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डॉ. कफ़ील ख़ान को हाई कोर्ट से मिली बड़ी राहत, AMU में CAA विरोधी भाषण देने के मामले रद्द

इलाहाबादः साल 2017 में गोरखपुर बीआरडी अस्पताल त्रासदी के दौरान चर्चा में आए डॉक्टर कफ़ील ख़ान को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी है। अदालत ने गुरुवार को दिसंबर 2019 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय  में सीएए (CAA) और एनआरसी (NRC) के विरोध में दिए गए भाषण पर दर्ज प्राथमिकी और उनके खिलाफ लंबित पूरी आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया है।

 

इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति गौतम चौधरी की खंडपीठ ने पूरी आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया है। इसी मामले में यूपी सरकार ने डॉ. कफ़ील खान के खिलाफ रासुला लगाया था। हालांकि, पिछले साल इलाहाबाद हाई कोर्ट ने रासुका के तहत डॉक्टर कफ़ील खान की क़ैद को यह कहते हुए रद्द कर दिया था कि उनका भाषण वास्तव में राष्ट्रीय एकता का आह्वान था।

डॉक्टर खान के खिलाफ मामले में एफआईआर दर्ज कराई गई थी, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद, मार्च 2020 में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, अलीगढ़ की अदालत में उनके खिलाफ आरोप पत्र दायर किया गया था। अदालत ने आरोप पत्र का संज्ञान लिया और मामले में कफ़ील ख़ान को तलब किया। इस पर डॉ खान ने हाईकोर्ट का रुख किया और खुद पर हो रही आपराधिक कार्यवाही के आदेश को रद्द करने की मांग की थी।

कौन हैं कफ़ील ख़ान

बता दें कि डॉक्टर कफ़ील ख़ान साल 2017 में उस समय चर्चा में आए थे जब गोरखपुर के बाबा रघुवर दास मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन के अभाव में बच्चों ने दम तोड़ दिया था। उस समय डॉक्टर कफ़ील ख़ान ने अपनी जेब से ऑक्सीजन का पैसा देकर दम तोड़ते मासूम बच्चों को बचाने की कोशिश की थी। इसी वजह से वे रातों रात स्टार बन गए थे, लेकिन उनका स्टार बनना यूपी की सरकार को खल गया और उन्हें जेल भेज दिया गया। कफील ख़ान को सस्पेंड कर दिया गया, और अभी तक उन्हें बहाल नहीं किया गया है।