चर्चा में

एनपीआर के ख़िलाफ आंदोलन करने वाले आंदोलनकारी अगर इस सुझाव को मानें तो लागू नहीं होगा NPR

सैय्यद फरमान अहमद

दिल्ली में चुनाव हो गये है। दिल्ली में संविधान विरोधी सरकार को सत्ता से बाहर रख कर आपने ये साबित कर दिया है कि आप देश और संविधान को मिटने नही देंगे। संविधान बचाने के लिए एकजुटता के साथ जो हमने ये फ़ैसला लिया वो बहुत सराहनीय है। आम आदमी पार्टी पहले संसद में CAA का विरोध करके साबित कर चुकी है कि वो संविधान विरोधी क़ानून के ख़िलाफ़ है।

जितनी मज़बूती से दिल्ली की जनता ने भाजपा को दिल्ली से बाहर रखा है उतनी मज़बूती और एकजुटता के साथ अब हमें NPR का विरोध करना है। सड़क के साथ साथ इसका विरोध हमें सरकारों से भी कराना होगा, क्योंकि NPR के इम्प्लमेंटेशन का काम राज्य की सरकारों के हाथ है। इसलिए इसकी शुरुआत आप अभी से कर दीजिए और अपने नए जीते हुए विधायक के पास बधाई और NPR के ख़िलाफ़ समर्थन का माँगपत्र लेकर पहुँचिये। उनसे कहिए की सरकार को वजूद में आते ही सभा से NPR के ख़िलाफ़ प्रस्ताव पारित कराए और NRC के शुरुआती रास्ते को बंद करे।

ये काम ज़्यादा मुश्किल नही है, अपने क्षेत्र के ज़िम्मेदार लोगों को एक साथ ले और माँगपत्र लेकर पहुँच जाए।  दिल्ली में हमारी तरफ़ से ये शुरुआती क़दम होगा। यदि सरकार हमारी माँग नही मानती है तब हम सरकार के ख़िलाफ़ भी सड़क पर उतरेंगे। यदि आपको माँगपत्र चाहिए हो तो आप हमें इन्बॉक्स करें। आपको लेटर की कॉपी भेज दी जाएगी, आप उसका प्रिंट आउट निकाल कर अपने इलाक़े के विधायक के पास पहुँचें। साथ ही लेटर देते हुए एक फ़ोटो लेले उसे हमें सोशल मीडिया पर शेयर करेंगे ताकि दूसरे राज्यों में ऐसा हो सकें।

(लेखक माईनेरिटी एजूकेशन एंड इम्पावरमेंट मिशन के अध्यक्ष हैं)

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