आशा की क़िस्मत में दिलीप साब नहीं थे

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वीर विनोद छाबड़ा 

नासिर हुसैन अपने ज़माने के मशहूर और बेहद कामयाब प्रोडयूसर डायरेक्टर हुआ करते थे. दिल देके देखो, जब प्यार किसी से होता है, तुमसा नहीं देखा, फिर वही दिल लाया हूं, तीसरी मंज़िल, प्यार का मौसम, यादों की बारात, कारवां, बहारों के सपने, हम किसी से कम नहीं, ज़माने को दिखाना है आदि एक लम्बी फेहरिस्त है उनकी कामयाब फिल्मों की. मनोरंजन के बादशाह कहलाते थे वो. उस दौर के तमाम नामी आर्टिस्ट उनकी फिल्मों में रोल पाने को तरसते रहे. शम्मी कपूर उनके गहरे दोस्तों में थे और आशा पारेख उनकी पसींदादा हीरोइन रहीं. लेकिन वो जिस हीरो के ज़बरदस्त फैन थे, उसका नाम था दिलीप कुमार, अभिनय सम्राट और यूनिवर्सिटी ऑफ़ एक्टिंग. आशा पारेख की भी दिली तमन्ना रही दिलीप की नायिका बनने की.

आख़िर एक दिन नासिर हुसैन सलीम-जावेद के साथ एक ज़बरदस्त स्क्रिप्ट लेकर पहुंचे दिलीप साब के पास. स्टोरी सेशन हुआ. कहानी पसंद आई. बाकी स्टार कास्ट के बारे में दिलीप साब ने पूछ-ताछ की. संतुष्ट हुए. आशा इसमें उनकी पत्नी की भूमिका में थीं. नाम रखा गया – ज़बरदस्त. मुहूर्त क्लैप आशा ने दिया. कुछ दिन बाद शूटिंग शुरू होनी थी, लेकिन नासिर ने आशा को फोन किया कि स्क्रिप्ट में कुछ बदलाव की ज़रूरत है. बाद में बात करूँगा. लेकिन वो ‘बाद में बात करने’ वाला दिन कभी नहीं आया. आशा के दिलीप साब के साथ काम करने के अरमान धरे रह गए. उलटे एक दिन एक न्यूज़ एजेंसी ने आशा के हवाले से ख़बर उड़ाई कि आशा को दिलीप के साथ काम करना पसंद नही. दिलीप साब की पत्नी सायरा की आशा पक्की सहेली हुआ करती थीं. आशा ने फ़ौरन सायरा को फ़ोन किया कि न्यूज़ एजेंसी की ख़बर बकवास है. सायरा ने आशा को आश्वस्त किया कि उसे और दिलीप साब को तुम पर पूरा यक़ीन है. आशा की ऑटोबायोग्राफी में भी इसका ज़िक्र है.

‘ज़बरदस्त’ के डिब्बे में जाने की एक और अफ़वाह ये भी उड़ी कि दिलीप साब अपने सामने क़ादर ख़ान को देख भड़क गए – ये तो मेरी ही कॉपी कर रहा है. बाद में ये भी बकवास साबित हुई. दिलीप साब ख़ुद क़ादर के कद्रदान रहे थे. उन्हें ‘ताश के पत्ते’ नाटक में देख कई प्रोड्यूसरों से उनकी सिफ़ारिश की थी. अपनी सगीना और बैराग के लिए साइन कराया.  कानून अपना अपना में भी दोनों ने काम किया. क़ादर भी दिलीप साब के फैन हुआ करते थे. उनकी एक्टिंग में दिलीप साब की झलक भी दिखती थी.

लेकिन नासिर की ज़िद्द थी कि ‘ज़बरदस्त’ बनेगी ज़रूर. और फिल्म बनी भी, मगर न उसमें दिलीप कुमार थे, न आशा और न क़ादर खान. संजीव कुमार, सन्नी, जयाप्रदा और राजीव कपूर को लेकर बनी और ज़बरदस्त फ्लॉप रही. लेकिन ये रहस्य रहा है कि इस नयी ज़बरदस्त की कहानी पहली वाली ज़बरदस्त वाली थी जिसे दिलीप कुमार ने पसंद किया था. और ये भी गहरा रहस्य रहा कि दिलीप कुमार के साथ नासिर हुसैन की ज़बरदस्त क्यों नहीं बनी.

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