अनाथालय से रेडियो स्टूडियो तक: समाज के लिये सबक़ है मशहूर रेडियो जॉकी मोहम्मद रफीक़ की सफलता की दास्तां

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श्रीनगरः आरजे (रेडियो जॉकी) रफीक के नाम से मशहूर रेडियो जॉकी मोहम्मद रफीक पीर ने अपना बचपन एक अनाथालय में बिताया, लेकिन वे अब कश्मीर में एक उभरते हुए आरजे हैं और कई लोगों को प्रेरित करते हैं। 28साल के रफीक कश्मीर के हंदवाड़ा का रहने वाले हैं। उनकी अब तक की जीवन यात्रा कई लोगों के लिए प्रेरणा बन चुकी है। वह अपने दर्शकों को सामाजिक मुद्दों और युवाओं को सकारात्मकता की ओर ले जाते हैं।

आरजे ने कहा, ‘मैंने अपना बचपन एक अनाथालय में बिताया है। मुझे स्पष्ट रूप से याद है कि कैसे मैं रेडियो में शामिल होने के लिए ट्यूशन कक्षाओं को छोड़ देता था, मुझे इस जुनून का एहसास कम उम्र में हो गया था।’ रफीक को अपने करियर के शुरुआती दिनों में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए पूरी मेहनत की।

उनके करियर की शुरुआती सफलताओं ने उन्हें ‘वेलपंती’ जैसे विभिन्न गैर-पारंपरिक शो और निजी एफएम पर ‘भडास बॉक्स’ जैसी सामाजिक पहल सहित कई शो की मेजबानी करते हुए देखा। साक्षात्कारों, सोशल मीडिया पर बातचीत और दैनिक जीवन के माध्यम से, वह सामाजिक मुद्दों और कलाकारों के संघर्ष से लेकर कश्मीर में उभरते संगीत उद्योग तक सब कुछ बताते हैं।

रेडियो जॉकी होने के अलावा रफीक ने अभिनय में भी अपनी किस्मत आजमाई है। उन्हें हाल ही में इम्तियाज अली की ‘लैला मजनू’ फिल्म में देखा गया था। रफीक ने कुछ संगीत एल्बमों में भी अभिनय किया है, जहां दर्शकों ने उनके अभिनय कौशल की सराहना की। आरजे रफीक अपने मजाकिया चुटकुलों से हमें खुश करने में कभी असफल नहीं होते।

रफीक की एक सहयोगी सीमा ने कहा, ‘अगर हम रफीक की संघर्षपूर्ण यात्रा देखते हैं, तो यह प्रेरणादायक और प्रशंसनीय है। उन्होंने बहुत ही विनम्र पृष्ठभूमि से शुरुआत की और बचपन में बुनियादी जरूरतों से वंचित थे।’ उन्होंने कहा, ‘उन्होंने यह सब अपनी कड़ी मेहनत से किया है। अगर हम आज जम्मू-कश्मीर में रेडियो जानते हैं, तो यह रफीक की वजह से है।’ सीमा ने कहा, ‘वह ऊर्जा, उत्साह और कड़ी मेहनत से भरे हुए हैं। उनके लिए उनका काम ही उनका जीवन है।’

सभार आवाज़ दि वाइस

 

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