहगारों के ख़िलाफ होनी चाहिए सख्त कार्रवाई, राजधर्म निभाए सरकार

नई दिल्लीः जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी ने उत्तर प्रदेश लखीमपुर खीरी में हुई हिंसक घटना की कड़ी निंदा की है और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की है। मौलाना मदनी ने कहा कि जो कुछ भी हुआ है वह किसानों के प्रति सरकार के असंवेदनशील रवैये और अधिकारों के लिए आवाज उठाने वालों के गाला दबाने की फासीवादी शैली की अभिव्यक्ति है।

मौलाना मदनी ने कहा कि जमीयत उलमा-ए-हिंद  इस हिंसा में जान गंवाने वालों के   परिवारों के साथ एकजुटता व्यक्त करती  है  और न्याय की लड़ाई में उनके साथ  खड़ी है। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार से राज धर्म का पालन करने और इस तरह के जघन्य और अमानवीय कृत्यों में शामिल लोगों को बिना किसी भेदभाव के दंडित करने की मांग की।

क्या हुआ लखीमपुर में

जानकारी के लिये बता दें कि उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी ज़िले में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और केंद्रीय गृहराज्य मंत्री के एक कार्यक्रम के विरोध में हुए प्रदर्शन के बाद चार किसानों समेत आठ लोगों की मौत हो गई थी। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय कुमार मिश्र ने मीडिया से बात करते हुए सफाई दी है कि कि “जो लोग आए थे, आंदोलन करने के लिए भी, वो भी बाहर से बुलाकर लाए गए लोग थे। हमारे ज़िले के लोग कभी भी इस तरह के आंदोलनों में शामिल नहीं होते हैं। क्योंकि जिन लोगों की मृत्यु की ख़बर भी आ रही है, वो भी हमारे ज़िले के रहने वाले नहीं हैं। वो नालपाड़ा, बहराइच के रहने वाले लोग हैं। और जिस तरह से हमारे कार्यकर्ताओं पर आक्रमण किया गया है, इससे लगता है कि कुछ उपद्रवी तत्व ज़रूर किसानों के सम्मेलन में दूसरे ज़िलों में आकर इसमें शामिल हुए थे और उन्होंने इस तरह की घटना को अंज़ाम दिया।”

इससे पहले उन्होंने कहा था कि उनके बेटे पर लगाया जा रहा ये आरोप कि वो गाड़ी चला रहे थे, ये सरासर झूठ है। उन्होंने कहा, “वो, मैं या मेरे परिवार का कोई भी सदस्य उस वक़्त वहां मौजूद ही नहीं था।” अजय मिश्र ने बताया, “जैसी कि आप सबको जानकारी है कि हमारे पैतृक गांव में प्रतिवर्ष कुश्ती प्रतियोगिता का कार्यक्रम होता है। इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए बतौर मुख्य अतिथि आज माननीय उपमुख्यमंत्री जी को आना था और लखीमपुर में पीडब्ल्यूडी का कार्यक्रम था वो करके हम दोनों लोग साथ आ रहे थे।”

“जब हम कार्यक्रम स्थल से थोड़ी दूर थे तो हमारा रूट यह बता कर डायवर्जन कर दिया गया कि कुछ किसान वहां पर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं और काला झंडा दिखाने की कोशिश करेंगे। हमलोगों का रूट परिवर्तित हो गया उसके बाद हमारे कार्यकर्ता चार पांच गाड़ियों से हमें लेने आ रहे थे। उन कार्यकर्ताओं पर किसानों के बीच शामिल अराजक तत्वों ने पथराव किया। इसकी वजह से वो गाड़ियां रुकीं।”

“गाड़ियों से खींच कर हमारे कार्यकर्ताओं को लाठी, डंडे और तलवारों से पीटा गया। इसका वीडियो हमारे पास है। फिर गाड़ियों को धक्का देकर गड्ढे में गिराया गया। उन गाड़ियों को जलाया गया। उसके साथ साथ दूसरी गाड़ियों में भी भारी तोड़फोड़ की गई।”

“इस दुखद घटना में हमारे तीन भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं की मृत्यु हुई है। ड्राइवर की भी मृत्यु हुई है। साथ ही 10 से 12 लोग घायल हुए हैं। यह बेहद दुखद घटना है जो इस आंदोलन में घुसे उपद्रवियों ने की है। जब से ये किसान आंदोलन शुरू हुआ है, बब्बर खालसा से लेकर अनेक उपद्रवी संगठन हमारे देश में अस्थिरता फैलाने की कोशिश में लगे हैं। किसान आंदोलन को चलाने वाले लोगों को भी इन बातों को समझना चाहिए।”

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