देश विशेष रिपोर्ट

यूनानी मेडिसिन में डॉ. रहनुमा परवीन ने हासिल किया गोल्ड मेडल, अनूठी है सफलता की कहानी

नई दिल्लीः उत्तर प्रदेश के देवबंद स्थित जामिया तिब्बिया के छात्र/छात्राओं ने चौधरी चरण सिंह विश्विद्यालय के अंतर्गत होने वाली परीक्षा में शत प्रतिशत सफलता हासिल की है। इस परीक्षा में जामिया तिब्बिया की छात्रा डॉ. रहनुमा परवीन ने गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया है। उनके अलावा डॉक्टर आमना ख़ान को भी गोल्ड मेडल से नवाज़ा गया है। जामिया तिब्बिया के इन छात्र/छात्राओं को मेरठ स्थित चौधरी चरण सिंह विश्विद्यालय के दीक्षांत समारोह में राज्यपाल द्वारा गोल्ड मेडल देकर सम्मानित किया गया है। विश्विद्याल के 32 वें दीक्षांत समारोह में यूपी के उप-मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा, एंव राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने यूनानी मेडिसिन में सफलता का परचम लहराने वाली इन छात्राओं को गोल्ड मेडल से नवाज़ा।

कौन हैं डॉक्टर रहनुमा

चौधरी चरण सिंह विश्विद्यालय के 32 वें दीक्षांत समारोह में गोल्ड मेडल हासिल करने वालीं डॉक्टर रहनुमा हापुड़ जनपद के सिंभावली ब्लॉक के मुरादपुर ब्लॉक की रहने वालीं हैं। उनके पिता आस मोहम्मद दिल्ली पुलिस में सब इंस्पेक्टर हैं। अपनी इस कामयाबी पर डॉक्टर रहनुमा का कहना है कि किसी भी सफलता को प्राप्त करने के लिये सबसे पहले परेशानियों से लड़ना आना चाहिए, परेशानियों को दरकिनार कर जो लोग अपने लक्ष्य की ओर मज़बूती से बढ़ते हैं उन्हें सफलता ज़रूर मिलती है।

डॉक्टर रहनुमा की कामयाबी समाज के लिये किसी मिसाल से कम नहीं है। दरअस्ल 2014 में उनकी शादी मेरठ जनपद के ग्राम जिसौरी निवासी वसीम अकरम से हुई थी, उस वक्त रहनुमा ने बीयूएमएस किया हुआ था। लेकिन उन्हें अपनी ससुराल से भी भरपूर सहयोग और मार्गदर्शन मिला, जिसकी वजह से उन्होंने यूनानी मेडिसिन में एमडी करने का निर्णय लिया, और अब उन्होंने गोल्ड मेडल हासिल करके अपनी सफलता का लोहा मनवाया है।

बच्चों को सही माहौल मिले तो खुलेंगे सफलता के दरवाज़े

डॉक्टर रहनुमा के ससुर मोहम्मद असलम भी दिल्ली पुलिस में सब इंस्पेक्टर हैं। इन दिनों वे सुप्रीम कोर्ट में तैनात हैं। अपनी बहु की इस सफलता से मोहम्मद असलम बहुत खुश हैं। असलम कहते हैं कि इंसान की सबसे बड़ी पूंजी उसकी औलाद होती है। अगर इंसान अपने बच्चों की अच्छ माहौल में परवरिश कामयाब है तो उसने न सिर्फ अपने लिये बल्कि समाज के लिये भी आदर्श नागरिक तैयार किये हैं। असलम बताते हैं कि रहनुमा की जब शादी हुई थी तब वह बीयूएमएस फाइनल कर चुकीं थी। लेकिन शादी के बाद भी रहनुमा ने पढ़ाई जारी रखी, इस बीच वह मां भी बनी लेकिन उसने अपनी पारिवारिक ज़िम्मेदारी को अपनी पढ़ाई पर भी हावी नहीं होने दिया। रहनुमा के पती वसीम अकरम मर्चेंट नेवी में अफसर हैं।

डॉक्टर रहनुमा की सफलता पर परिवार में खुशी का माहौल है, सभी रिश्तेदार, मिलने वालों की ओर से इस सफलता पर आने वाले बधाई संदेश का तांता लगा हुआ है। बता दें कि दिल्ली पुलिस में भर्ती होने के बाद मोहम्मद असलम परिवार समेत दिल्ली आकर बस गए थे। पुलिसकर्मी होने के साथ-साथ मोहम्मद असलम समाज को शिक्षा के प्रति जागरुक करते रहे हैं।

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