जामिया की छात्रा हर्षिता शुक्ला ने हरियाणा स्टेट बॉक्सिंग चैंपियनशिप में जीता रजत पदक

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नई दिल्ली: जामिया मिल्लिया इस्लामिया (JMI) के लिए गर्व की बात है कि एमए डेवलपमेंट एक्सटेंशन, सेमेस्टर III, प्रौढ़ एवं सतत शिक्षा विस्तार विभाग (डीएसीईई) की छात्रा हर्षिता शुक्ला ने हरियाणा बॉक्सिंग संघ द्वारा फ्लाई वेट वर्ग (54 किग्रा-57 किग्रा) में आयोजित द्वितीय एलीट महिला हरियाणा स्टेट बॉक्सिंग चैंपियनशिप 2021-22 में रजत पदक जीता है।

डीएसीईई की अध्यक्ष डॉ. शिखा कपूर ने बताया कि हर्षिता की शिक्षा और खेल दोनों में ही अदभुत प्रतिभा है क्योंकि उसने सेमेस्टर-I में अपनी कक्षा में दूसरा स्थान हासिल किया था।

जामिया बिरादरी हर्षिता को इस उपलब्धि के लिए बधाई देती है और उसके आगे के प्रयासों के लिए शुभकामनाएं देती है। यह उम्मीद की जाती है कि अन्य छात्र, विशेष रूप से छात्राएं, खेल और शिक्षा में एक साथ अच्छा प्रदर्शन करने के लिए उनसे प्रेरणा लेंगी।

इसरो परीक्षा में जामिया के छात्र ने मारी थी बाजी

जामिया मिल्लिया इस्लामिया (जेएमआई) के इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संकाय के पूर्व छात्र मोहम्मद काशिफ़ ने वैज्ञानिक/ इंजीनियर ‘एससी’-मैकेनिकल (पोस्ट नंबर बीई002) पद के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) केंद्रीकृत भर्ती बोर्ड-2019 परीक्षा में प्रथम स्थान हासिल किया है। इसरो ने दो दिन पहले नतीजे घोषित किए थे। काशिफ ने वर्ष 2019 में जामिया से मैकेनिकलbइंजीनियरिंग में बी.टेक किया था। काशिफ के अलावा उनकी कक्षा के दो अन्य छात्रों अमित कुमार भारद्वाज और अरीब अहमद को भी प्रतिष्ठित अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन में समान पद के लिए चुना गया है।

 

इसरो सेंट्रलाइज्ड रिक्रूटमेंट बोर्ड-2019 ने जनवरी, 2020 के महीने में एससी स्तर के वैज्ञानिकों के चयन के लिए लिखित परीक्षा आयोजित की थी और परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले उम्मीदवारों का साक्षात्कार जुलाई, 2021 में आयोजित किया गया था।

जामिया के छात्रों के प्रदर्शन से उत्साहित, कुलपति प्रो नजमा अख्तर ने उन्हें शुभकामनाएं दीं और आशा व्यक्त की कि यह उपलब्धि अन्य छात्रों को अनुसंधान में अपना करियर बनाने और इसमें उत्कृष्टता हासिल करने के लिए प्रेरित करेगी ।

हाल ही में घोषित एनआईआरएफ रैंकिंग में जामिया विश्वविद्यालय श्रेणी में पिछले साल के मुकाबले इस साल 10वें से चार पायदान ऊपर बढ़कर छठे स्थान पर पहुंच गया है, कुलपति इसका श्रेय विश्वविद्यालय में अनुसंधान के माहौल में सुधार को देती हैं।

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