उमर खालिद की जमानत अर्जी पर बहस के दौरान मीडिया और पुलिस का घटिया चेहरा उजागर

पंकज चतुर्वेदी/नदीम ख़ान

एक राजनीतिक दल के आईटी सेल से मिले वीडियो को टीवी चैनल चलाते रहे। उसी के आधार पर दिल्ली पुलिस ने उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगे की साजिश की झूठी कहानी लिख ली। आज उमर खालिद की जमानत अर्जी पर बहस के दौरान मीडिया और पुलिस का यह घटिया चेहरा उजागर हो गया।

उमर खालिद की ओर से अमरावती, महाराष्ट्र में दिए गए भाषण को रिपब्लिक वर्ल्ड नाम के चैनल ने यू ट्यूब पर दिखाया था। वकील त्रिदीप पायस ने जिरह के दौरान कहा, “भाषण के बाक़ी हिस्सों को क्यों छोड़ दिया गया। 23 जून को चैनल को नोटिस भेजा गया कि वे टीवी चैनल और यू ट्यूब पर चली फ़ुटेज सामने रखें।”

इस मामले में चैनल की ओर से दिए गए जवाब को पढ़ते हुए खालिद के वकील ने कहा कि ये ऐसे पत्रकार हैं जो कभी भाषण सुनने ज़मीन पर नहीं जाते लेकिन इसे दिखाते वक़्त बहुत ख़ुश होते हैं। वकील के मुताबिक़, चैनल ने अपने जवाब में कहा है कि उनके पास भाषण की रॉ फ़ुटेज नहीं है और उन्होंने इसे बीजेपी के सदस्य के ट्वीट से लिया है। इस पर अदालत ने पूछा कि क्या बिना सत्यापित किए ही वीडियो को चला दिया गया।

वकील के मुताबिक़, चैनल ने अपने जवाब में कहा था कि इस फ़ुटेज को उनके कैमरामैन ने रिकॉर्ड नहीं किया बल्कि इसे बीजेपी के नेता अमित मालवीय ने ट्वीट किया था। वकील ने जोरदार ढंग से बहस करते हुए कहा कि यह पत्रकारिता की नैतिकता नहीं है बल्कि उसकी मौत है।

वकील ने अदालत के सामने उमर खालिद के उस भाषण का पूरा वीडियो भी चलाया और इसके बाद न्यूज़ 18 के द्वारा चलाए गए भाषण की वीडियो ट्रांसक्रिप्ट पर भी बहस की। इस मामले में न्यूज़ 18 को भी नोटिस भेजा गया था और कहा गया था कि वह उमर खालिद के भाषण की रॉ फ़ुटेज उपलब्ध कराए। यही नहीं एक गवाह दो अलग अलग मामलों में एक ही घटना पर अलग अलग गवाही देता है और जांच अधिकारी ध्यान नहीं देता। असल में यह चार्जशीट झूट, साजिश और फ़र्ज़ी जांच की सी ग्रेड स्क्रिप्ट है।

क्या हुआ कोर्ट में

सुवनवाई के दौरान जज ने दिल्ली पुलिस से सवाल किया कि उमर खालिद पर मुक़दमा किस आधार पर किया?

पुलिस: उनके भाषण के वीडियो के आधार पर

जज : पूरा भाषण किधर है?

पुलिस : हमने तो रिपब्लिक टीवी और नेटवर्क 18 से देखा था।

जज : आप पूरी वीडियो दीजिये?

पुलिस : हमने दोनो न्यूज़ चैनल से पता किया वो दोनों चैनल कह रहे है कि उनके पास पूरी वीडियो नही है, उन्होंने वीडियो की वो क्लिप बीजेपी आईटी सेल के अमित मालवीय से मिली थी।

यही गठजोड़ पूरे देश में है। ऑप इंडिया, जागरण, अमर उजाला से लेकर रिपब्लिक टीवी इंडिया टीवी टाइम्स नाउ आज तक एबीपी जैसे चैनल्स बीजेपी के नेताओं से निर्देश लेकर अफवाहों का बाज़ार गर्म करते है और पुलिस इन्ही दलालो के शोर से बगैर किसी सुबूत गवाहों के मुकदमे लिखती है और लगाते रहिये चक्कर कोर्ट के
अगर वकील और पैरवीकार सही हुए तो शायद जल्दी जान छूट जाए वरना जेल में सबसे अधिक आबादी मुसलमानो की है

(पंकज चतुर्वेदी वरिष्ठ पत्रकर जबकि नदीम ख़ान सोशल एक्टिविस्ट हैं, ये उनके निजी विचार हैं)

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