मुसलमान को कभी भी किसी एक पार्टी को हर हाल में हराने के लिए वोट नहीं करना चाहिए: मौलाना महमूद मदनी

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का औपचारिक ऐलान हो चुका है। यूपी में सात चरणों में चुनाव होंगे जबकि नतीजे 10 मार्च को आएंगे। सूबे में सियासी नब्ज की थाह लेने के लिए आजतक की ओर से आयोजित देश की सबसे बड़ी बहस पंचायत उत्तर प्रदेश में ‘मुस्लिम समाज किसे करेगा वोट’ के सवाल पर बेबाकी से मौलाना महमूद मदनी ने जवाब दिया। मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ “बस नारा” है।

उन्होंने कहा कि “मुसलमान को कभी भी किसी एक पार्टी को हर हाल में हराने के लिए वोट नहीं करना चाहिए”। उन्होंने कहा कि जब किसी को हराने के लिये वोट करते हैं तो जिसे हराना है उसे तो वोट की जरूरत नहीं रहती, लेकिन जिसको वोट देते हैं वह भी यही सोचता है कि ये जाएंगे, और इस स्थिति में दोनों ही आंखें मूंद लेते हैं। उन्होंने कहा कि जहां जो उम्मीदवार सही हो उसे वोट दिया जाए।

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्‍यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश के जिन्‍ना वाले बयान से किनारा करते हुए कहा कि मुसलमान ने जिन्ना के आईडिया को रिजेक्‍ट किया और इंडिया को चुना है। हम लोग बाइचांस नहीं बाई चॉइस इंडियन हैं। महमूद मदनी ने दो टूक कहा कि भारत को मुसलमानों ने अपनी पंसद से चुना। जिन्‍ना इंडिया के मुसलमानों के पैर पर कुल्हाड़ी मार कर गए थे। ऐसे में भारत के मुसलमानों के साथ जिन्ना को नहीं जोड़ना चाहिए।


महमूद मदनी ने कहा कि अखिलेश यादव एक पार्टी के नेता है, उन्हें जिन्ना की कुछ बातें अच्छी लगी होंगी। जिन्ना से हमारा कोई लेना नहीं है। उसे मुसलमानों से क्यों जोड़कर देखा जा रहा है। अखिलेश यादव ने किस कॉटेंस्ट में जिन्ना का जिक्र किया है, मैं नहीं जानता है। उन्होंने आउट ऑफ कॉटेस्ट में जाकर बात की है, जो बेवकूफी की थी। यहां कुछ लोग हैं जो नाथूराम गोडसे साहब की भी तारीफ करते हैं। हालांकि, मदनी ने कहा कि हम सबके साथ साहब शब्द लगाते हैं।


उन्होंने कहा कि हमारे नबी (मोहम्मद साहब) के बारे को गाली दी जा रही है। ये बातें इतना बढ़ गया कि हर जगह हो रही हैं और सरकार के द्वारा उन पर कोई एक्शन नहीं हो रहा है। त्रिपुरा के मामले का उदाहारण देते हुए मौलान मदनी ने कहा कि त्रिपुरा में बकायदा जुलूस निकाला गया और गाली दी गई। इतने दिनों के बाद भी कोई कोई एक्शन नहीं हुआ। साथ ही उन्होंने कहा कि किसी भी समुदाय का कोई भी शख्स अगर अभद्र के भाषा का इस्तेमाल किसी के भी खिलाफ या किसी धर्म के महापुरुष के खिलाफ करता है तो सख्त एक्शन होना चाहिए।

महमूद मदनी ने कहा कि त्रिपुरा के मामले पर हम केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से भी मिलकर आए थे और उन्होंने भरोसा दिया था कि जरूर एक्शन लेंगे, लेकिन किया हुआ। वहीं, मौलाना तौकीर रजा के बयान पर उन्होंने कि इसे उससे नहीं जोड़ा जाना चाहिए, क्योंकि उन्होंने किसी भी धर्म के बड़े या महापुरुष को गाली नहीं दी। इसके बाद भी मौलाना तौकीर रजा के लफ्जों से सहमत नहीं हूं।

हालांकि, मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करने वाले कुछ ही लोग हैं। देश के 80 फीसदी लोग भाईचारा और सहिष्णुता में विश्वास करते हैं, लेकिन चंद लोग हैं जो नफरत फैला रहे हैं और वो लोग ही ऐसे अल्फाज का इस्तेमाल कर रहे हैं। हेट स्पीच में मदनी ने कहा कि हेट स्पीच के साथ-साथ हेट क्राइम भी बढ़ गए हैं। हेट क्राइम को काउंटर करने की जिस पर जिम्मेदारी हैं, उन्होंने आंख बंद कर रखा है। हरिद्वार वाली घटना पर एक्शन हो जाता तो तौकीर रजा हिम्मत ही नहीं कर सकते।

सभार आज तक

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