घायल होने के बावजूद भी आतंकियों से लड़ते रहे थे ज़ाकिर हुसैन, इस अदम्य साहस के लिये मिला शौर्य चक्र

जम्मू-कश्मीर के बारामूला में आतंकवादियों को मार गिराने में अहम भूमिका निभाने वाले सीआरपीएफ के जांबाज़ सिपाही ज़ाकिर हुसैन को सोमवार को शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया। जाकिर हुसैन सीआरपीएफ की उस टीम का हिस्सा थे, जिसने सितंबर 2018 में एक मकान के पीछे छिपे जैश-ए-मोहम्मद के तीन आतंकवादियों को मार गिराया था। गोली लगने के बावजूद हुसैन तब तक एनकाउंटर स्थल पर डटे रहे जब तक कि तीनों आतंकवादी ढेर नहीं हो गए।

जानकारी के मुताबिक, 13 सितंबर 2018 को 10 बजकर 55 मिनट पर धीरती गांव के एक मकान में तीन विदेशी आतंकवादियों के छिपे होने की सूचना मिली थी। इसके बाद सीआरपीएफ की एक टीम आतंकियों से मुकाबला करने के लिए निकल पड़ी थी, जिसमें कॉन्स्टेबल जाकिर हुसैन भी शामिल थे। एनकाउंटर के दौरान आतंकवादियों ने सीआरपीएफ की टीम पर हमला कर दिया और गोलीबारी शुरू कर दी। सीआरपीएफ की टीम ने आतंकियों पर जवाबी हमला किया।

टीम में शामिल उपकमांडेंट हर्षपाल सिंह के साथ मिलकर जाकिर हुसैन ने आतंकवादियों को मुंहतोड़ जवाब देना शुरू कर दिया। इस मुठभेड़ में एक आतंकवादी मारा गया। वहीं दो अन्य घायल हो गए। जाकिर हुसैन और हर्षपाल सिंह को भी गोली लगी, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। कॉन्स्टेबल जाकिर हुसैन की इस अप्रतिम वीरता को देखते हुए उन्हें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सोमवार को शौर्य चक्र से सम्मानित किया।

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