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असम में BJP प्रत्याशी की कार में मिलीं EVM, सवालों में चुनाव आयोग?

गिरीश मालवीय

असम में कल विधानसभा चुनाव का दूसरा चरण का मतदान था और कल रात एक निजी कार में ईवीएम मिली है, यह कार असम के पथरकंडी विधानसभा सीट के बीजेपी उम्मीदवार कृष्‍णेंदु पॉल की बताई जा रही है। सफ़ेद रंग की इस बोलेरो कार का नंबर AS10 B 0022 है और इसमें एक ईवीएम रखी हुई है। आपने कभी सोचा कि इस तरह से कार में EVM क्यो मिलती है ओर वो भी हमेशा बीजेपी से जुड़े लोगों की कार में?

अगस्त, 2019 में क्विंट ने खुलासा किया कि चुनाव आयोग के लिए EVM बनाने वाली कंपनी ECIL ने 2019 चुनावों के दौरान EVM और VVPAT की देखरेख के लिए मुबई की एक फर्म M/s T&M Services Consulting Private Limited से कन्सल्टिंग इंजीनियर लिए. यानी साफ था कि 2019 के आम चुनावों के दौरान EVM और VVPAT तक प्राइवेट इंजीनियर्स की पहुंच थी

ECIL ने अपनी वेबसाइट पर 2015 से मान्यता प्राप्त वेंडर्स की लिस्ट अपलोड की है. इनमें T&M SERVICES का नाम नहीं है. तो सवाल ये है कि आखिर ECIL ने एक गैर मान्यता प्राप्त फर्म से चुनाव संबंधित काम क्यों कराया,  उस वक्त तो चुनाव आयोग ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त SY कुरैशी को जानकारी दी थी कि EVM की फर्स्ट लेवल चेकिंग के लिए सिर्फ BEL और ECIL की सैलरी पर काम रहे इंजीनियरों को तैनात किया गया है तो ऐसा क्यों किया गया होगा किसी ने सोचा?

जिन प्राइवेट इंजीनियरों ने ECIL के लिए काम किया उनमें से कम से कम 150 के relieving letters क्विंट के हाथ लगे थे ये relieving letters T&M Services ने तब जारी किए थे, जब इंजीनियरों के करार खत्म हुए. इन relieving letters से साबित होता है कि इन्होंने ecil के लिए Junior Consultant के तौर पर काम किया. क्विंट ने जब इनमें से कुछ इंजीनियरों से संपर्क किया तो एक ने उन्हें कन्फर्म किया कि उसने T&M Services के लिए 2018 में काम किया. उसने बताया कि प्राइवेट इंजीनियरों को ECIL ने evm और vvpat की देखरेख का क्रैश कोर्स दिया और फिर उन्हें 2018 में हुए कई चुनावों में evm और vvpat की मरम्मत और देखरेख के काम पर लगाया गया. लेकिन जब इसके बारे में चुनाव आयोग से पूछताछ की गयी तो वह साफ मना कर गया

एक इंटरव्यू में पूर्व चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने कहा था EVM को हैक नहीं किया जा सकता, लेकिन अगर EVM चुनाव आयोग की निगरानी से बाहर जाता है तो कुछ भी हो  सकता है. अब यहाँ तो साफ दिख रहा है कि EVM मतदान के बाद बीजेपी उम्मीदवार की गाड़ी में मिल रही हैं…प्राइवेट कंपनियों के इंजीनियरों को चुनाव आयोग EVM और VVPAT मेंटेन करने के ठेके देता है यानी उस पर दुसरो की पुहंच भी है, यह भी बिल्कुल स्पष्ट दिख रहा है. फिर भी यह समझ नहीं आता कि इतने साफ सुथरे सुबूत होने के बावजूद भी हम कैसे मान लेते है कि EVM पवित्र होती है उसमें कोई छेड़छाड़ नही होती?