हिंदुस्तान की कहानी: पंजाब के इस गांव में बलबीर और हरमेश की पहल पर किया जा रहा मस्जिद का निर्माण

मोहम्मद जफर खान, नौशाद, महताब और हनीफ मियां का कौल है कि वे खुद के पहले बलबीर और हरमेश के लिए दुआ मांगेंगे। क्योंकि बलबीर और हरमेश की पहल पर पूरे गांव के हिंदू मिलकर मुसलमानों की इबादत के लिए मस्जिद आबाद कर रहे हैं।

पंजाब के संगरूर में गांव है रामपुरा गुजरान। वाह क्या खूबसूरत नाम है! इस गांव के रहवासी भी इस नाम की तरह ही खूबसूरत हैं, जैसे एकदम रंगीन गुलदस्ते की तरह हमारा हिंदुस्तान!

तो हुआ यूं कि गांव में कोई मस्जिद नहीं थी। बरसों से गांव के मुसलमान तीन किलोमीटर दूर के कस्बे में नमाज अदा करने जाते थे। उन्होंने कई बार पंचायत से कहा कि थोड़ी सी जमीन दे दीजिए तो एक मस्जिद बना लें। पंचायत ने प्रस्ताव भी पास कर दिया लेकिन सरकारी काम का तो आप जानते ही हैं। नहीं हुआ तो नहीं हुआ।
अंत में मुसलमानों ने अपनी परेशानी गांव वालों के सामने रखी तो बलबीर सिंह ने कहा कि देखो मियां ऐसा है… हमारी जमीन ले लो और मस्जिद बनवाओ। एकदम परेशान होने की जरूरत नहीं है। पंचायत जमीन दे चाहे न दे, खुदा का घर तो बनकर रहेगा। इसके बाद और भी लोग आगे आए जमीन, पैसा और बाकी सारी चीजों का फटाफट इंतजाम हो गया और मस्जिद बननी शुरू हो गई।

अब पूरा गांव खुश है। बलवीर खुश हैं कि उनकी जमीन पर खुदा की इबादत होगी। गांव के हिंदू खुश हैं कि गांव में मंदिर तो था लेकिन मस्जिद नहीं थी, अब एक मस्जिद भी हो जाएगी। गांव के मुसलमान खुश हैं कि उनके पास इबादतगाह नहीं थी। अब वे बिना दूरदराज गए अपने गांव में ही नमाज पढ़ सकते हैं।

वे बहुत खुश हैं। कह रहे हैं कि हम अपने हिंदू भाइयों के बेहद एहसानमंद हैं। उन्होंने हमारे लिए जमीन दी और पैसे से भी मदद की। सारा इंतजाम कर मस्जिद बनाने में भी मदद कर रहे हैं। हम जब नमाज पढ़ेंगे तो खुद से पहले अपने इन भाइयों के लिए दुआ मांगेंगे।

गौरतलब तो ये है कि ये गांव बंटवारे के बाद बसाया गया था। अगर आपने बंटवारे की त्रासदी पर पढ़ा हो तो जानते होंगे कि जिन लोगों ने बंटवारे का दर्द सबसे ज्यादा झेला या देखा, आज वे किसी से नफरत नहीं करते। वे जानते हैं कि नफरत अंततः किसी को बख्शती नहीं। सब जलकर खाक हो जाता है। जो इसकी चपेट में नहीं आए थे, उनको आज भी चर्बी चढ़ी हुई है। खैर इसको अभी रहने देते हैं।

बस बताना ये था कि रामपुरा गुजरान की तरह इस देश में लाखों गांव हैं, जफर, नौशाद, हनीफ, बलवीर और हरमेश जैसे करोड़ों लोग हैं जो आपस में इसी तरह मिल-जुलकर रहते हैं। साजिश करके इस देश को मजहबी आधार पर बांटा गया, उसके बावजूद यह देश एक प्रतिष्ठित लोकतंत्र बना और दुनिया भर में इज्जत पाई।

इतनी विविधता वाला देश और कहीं नहीं है जहां इतने धर्म, इतनी भाषाएं, इतनी जातियां, मान्यताएं, आशाएं और संस्कृतियां मौजूद हों। फिर भी भारत एक सफल और सुंदर लोकतंत्र है क्योंकि हमारे यहां के लोग, हमारी साझा संस्कृति, हमारी परंपराएं, हमारे धर्म और हमारी ये माटी जिसमें हम सब रहते हैं- यह बहुत खूबसूरत है।
किसी से नफरत मत करिए। क्या पता वह नफरत एक दिन आप ही को जला दे। जय हिंद!

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